बलिया में संवैधानिक प्राधिकार का दुरुपयोग – Misuse of Constitutional Authorities in Ballia

भ्रष्टाचार मिटाओ सेना * ताड़ी बड़ा गाँव * बलिया *  उत्तर प्रदेश - २२१७११ *  भारत
भ्रष्टाचार मिटाओ सेना * ताड़ी बड़ा गाँव * बलिया * उत्तर प्रदेश – २२१७११ * भारत

भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के अध्यक्ष के डेस्क से

प्रिय हर एक लोग,

मैं सुरेन्द्र सिंह, संयोजक, द्वाबा विकाश मंच, बलिया के बारे में एक समाचार पढ़ा | वह बलिया में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे थे और इसी सन्दर्भ  में एक विधवा की मदद की कोशिश कर रहे थे |  वे एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर बैरिया के उप-जिलाधिकारी के गलत कार्यों के लिए अपने अधिकार के तहत उससे तर्क-वितर्क तथा उसका विरोध किये और उप-जिलाधिकारी के न सुधरने पर गरीब विधवा की मदद के लिए  शांति-पूर्ण धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिए |  ऐसा करने में हमे भीं भी कुछ गलत नहीं दिखता लेकिन पता नहीं उप-जिलाधिकारी को क्यों यह नागवार गुजरा और जिला प्रशासन के मन में क्या आया की उसने सुरेन्द्र सिंह के ऊपर गैंगस्टर का मुक़दमा लाद दिया | विश्वस्त सूत्रों से मिले खबर के मुताबिक़ उनके ऊपर यह निराधार और मनगढ़ंत मुक़दमा उन्हें उत्पीड़ित करने के लिए ठोका गया | एक दोष-विहीन प्रजा-तंत्र में ऐसा नहीं होता | यदि कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ एवं जनता की भलाई  के लिए लड़ता है, और उसे उत्पीड़न एवं ऐसी जलालत का सामना करना पड़ता है तो एक आदमी कैसे उत्तर प्रदेश की  त्रुटी-पूर्ण एवं भ्रष्ट प्रजा-तंत्र को बदलने के लिए कार्य कर सकेगा? ऐसा लगता  है की उत्तर प्रदेश के लोक-सेवक जनता को अपना मालिक नहीं समझते बल्कि आम आदमी पर अपना अहम् और श्रेष्ठता जताना चाहते हैं |  यदि संवैधानिक प्राधिकार  इस तरह से व्यवहार  करेगा तो हमारे लिए उत्तर प्रदेश में एक सच्ची प्रजा-तंत्र को विकशित करने में बहुत कठिनाई आएगी और आम जनता को  ब्रिटिश-राज के नियमों के अधीन रहने के लिए मजबूर होना पड़ेगा |  हम रोज़ देखते हैं की संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों में इतनी हिम्मत नहीं होती की वह किसी  शक्तिशाली, भ्रष्ट या प्रभावशाली व्यक्ति, जो प्रतिदिन कानून  की धज्जियाँ उड़ा रहा है,  के खिलाफ कोई कदम उठा सके लेकिन अपना पूरा दम  सुरेन्द्र सिंह जैसे अच्छे  एवं   इमानदार  नागरिक को परेशान करने के जरूर लिए लगा देते हैं | हमने कई बार प्रभावशाली व्यक्तियों के द्वारा जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान या उप-जिलाधिकारी के साथ दुर्व्यवहार करते हुए एवं पुलिस निरीक्षकों को खुले-आम चांटा मारते हुए देखा है लेकिन उनके खिलाफ गैंगस्टर का मुक़दमा नहीं लगाया जाता तो सुरेन्द्र सिंह के खिलाफ क्यों?  जिस भी लोक-सेवक ने सुरेन्द्र सिंह के साथ ऐसा कृत्य किया है वह प्रशासन में रहने के काबिल नहीं है और उसके इस हरकत की कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए |  लोक-सेवकों को यह समझना चाहिए की वे उस पद पर जनता के खातिर हैं न की जनता उनके खातिर |  उनको जबरदस्ती इस काम पर नहीं लगाया गया है बल्कि वे खुद ही जनता की सेवा के लिए अपनी इच्छा से आये हुए हैं और काम के बदले में जनता के पैसे से मेहनताना भी पाते हैं |  यदि वे जिम्मेदारी पूर्वक अपनी संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन नहीं कर सकते तो वो स्थिपा देकर जाने के लिए स्वतंत्र हैं, उन्हें कोई नहीं रोका  है | उनके पद को पाने के लिए कई लोग पंक्ति में लगे हुए हैं | 

मुझे नहीं पता की  हम जिलाधिकारी  और उपजिलाधिकारी पर मुकदमा कर सकते हैं की नहीं लेकिन मैं  सुरेन्द्र सिंह को यह सुझाव देना चाहता हूँ की वो यह विकल्प खुला  रखें ताकि गुनाहगारों को उनके घृणित कार्य के लिए सजा दिलाई जा सके | भ्रष्टाचार मिटाओ सेना का पूरा  सहयोग उनके साथ है और हमारी आपसे विनती है की आप लोग भी उनका साथ दें | इसके अलावा यदि कोई भी आदमी किसी भ्रष्ट सरकारी अधिकारी पर मुकदमा करता है तो उसे भ्रष्टाचार मिटाओ सेना की तरफ से इनाम मिलेगा और इसके साथ ही अधिकारी के खिलाफ अदालत का सारा खर्च भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के द्वारा वहन किया जाएगा |  लोक-सेवकों को पहले इसका विश्लेषण करना चाहिए की लोग आज-कल क्यों छोटे-मोटे तकलीफों एवं मुद्दों  के लिए आन्दोलन, धरना-प्रदर्शन एवं नाकेबंदी पर उतर रहे हैं ? इसका मुख्य कारण है आम जनता की आवाज़ नहीं सुनी जा रही है और उनकी शिकायतों का निपटारा बिना घूस खिलाये  तथा समय से नहीं हो पा रहा है |  आज की जरूरत है की भ्रष्ट प्रशासन-तंत्र में कानून के मार्फत आमूल-चूल परिवर्तन किया जाय और इसे इसके कार्यों के प्रति योग्य एवं उत्तरदायी बनाया जाय | यदि आम नागरिक  का काम बिना परेशानी एवं घूस के समय से निपटने लगे तो क्यों कोई आन्दोलन एवं धरना-प्रदर्शन में हिस्सा लेगा, और इन सबके बावजूद किसके  पास इन सब के लिए फालतू का समय है ? मुझे एक किस्सा याद है | एक बार मैं एक उप-जिलाधिकारी के दफ्तर में बैठा हुआ था तभी दो दबे-कुचले श्रेणी के गरीब लोग फटे-पुराने कपडे में उसके दफ्तर में अपनी कुछ शिकयातें  लेकर उपस्थिति हुए |  वे अपमानित करके उसके दफ्तर से निकाल दिए गए और मुझे यह देखकर बहुत बड़ा धक्का लगा |  सरकारी अधिकारी लोगों की इज्ज़त उनके रुतबा, प्रभाव या सम्पन्नता से करते हैं |  अब आप यह बताईये की वे दोनों गरीब लोग क्या करेगें ? इसके अलावा उनके पास और कोई चारा नहीं है की वे भ्रष्ट-तंत्र के खिलाफ आवाज़  उठायें और अपनी बात कहने के लिए धरना-प्रदर्शन एवं हिंसा का सहारा लें |  ऐसा लगता है की आज-कल जिला-प्रशासन तब तक नहीं जागता जब-तक की जनता की छोटी-मोटी तकलीफों की तरफ ध्यान आकर्षित करने के लिए हिंसा व धरना-प्रदर्शन न हो |  यदि ऐसा होता रहा और आम जनता की आवाज़ आसानी  से नहीं सुनी गयी तो जनता के पास हथियार उठाकर भ्रष्ट प्रशासन के खिलाफ लड़ाई के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा |  अभी भी हमारे पास मौका है की हम जिला-प्रशासन के कार्य-कलापों का आत्मनिरीक्षण करें और सब-कुछ व्यवस्थित और सही रास्ते पर ला दें | और यह तभी संभव है जब प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को  किसी भी तरह जड़ से मिटा दिया  जाय |

भ्रष्टाचार मिटाओ सेना से भ्रष्टाचारियों के खिलाफ शिकायत के लिए नीचे क्लिक करें –  

https://vinay1340.wordpress.com/bhrastachar-mitao-sena-%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%93-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%be/  

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