Archive for March, 2011

Are we in category of 92% or 8% – क्या हम ९२% जन या ८% में आते हैं?

March 11, 2011
भ्रष्टाचार मिटाओ सेना * ताड़ी बड़ा गाँव * बलिया *  उत्तर प्रदेश - २२१७११ *  भारत
भ्रष्टाचार मिटाओ सेना * ताड़ी बड़ा गाँव * बलिया * उत्तर प्रदेश – २२१७११ * भारत

भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के अध्यक्ष के डेस्क से

एक सर्वेक्षण के मुताबिक़ भारत के ९२% लोग सिर्फ व सिर्फ अपने और अपने परिवार  के लिए ही जीते हैं और मौका मिलने पर लूट-खसोट के साथ दूसरों का हक़ मारने  के लिए भी तैयार बैठे हैं | केवल ८% लोग ऐसे हैं जिन्हें मौका मिलने पर भी लूट-खसोट नहीं करते और कभी भी दूसरों का हक़ नहीं मारते | ये अपने परिवार के साथ दूसरों के लिए भी जीते हैं और ये इंसान, देवता, ऋषि या भगवान् की श्रेणी में आते हैं |  इंसान की श्रेणी में वह आता है जो अपने रोज़ की कमाई एवं उर्जा का १०% भाग दूसरों की सेवा में लगाता  है |  देवता की श्रेणी में वह आता है जो अपने रोज़ की कमाई एवं उर्जा का ५०% भाग दूसरों की सेवा में लगाता  है |  ऋषि  की श्रेणी में वह आता है जो अपने रोज़ की कमाई एवं उर्जा का ९०% भाग दूसरों की सेवा में लगाता  है |  भगवान् की श्रेणी में वह आता है जो अपनी रोज़ की कमाई एवं उर्जा पूरा का पूरा दूसरों की सेवा  में लगा देता  है |  क्या आप बता सकते हैं की आप किस श्रेणी में आते हैं? हम चाहते हैं की आप लोग ८% के श्रेणी में आयें और इसके लिए हम आपसे थोडा त्याग की कामना करते हैं | जैसे सुभाष चन्द्र बोश ने कहा था की आप हमें खून दें  हम आपको आज़ादी देंगे  वैसे ही हम आपसे भ्रष्टाचार से दूर रहकर पहले  अपने लिए न सोचकर प्रदेश के लिए सोचने के लिए  त्याग  और भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के लिए सहयोग चाहते हैं और हम आपको इसके बदले में एक भ्रष्ट-मुक्त सुशासन एवं आने वाली नयी पीढ़ी के लिए एक सुखमय भविष्य देने की कोशिश करेंगे  |

यदि आप कुछ समय, पैसा और उर्जा निकालकर प्रधान मंत्री को संबोधित नीचे दिए गए पत्र को अपने संसद  सदस्य या विधायक   तक   पहुंचाते हैं ताकि एक कानून बन सके जिससे जिले का प्रशाशन आम जनता के आम हाथों  में जा सके तो इससे भ्रष्टाचार रोकने में मदद मिलेगी और जिले में एक सुशाशन स्थापित होगा जिससे माध्यम से गरीब लोगों में भी सुखहाली आएगी और इस कार्य की वजह से हम भी जरूर ८% के श्रेणी में आ सकते हैं |

यदि संलग्न पत्र के ऊपर कानून बनता है तो यह उत्तर  प्रदेश के प्रजा-तन्त्र में एक अद्वितीय बदलाव ला सकता है  | भ्रष्टाचार मिटाओ सेना आप के इस मदद के लिए बहुत ही आभारी रहेगी | 

                                                   भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक चिट्ठी 

दिनांक: १-जुलाई-२००९

श्री मनमोहन सिंह, प्रधानमंत्री, भारत सरकार

मैं समाज के कल्याण के लिए कार्य कर रहा हूँ और इस शोध में लगा हुआ हूँ की कैसे दीन, वंचित और गरीब के जीवन यापन में कुछ सुधार लाया जाय |  मैं इस पत्र में इसके लिए कुछ योजनायें लिख रहा  हूँ और इस दिशा में आपकी सोच एक सराहनीय कदम होगा |

मैंने देखा है की सरकार, सरकारी योजनाओं जैसे ग्रामीण रोज़गार योजना और ऐसे ही अन्य दूसरे सामाजिक कल्याण की योजनों पर अथाह पैसा खर्च करती है लेकिन वास्तविकता में यह गरीबी मिटाने के लिए उतना प्रभावकारी सिद्ध नहीं हो पा रहा है जितना की होना चाहिए | इन सबका एक ही कारण है – वितरण प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार   | अधिकांशतः सरकारी नौकरों और दलालों तक ही इन योजनाओं  का पैसा सिमित होकर रह जाता है और यह कुछ ही वास्तविक लाभार्थी तक पहुँच पाता है |  अतः इस अथाह खर्च का क्या उपयोग है जब तक की इन योजनाओं को असली लाभार्थी तक पहुंचाने के लिए हमारे पास इमानदारी से लागू करने वाली सरकारी तंत्र विकसित न हो? इसलिए मैं कुछ बजट सुशाशन एवं सत्ता का गाँव स्तर तक विकेंद्रीकरण के लिए रखने के लिए प्रस्तावित कर रहा हूँ जो की भ्रष्टाचार मिटाने में कारगर सिद्ध होगी और असली लाभार्थी को उसका हक़ दिलाएगी |  बहुत  सारे राजनितिज्ञ सत्ता के विकेंद्रीकरण के बारे में अपना राय दिए हैं लेकिन इसका कार्यान्वयन उतना प्रभावी नहीं है जितना की होना चाहिए |

आज जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान का नियंत्रण आम जनता के हाथो में नहीं है और उन्हें मुख्यमंत्री के अलावा कोई नहीं हटा सकता |  चूँकि  ये आम जनता के द्वारा चुनकर नहीं आते अतः इन्हें इनके  रिटायर्मेंट  के पहले नहीं हटाया जा सकता और इस तरह से  इन्हें कोई  भ्रष्ट  कार्य करने में डर नहीं लगता | यदि जिलाधिकारी का चुनाव सीधे जनता के वोट  के माध्यम से पांच साल के लिए हो  तो थोडा  उनमें  डर रहेगा की उनके भ्रष्ट कामों के वजह से उन्हें पांच साल के बाद सड़क पर आना पड़ सकता है | अतः वह गलत काम करने में हिचकिचाएंगे | इसके लिए मैं निम्न  संविधान बनाने का प्रस्ताव दे रहा हूँ जिससे जिला प्रशासन आम लोगों के  हाथों में होगा |

१. राज्य के ही तर्ज पर प्रत्येक जिला स्तर पर विधान-सभा का गठन हो | इसके अंतर्गत  जिले के लोग जिले का एक मुख्यमंत्री सीधे तौर पर अपने बहुमूल्य वोट के माध्यम से  चुनें  और वो  मुख्यमंत्री चुने हुए प्रधानों से जिले के मंत्रीमंडल का निर्माण करे और जिले का प्रशासन संभालने के साथ जिले की संसाधनों की देख-भाल करे | राज्य के मुख्य-मंत्री के तरह ही जिले के मुख्य-मंत्री को जिले स्तर का संवैधानिक अधिकार (जो की आज जिलाधिकारी में निहित है )  प्राप्त हो और प्रत्येक ग्राम-प्रधान जिला विधान-सभा का सदस्य हो | राज्य सरकार, जिला सरकार के कार्यों में तब तक  दखल न दे जब तक  की यह संविधान के खिलाफ न हो (जैसा  की आज राज्यों एवं केंद्र के बीच है) | इस तरह से राज्यों को सुशाशन के वास्ते विभाजित करने के जगह जिलों को विभाजित कर सकते हैं और इसमे कम खर्च भी आएगा |

२. मुख्यमंत्री किसी भी राजनितिक पार्टी का हो सकता है और और वह किसी भी पार्टी के प्रधान को अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर सकता है | जिले के सारे अधिकारी और कर्मचारी मंत्रिमंडल के नियंत्रण में रहें और जनता को यह अधिकार हो की मंत्रीमंडल के सदस्यों को जनता की कसौटी पर खरा न उतरने पर ५१% वोट के माध्यम से वापस बुला सके | इसके साथ ही जिले का एक लोक-पाल भी नियुक्त किया जाय जो की भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर जिले के किसी भी मंत्रिमंडल के सदस्य या अधिकारी के खिलाफ जांच कर ३-महीने में अपना फैसला सुना दे |  इस तरह से जिला प्रशासन लोगों के हाथ में होगा और यह आम जनता का स्थान लोक-सेवकों से ऊपर होने का अहसास दिलाने के साथ ही लोगों को एक भ्रष्ट-रहित सुशासन प्रदान करेगा |

३. जिले के लिए नियुक्त IAS/IPS अधिकारी  किसी मंत्री-प्रधान के अधीन काम करेंगे और प्रधान को दिए गए विभाग में एक प्रबंधक के रूप में कार्य करेंगे |  बेकार IAS/IPS अधिकारी  को हटाने के प्रावधान के साथ इन पदों को धीरे-धीरे  प्रबंधन के पेशेवरों  से बदला जाय |  इससे  IAS/IPS  पर होने वाले खर्च पर लगाम लग सकती है और सामंती युग का अंत करने में भी मदद मिलेगी | आम जनता जो की जिला सरकार में नहीं है और नियम-कानून का अक्षरशः पालन करती है उनका स्थान जिले के मुख्य-मंत्री से ऊपर होगा | जिले का मुख्य-मंत्री, सारे ग्राम-प्रधान  एवं सरकारी अधिकारी आम जनता को उचित  आदर देंगे और अपना बॉस समझेंगे |

 ४. सभी जन-प्रतिनिधि के पद को वेतन पर काम करने वाला बना दिया जाय और उन पर सरकारी नौकरों का संविधान लागू हो | इस तरह से बहुत सारे शिक्षित बेरोजगारों को जन-प्रतिनिधि के रूप में काम मुहैय्या होगा और उन्हें अपने जिला-वासियों का सेवा करने का मौका भी मिलेगा | इस प्रणाली के लागू होने पर आम जनता को गाँव में ही उनका जन-प्रतिनिधि (ग्राम-प्रधान) मिल जायेगा जो उनकी समस्यों को सुलझाने के लिए जिला विधान-सभा में उनकी आवाज़ उठाएगा और उसका जल्द ही निपटारा स्थानीय अधिकारीयों  के द्वारा हो जायेगा | इसके लिए उन्हें संसद सदस्य या विधायक को पकड़ने के लिए इधर-उधर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और इससे जीवन जीना आसान  हो जायेगा |  

५. जिला स्तर पर आज के सारे सरकारी प्रारूप को वैसा ही  रख सकते हैं, सिवा इसके की  जिला स्तर  के सभी निर्णय जिला मंत्री-मंडल लेगा न की राज्य सरकार | इसके अलावा गाँव के नीचे स्तर के कर्मचारी  से लेकर जिले के मुख्य-मंत्री तक के लिए सारी सुविधाएं एक सामान होंगी | सिर्फ उनकी तनख्वाह और संवैधैनिक अधिकार में ही अंतर होगा | किसी को भी ब्रिटश राज से छानकर आ रही भव्य जीवन जीने का सुविधा सरकार के तरफ से नहीं दी जाएगी | इससे सरकार बनाने  वाले उन भ्रष्ट तत्वों पर रोक लग सकती है जो इसमे लूट-पाट एवं रुतबा के लिए आते हैं | इसके साथ ही सरकारी खर्च में बहुत ही भारी कटौती भी हो सकती है |

जिला स्तर के पूर्ण संविधान के लिए आप हमसे हमारे इ-मेल के पता vinay_k_singh@hotmail.com पर संपर्क कर सकते हैं |

पूर्ण विवरण के लिए मेरी किताब, उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश में कैसे बदलें पढ़ें  |

भ्रष्टाचार मिटाओ सेना से भ्रष्टाचारियों के खिलाफ शिकायत के लिए नीचे क्लिक करें –  

https://vinay1340.wordpress.com/bhrastachar-mitao-sena-%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%93-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%be/ 

बलिया में संवैधानिक प्राधिकार का दुरुपयोग – Misuse of Constitutional Authorities in Ballia

March 1, 2011
भ्रष्टाचार मिटाओ सेना * ताड़ी बड़ा गाँव * बलिया *  उत्तर प्रदेश - २२१७११ *  भारत
भ्रष्टाचार मिटाओ सेना * ताड़ी बड़ा गाँव * बलिया * उत्तर प्रदेश – २२१७११ * भारत

भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के अध्यक्ष के डेस्क से

प्रिय हर एक लोग,

मैं सुरेन्द्र सिंह, संयोजक, द्वाबा विकाश मंच, बलिया के बारे में एक समाचार पढ़ा | वह बलिया में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे थे और इसी सन्दर्भ  में एक विधवा की मदद की कोशिश कर रहे थे |  वे एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर बैरिया के उप-जिलाधिकारी के गलत कार्यों के लिए अपने अधिकार के तहत उससे तर्क-वितर्क तथा उसका विरोध किये और उप-जिलाधिकारी के न सुधरने पर गरीब विधवा की मदद के लिए  शांति-पूर्ण धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिए |  ऐसा करने में हमे भीं भी कुछ गलत नहीं दिखता लेकिन पता नहीं उप-जिलाधिकारी को क्यों यह नागवार गुजरा और जिला प्रशासन के मन में क्या आया की उसने सुरेन्द्र सिंह के ऊपर गैंगस्टर का मुक़दमा लाद दिया | विश्वस्त सूत्रों से मिले खबर के मुताबिक़ उनके ऊपर यह निराधार और मनगढ़ंत मुक़दमा उन्हें उत्पीड़ित करने के लिए ठोका गया | एक दोष-विहीन प्रजा-तंत्र में ऐसा नहीं होता | यदि कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ एवं जनता की भलाई  के लिए लड़ता है, और उसे उत्पीड़न एवं ऐसी जलालत का सामना करना पड़ता है तो एक आदमी कैसे उत्तर प्रदेश की  त्रुटी-पूर्ण एवं भ्रष्ट प्रजा-तंत्र को बदलने के लिए कार्य कर सकेगा? ऐसा लगता  है की उत्तर प्रदेश के लोक-सेवक जनता को अपना मालिक नहीं समझते बल्कि आम आदमी पर अपना अहम् और श्रेष्ठता जताना चाहते हैं |  यदि संवैधानिक प्राधिकार  इस तरह से व्यवहार  करेगा तो हमारे लिए उत्तर प्रदेश में एक सच्ची प्रजा-तंत्र को विकशित करने में बहुत कठिनाई आएगी और आम जनता को  ब्रिटिश-राज के नियमों के अधीन रहने के लिए मजबूर होना पड़ेगा |  हम रोज़ देखते हैं की संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों में इतनी हिम्मत नहीं होती की वह किसी  शक्तिशाली, भ्रष्ट या प्रभावशाली व्यक्ति, जो प्रतिदिन कानून  की धज्जियाँ उड़ा रहा है,  के खिलाफ कोई कदम उठा सके लेकिन अपना पूरा दम  सुरेन्द्र सिंह जैसे अच्छे  एवं   इमानदार  नागरिक को परेशान करने के जरूर लिए लगा देते हैं | हमने कई बार प्रभावशाली व्यक्तियों के द्वारा जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान या उप-जिलाधिकारी के साथ दुर्व्यवहार करते हुए एवं पुलिस निरीक्षकों को खुले-आम चांटा मारते हुए देखा है लेकिन उनके खिलाफ गैंगस्टर का मुक़दमा नहीं लगाया जाता तो सुरेन्द्र सिंह के खिलाफ क्यों?  जिस भी लोक-सेवक ने सुरेन्द्र सिंह के साथ ऐसा कृत्य किया है वह प्रशासन में रहने के काबिल नहीं है और उसके इस हरकत की कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए |  लोक-सेवकों को यह समझना चाहिए की वे उस पद पर जनता के खातिर हैं न की जनता उनके खातिर |  उनको जबरदस्ती इस काम पर नहीं लगाया गया है बल्कि वे खुद ही जनता की सेवा के लिए अपनी इच्छा से आये हुए हैं और काम के बदले में जनता के पैसे से मेहनताना भी पाते हैं |  यदि वे जिम्मेदारी पूर्वक अपनी संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन नहीं कर सकते तो वो स्थिपा देकर जाने के लिए स्वतंत्र हैं, उन्हें कोई नहीं रोका  है | उनके पद को पाने के लिए कई लोग पंक्ति में लगे हुए हैं | 

मुझे नहीं पता की  हम जिलाधिकारी  और उपजिलाधिकारी पर मुकदमा कर सकते हैं की नहीं लेकिन मैं  सुरेन्द्र सिंह को यह सुझाव देना चाहता हूँ की वो यह विकल्प खुला  रखें ताकि गुनाहगारों को उनके घृणित कार्य के लिए सजा दिलाई जा सके | भ्रष्टाचार मिटाओ सेना का पूरा  सहयोग उनके साथ है और हमारी आपसे विनती है की आप लोग भी उनका साथ दें | इसके अलावा यदि कोई भी आदमी किसी भ्रष्ट सरकारी अधिकारी पर मुकदमा करता है तो उसे भ्रष्टाचार मिटाओ सेना की तरफ से इनाम मिलेगा और इसके साथ ही अधिकारी के खिलाफ अदालत का सारा खर्च भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के द्वारा वहन किया जाएगा |  लोक-सेवकों को पहले इसका विश्लेषण करना चाहिए की लोग आज-कल क्यों छोटे-मोटे तकलीफों एवं मुद्दों  के लिए आन्दोलन, धरना-प्रदर्शन एवं नाकेबंदी पर उतर रहे हैं ? इसका मुख्य कारण है आम जनता की आवाज़ नहीं सुनी जा रही है और उनकी शिकायतों का निपटारा बिना घूस खिलाये  तथा समय से नहीं हो पा रहा है |  आज की जरूरत है की भ्रष्ट प्रशासन-तंत्र में कानून के मार्फत आमूल-चूल परिवर्तन किया जाय और इसे इसके कार्यों के प्रति योग्य एवं उत्तरदायी बनाया जाय | यदि आम नागरिक  का काम बिना परेशानी एवं घूस के समय से निपटने लगे तो क्यों कोई आन्दोलन एवं धरना-प्रदर्शन में हिस्सा लेगा, और इन सबके बावजूद किसके  पास इन सब के लिए फालतू का समय है ? मुझे एक किस्सा याद है | एक बार मैं एक उप-जिलाधिकारी के दफ्तर में बैठा हुआ था तभी दो दबे-कुचले श्रेणी के गरीब लोग फटे-पुराने कपडे में उसके दफ्तर में अपनी कुछ शिकयातें  लेकर उपस्थिति हुए |  वे अपमानित करके उसके दफ्तर से निकाल दिए गए और मुझे यह देखकर बहुत बड़ा धक्का लगा |  सरकारी अधिकारी लोगों की इज्ज़त उनके रुतबा, प्रभाव या सम्पन्नता से करते हैं |  अब आप यह बताईये की वे दोनों गरीब लोग क्या करेगें ? इसके अलावा उनके पास और कोई चारा नहीं है की वे भ्रष्ट-तंत्र के खिलाफ आवाज़  उठायें और अपनी बात कहने के लिए धरना-प्रदर्शन एवं हिंसा का सहारा लें |  ऐसा लगता है की आज-कल जिला-प्रशासन तब तक नहीं जागता जब-तक की जनता की छोटी-मोटी तकलीफों की तरफ ध्यान आकर्षित करने के लिए हिंसा व धरना-प्रदर्शन न हो |  यदि ऐसा होता रहा और आम जनता की आवाज़ आसानी  से नहीं सुनी गयी तो जनता के पास हथियार उठाकर भ्रष्ट प्रशासन के खिलाफ लड़ाई के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा |  अभी भी हमारे पास मौका है की हम जिला-प्रशासन के कार्य-कलापों का आत्मनिरीक्षण करें और सब-कुछ व्यवस्थित और सही रास्ते पर ला दें | और यह तभी संभव है जब प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को  किसी भी तरह जड़ से मिटा दिया  जाय |

भ्रष्टाचार मिटाओ सेना से भ्रष्टाचारियों के खिलाफ शिकायत के लिए नीचे क्लिक करें –  

https://vinay1340.wordpress.com/bhrastachar-mitao-sena-%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%93-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%be/  


%d bloggers like this: