Archive for December, 2010

क्या अमेरिका की भारतीय राजदूत या भारत सरकार का कोई मंत्री आम जनता से अलग है? – Is Indian Ambassador to USA or any Minister of Government of India different than general public?

December 10, 2010

मैं अमेरिका की भारतीय राजदूत  मीरा शंकर के बारे में एक समाचार, विभिन्न समाचार पत्रों में पढ़ा जिसमें किसी एअरपोर्ट पर उनके सामान की जाँच होने पर  भारत ने बखेड़ा खड़ा कर  दिया था | भारत की मीडिया ने इसे बहुत बड़ा  डील बना लिया था और इसे प्रथम पृष्ठ पर कई दिनों तक छापा करता था | इससे दूसरे विकशित देशों में भारत की बहुत बदनामी हुयी थी | हमने कभी नहीं पाया की विकशित देश के लोग इस तरह का मुद्दा कभी उछाले हैं और किसी देश के नियम-कानून के पालन में अपना अनादर महसूस करते हैं या भारतीयों जैसा अहंकार का मुद्दा बनाते हैं | विकशित देशों में आम जनता एवं लोक-सेवकों में कोई अंतर नहीं होता और सरकार के लिए वेतन पर काम करने वाले लोक-सेवकों को आम जनता से ऊपर स्थान देने के  लिए इतना बड़ा बखेड़ा नहीं होता | भारतीय जनता को बराबरी क्यों नहीं पसंद है और वे क्यों सरकारी नौकरों को ज्यादा पदवी या भाव देना चाहते हैं? सुरक्षा की दृष्टी से मीरा शंकर  के पर्स, थैलों और  दूसरे सामानों की जांच करने में क्या गलत था? यह तो प्रत्येक भारतीय के साथ होता है और वह भी भारत की आम जनता की तरह ही हैं |  हम सामंती मानसिकता को कब तक ढोते रहेंगे ? क्या हमें  इसका अंत  नहीं करना है?  मेरा, पढ़े-लिखे मीडिया के लोगों से निवेदन है की भारत में ऐसे किसी कर्यवाही को हमेशा हतोत्साहित करें जहाँ फालतू के प्रोटोकॉल का बहाना  लेकर बराबरी के नियम कानून को तोडा जाय |  मुझे ऐसा लगता है की आज भी भारतीय, ब्रिटिश राज के नियम-कानूनों को ढोना  चाहते हैं और सरकारी नौकरों को विशिष्ट व्यक्ति की तरह पूजना चाहते हैं | चूँकि मीरा शंकर को उनके काम के लिए भारत सरकार से पैसा मिलता है और बाकि वे भारत की एक आम नागरिक की तरह ही हैं, तो वह अन्य आम जनता जैसे मेरे ग्रामीण दोस्त बुधई राम से ज्यादा महत्वपूर्ण एवं आदरणीय क्यों हुयी? इसके लिए हमें अमेरिकियों को बधाई देनी चाहिए जो आम जनता एवं लोक-सेवकों में कोई  भेदभाव नहीं करते और भारत  के ऐसे कई सामंती मानसिकता वाले लोगों की जांच निडर होकर करते हैं | मेरा भारत के विदेश मंत्री कृष्णा को सुझाव है की इसे वो कोई मुद्दा न बनायें और यदि मुद्दा बनाना  ही  है तो फिर उन सभी भारतीयों के लिए बनायें जो प्रतिदिन इस दौर से गुजरते हैं और आप जैसे सरकारी सेवकों को तनख्वाह  देने के लिए सरकारी खजाने में योगदान भी करते हैं |  कब भारत के लोग यह समझेंगे की एक प्रजा-तंत्र में आम जनता, सरकारी नौकरों जैसे राजदूत, मंत्री  इत्यादि की बॉस होती है, और वे कब ऐसे प्रोटोकॉल को समाप्त करने के लिए कदम उठाएंगे जो इस तरह के भेदभाव के लिए ब्रिटिश राज के समय में बनाये गए थे? हम कब समानता के कानून पर अमल करेंगे, जैसा की अमेरिका में होता है?

I read a news on Meera Shankar, Indian Ambassador to USA. Most of the media make it a big news and printed it on front page. Why Indians don’t love equality and wanted public servant respected? Was there anything wrong in searching her baggage and other stuff for security reasons? She is like any other general public of India. Indians still want to practice British kind of rule, the VIP treatments to public servants. She is paid for her work so why is she more important and respectable than any other general public like my poor village friend Budhdhai Ram. Good Job Americans!!! Don’t cry Mr. Krishna, there is nothing wrong in it, otherwise you should cry for all Indians who passes through this kind of search everyday and they are the people who contribute for the payment of public servants like you. When people of India will understand that general public is boss of public servants and work to abolish such protocols which differentiate the public servants and general public. When are we going to practice the law of equality, like US does?

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भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के सदस्यों को खुली चिट्ठी-Open Letter to Members of Bhrastachar Mitao Sena

December 1, 2010

हमारे कई सदस्यों ने उत्तर प्रदेश में विभिन्न स्तर पर होने वाले चुनावों में लड़ने की अनुमति एवं उसमें अन्य प्रकार की मदद के  लिए भ्रष्टाचार मिटाओ सेना की कार्यकारिणी समिति को संपर्क किया | कार्यकारिणी समिति को दृढ़-पूर्ण अनुभव है की उत्तर प्रदेश में दोषपूर्ण जन-तन्त्र होने की वजह से अधिकतर उम्मीदवार रुतबा एवं पैसा बनाने की लिए चुनाव लड़ते हैं और इसे जीतने के लिये किसी भी हद तक  पैसा खर्च करने के लिए तैयार रहते हैं | उत्तर प्रदेश में चुनाव बाहुबल, धनबल, देशी दारू,  विदेशी शराब, धर्म, जाती-पांति व  सम्प्रदाय  के  आधार   पर लड़ा जाता है और समिति  पूर्ण रूप से यह मानती है की सभी उम्मीदवार इस सोच के साथ मैदान में आते हैं की चुनाव जीतने के बाद उन्हें कई स्तरों पर बहुत सारे अवसर लूट-खसोट कर पैसे अर्जित करने के साथ रुतबा कायम करने के लिए मिलेंगे | उत्तर प्रदेश में लागू प्रजा-तंत्र विजेताओं को एक तरह से लूट-खसोट करने का लाइसेंस दे देता है और वे बिना किसी डर एवं रोक-टोक के जनता का पैसा लूटने में मसगूल हो जाते हैं | जन-प्रतिनिधि चुने जाने के बाद वे इसी फ़िराक में लगे रहते हैं की चुनाव में खर्च किये हुए पैसे कैसे निकाला जाय और इसके लिए हर तरह के भ्रष्ट कार्यों को बढ़ावा देते हैं | वहां पहुंचकर वे यह भूल जाते हैं की वे आम जनता के नौकर हैं तथा अपने आप को आम जनता के ऊपर समझने लगते हैं और उत्तर प्रदेश की प्रजा-तंत्र कुछ नहीं कर पाती है, अन्यथा कौन बेवकूफ इतना पैसा खर्च कर जनता का नौकर बनना चाहेगा |  जब तक भ्रष्टाचार को सरकारी तंत्र से पूरी तरह से मिटा दिया नहीं जाता तब तक समिति की यह सोच  है की उत्तर प्रदेश में किसी भी चुनाव में अपने उम्मीदवार के लिए  पैसे  के साथ समर्थन करने के लिए उपर्युक्त वातावरण नहीं है | हाँ इतना जरूर है की समिति अपने सदस्यों को चुनाव में नैतिक समर्थन दे सकती है |  हम चाहते हैं की हमारे सदस्य पहले भ्रष्टाचार मिटाने  के लिए कोई ठोस काम करें जिससे जनता में हमारी पैठ के साथ हम पर  यकीन हो ताकि वे बिना पैसे खर्च किये चुनावों  में हमारा समर्थन करें |  यह हमारे लिए सही समय नहीं है और चुनाव में कूदने के पहले  हम अपने आप को स्थापित करना चाहते हैं |  लेकिन समिति किसी भी ऐसे लोगों को संस्तुति के साथ अपना पूरा नैतिक समर्थन देगी जो अपने बल पर चुनाव लड़ना चाहते हैं  और विजयी होने के बाद भ्रष्टाचार मिटाओ सेना की उद्देश्यों के लिए काम के साथ इमानदारी-पूर्वक राज्य की सेवा करें |    

भ्रष्टाचार मिटाओ सेना को विकशित करने एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन को हम  चुनावी  एजेंडे  को  ध्यान में रखकर नहीं कर रहे हैं |   हमारा  मूल उद्देश्य यह है की हम  लोगों तक पहुंचे और उनके किसी भी काम में भ्रष्टाचार के वजह से बाधा आ रही हो तो बिना किसी आश के उनकी पूरी मदद करें |  हमें उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले के हर एक ब्लाकों में टीम बनाकर एक संयोजक की नियुक्ति करनी है जो लोगों के लिए धरातल पर कुछ कर सके | यदि हम भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के उद्देश्यों पर काम करते हैं तो लोग हमें अवश्य जानेंगे और बाद में यदि हम चुनाव लड़ते हैं वो हमारे लोगों को प्यार से वोट देना पसंद करेंगे | अमेरिका की टीम भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के लक्ष्यों की पूर्ति के लिए भारत की टीम का पैसे की मदद के साथ इसकी योजनाओं पर कार्यान्वयन के लिए  मार्गदर्शन भी करेगी | भ्रष्टाचार मिटाने की दिशा में हमारे कार्यकर्त्ता शुरू-शुरू में सूचना के अधिकार के तहत प्रत्येक लोक-सेवक की बैंक खातों की निगरानी, स्कूलों में जाकर बच्चों को एक इमानदार नागरिक बनने का सपथ दिलाना, सरकारी विभागों में जाकर लोक-सेवकों से जनता के किसी भी कार्य के लिए घूस न लेने एवं आचार सहिंता के पालन के लिए सपथ दिलाना, बाद में यदि लोक-सेवक अपनी प्रवृति न बदलें  तो उनके खिलाफ कानून कार्यवाही या मुकद्दमा, इत्यादि कार्य कर सकते हैं |

हम लोग उपर्युक्त कार्यों के लिए शनैः-शनैः जरूर पहचाने जायेंगे | हम चाहते हैं की हमारे टीम के सदस्यों को नाम एवं प्रसिद्धि मिले और वे आगे चलकर एक पब्लिक फिगर बनें | बहुजन समाज पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी एवं भारतीय जनता पार्टी को पहचान पाने के लिए २५ वर्षों से अधिक का समय लगा है और स्थानीय पार्टियाँ जैसे समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल इत्यादि का जन्म इन पहचान वाली पार्टियों से हुआ  है अतः इसलिए ये भी थोड़ी-बहुत स्थानीय स्तर पर जानी जाती हैं, तो हम ३ वर्षों में ही कैसे प्रतिष्ठित हो सकते हैं? हमे भी थोडा समय लगेगा और इसके लिए कठिन परिश्रम करना पड़ेगा |  हमें नहीं मालूम की हमारे जीवित रहते उत्तर प्रदेश की भ्रष्ट व्यवस्था को बदला जा सकेगा लेकिन मेरा अटूट विश्वास है की हमारे अधूरे कार्यों को पूरा करने में हमारी नयी पीढ़ी अवश्य कामयाब होगी |  हमें धैर्य रखने की जरूरत है | हम चाहते हैं की भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के प्रत्येक सदस्य चमकें एवं उन्हें जिंदगी में एक मुकाम हासिल हो लेकिन इसके लिए हम चाहते हैं की हमारे सदस्यों का चरित्र दूसरों से कुछ हटकर हो |  एक सदस्य दूसरों से अलग निम्न गुण सम्पन्न होने पर हो सकता है :

  • राज्य की जनता के लिए पहले सोचे और अपने लिए उसके बाद
  • बहुत ही इमानदार हो
  • देने में विश्वास रखे, लेने में नहीं
  • हमेशा राज्य की जनता के कल्याण के लिए काम करे और उन्हें वाजिब सम्मान दे
  • किसी भी भ्रष्ट कार्य में लिप्त न होकर दूसरों के लिए एक उदहारण बने
  • यदि सरकारी नौकरी में है तो सिर्फ दिए गए वेतन पर निर्वाह करे और गलत तरीके से पैसा कमाने का न सोचे
  • जनता का काम करने के बदले किसी और चीज की आशा न रखे
  • किसी भी तरह का भ्रष्टाचार बर्दाश्त न करे

मैं आपको अफ़सोस के साथ यह सूचित करता हूँ की समिति इस समय आपको चुनाव में पैसे से मदद नहीं कर सकती लेकिन नैतिक रूप से हमारे सदस्य आपको सहयोग एवं अपना पूरा समर्थन देंगे | समिति के तरफ से आपको ढेर सारी शुभकामनाएं |  

Many of our members contacted Executive Committee of Bhrastachar Mitao Sena (BMS) for help and permission to contest the various kinds of election in Uttar Pradesh. The Executive Committee strongly feels that in our faulty democracy, most of the candidates contest for an election in UP for the status and growing money, and they spend money at any level to win the elections. Nowadays, the election is fought & won on the basis of Bahubal, Desi Daru, wine and money, and committee believes that most of the candidates contest election having in mind that they would be getting lot of chances to do loot-khasot at various levels. This kind of democracy gives a license to winners to perform loot-khasot without any check on them. In these circumstances, the winners will try to recover the money spent in the election by hook or crook and this way they would get involve in corruption. They forget to behave like a public servant and think themselves above the general public; otherwise there would be no need to spend money to become a public servant. Until corruption is removed from the system, committee thinks that there is not a suitable environment in UP to support with money to our members, but it can provide only the moral support to a candidate in the elections. We want our members to do some concrete work on removal of corruption first, so that public can have faith in us and support us without spending the money in elections. This is not the right time for us and we would like to establish ourselves before jumping to fight an election. But committee would recommend and support anyone who can fight election on their own and work for the goal of Bhrastachar Mitao Sena and honestly could serve the State.

Election isn’t an agenda for us in mind for our work and to grow the Bhrastachar Miao Sena (BMS). Our goal is to reach the people without anticipating anything and help them if corruption is coming in their way. We need to form a team and elect conveners from every Block of a district in UP to do some ground work. People will know us once we could do as per agenda of Bhrastachar Miao Sena and later they would love to vote us. The committee from USA can guide the team in India on implementation plan with money to achieve our goal. Few steps in this direction are to monitor (using the RTI) the bank accounts of Lok-Sevaks, visit every school and teach students on how to become good citizen and request to take oath, and then we will reach government offices and request the officials to take oath on not to take bribe for official work of public and to follow the code of conduct. Later take legal action against corrupt officials/Lok-Sevaks, if they don’t mend their way.

We will slowly get recognized. We want our team members get name and fame and become a public figure. It has taken BSP, Congress and BJP more than 25 years to get recognized at National level and other parties such as SP, RJD etc were born out of them so they got recognized, but limited to a region. I am not sure, if we can change the corrupt system in our life time, but I believe our next generation will certainly do. We have to keep patience. We would like our members of Bhrastachar Mitao Sena to shine and grow but character of our members should have qualities different than others. They should be different in the manner such as: 

  • They should think about Uttar Pradesh first before thinking for themselves
  • Should be honest
  • Believe in ‘give’ and not to ‘take’
  • Work for the welfare of our people
  • Set an example by not involving in any kind of corrupt practices
  • Work without anticipation of anything
  • Not to tolerate corruption of any kind etc. 

I regret to inform you that the committee can’t support with money but morally this time. Committee wishes you all the best.


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