Are we in category of 92% or 8% – क्या हम ९२% जन या ८% में आते हैं?

भ्रष्टाचार मिटाओ सेना * ताड़ी बड़ा गाँव * बलिया *  उत्तर प्रदेश - २२१७११ *  भारत
भ्रष्टाचार मिटाओ सेना * ताड़ी बड़ा गाँव * बलिया * उत्तर प्रदेश – २२१७११ * भारत

भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के अध्यक्ष के डेस्क से

एक सर्वेक्षण के मुताबिक़ भारत के ९२% लोग सिर्फ व सिर्फ अपने और अपने परिवार  के लिए ही जीते हैं और मौका मिलने पर लूट-खसोट के साथ दूसरों का हक़ मारने  के लिए भी तैयार बैठे हैं | केवल ८% लोग ऐसे हैं जिन्हें मौका मिलने पर भी लूट-खसोट नहीं करते और कभी भी दूसरों का हक़ नहीं मारते | ये अपने परिवार के साथ दूसरों के लिए भी जीते हैं और ये इंसान, देवता, ऋषि या भगवान् की श्रेणी में आते हैं |  इंसान की श्रेणी में वह आता है जो अपने रोज़ की कमाई एवं उर्जा का १०% भाग दूसरों की सेवा में लगाता  है |  देवता की श्रेणी में वह आता है जो अपने रोज़ की कमाई एवं उर्जा का ५०% भाग दूसरों की सेवा में लगाता  है |  ऋषि  की श्रेणी में वह आता है जो अपने रोज़ की कमाई एवं उर्जा का ९०% भाग दूसरों की सेवा में लगाता  है |  भगवान् की श्रेणी में वह आता है जो अपनी रोज़ की कमाई एवं उर्जा पूरा का पूरा दूसरों की सेवा  में लगा देता  है |  क्या आप बता सकते हैं की आप किस श्रेणी में आते हैं? हम चाहते हैं की आप लोग ८% के श्रेणी में आयें और इसके लिए हम आपसे थोडा त्याग की कामना करते हैं | जैसे सुभाष चन्द्र बोश ने कहा था की आप हमें खून दें  हम आपको आज़ादी देंगे  वैसे ही हम आपसे भ्रष्टाचार से दूर रहकर पहले  अपने लिए न सोचकर प्रदेश के लिए सोचने के लिए  त्याग  और भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के लिए सहयोग चाहते हैं और हम आपको इसके बदले में एक भ्रष्ट-मुक्त सुशासन एवं आने वाली नयी पीढ़ी के लिए एक सुखमय भविष्य देने की कोशिश करेंगे  |

यदि आप कुछ समय, पैसा और उर्जा निकालकर प्रधान मंत्री को संबोधित नीचे दिए गए पत्र को अपने संसद  सदस्य या विधायक   तक   पहुंचाते हैं ताकि एक कानून बन सके जिससे जिले का प्रशाशन आम जनता के आम हाथों  में जा सके तो इससे भ्रष्टाचार रोकने में मदद मिलेगी और जिले में एक सुशाशन स्थापित होगा जिससे माध्यम से गरीब लोगों में भी सुखहाली आएगी और इस कार्य की वजह से हम भी जरूर ८% के श्रेणी में आ सकते हैं |

यदि संलग्न पत्र के ऊपर कानून बनता है तो यह उत्तर  प्रदेश के प्रजा-तन्त्र में एक अद्वितीय बदलाव ला सकता है  | भ्रष्टाचार मिटाओ सेना आप के इस मदद के लिए बहुत ही आभारी रहेगी | 

                                                   भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक चिट्ठी 

दिनांक: १-जुलाई-२००९

श्री मनमोहन सिंह, प्रधानमंत्री, भारत सरकार

मैं समाज के कल्याण के लिए कार्य कर रहा हूँ और इस शोध में लगा हुआ हूँ की कैसे दीन, वंचित और गरीब के जीवन यापन में कुछ सुधार लाया जाय |  मैं इस पत्र में इसके लिए कुछ योजनायें लिख रहा  हूँ और इस दिशा में आपकी सोच एक सराहनीय कदम होगा |

मैंने देखा है की सरकार, सरकारी योजनाओं जैसे ग्रामीण रोज़गार योजना और ऐसे ही अन्य दूसरे सामाजिक कल्याण की योजनों पर अथाह पैसा खर्च करती है लेकिन वास्तविकता में यह गरीबी मिटाने के लिए उतना प्रभावकारी सिद्ध नहीं हो पा रहा है जितना की होना चाहिए | इन सबका एक ही कारण है – वितरण प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार   | अधिकांशतः सरकारी नौकरों और दलालों तक ही इन योजनाओं  का पैसा सिमित होकर रह जाता है और यह कुछ ही वास्तविक लाभार्थी तक पहुँच पाता है |  अतः इस अथाह खर्च का क्या उपयोग है जब तक की इन योजनाओं को असली लाभार्थी तक पहुंचाने के लिए हमारे पास इमानदारी से लागू करने वाली सरकारी तंत्र विकसित न हो? इसलिए मैं कुछ बजट सुशाशन एवं सत्ता का गाँव स्तर तक विकेंद्रीकरण के लिए रखने के लिए प्रस्तावित कर रहा हूँ जो की भ्रष्टाचार मिटाने में कारगर सिद्ध होगी और असली लाभार्थी को उसका हक़ दिलाएगी |  बहुत  सारे राजनितिज्ञ सत्ता के विकेंद्रीकरण के बारे में अपना राय दिए हैं लेकिन इसका कार्यान्वयन उतना प्रभावी नहीं है जितना की होना चाहिए |

आज जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान का नियंत्रण आम जनता के हाथो में नहीं है और उन्हें मुख्यमंत्री के अलावा कोई नहीं हटा सकता |  चूँकि  ये आम जनता के द्वारा चुनकर नहीं आते अतः इन्हें इनके  रिटायर्मेंट  के पहले नहीं हटाया जा सकता और इस तरह से  इन्हें कोई  भ्रष्ट  कार्य करने में डर नहीं लगता | यदि जिलाधिकारी का चुनाव सीधे जनता के वोट  के माध्यम से पांच साल के लिए हो  तो थोडा  उनमें  डर रहेगा की उनके भ्रष्ट कामों के वजह से उन्हें पांच साल के बाद सड़क पर आना पड़ सकता है | अतः वह गलत काम करने में हिचकिचाएंगे | इसके लिए मैं निम्न  संविधान बनाने का प्रस्ताव दे रहा हूँ जिससे जिला प्रशासन आम लोगों के  हाथों में होगा |

१. राज्य के ही तर्ज पर प्रत्येक जिला स्तर पर विधान-सभा का गठन हो | इसके अंतर्गत  जिले के लोग जिले का एक मुख्यमंत्री सीधे तौर पर अपने बहुमूल्य वोट के माध्यम से  चुनें  और वो  मुख्यमंत्री चुने हुए प्रधानों से जिले के मंत्रीमंडल का निर्माण करे और जिले का प्रशासन संभालने के साथ जिले की संसाधनों की देख-भाल करे | राज्य के मुख्य-मंत्री के तरह ही जिले के मुख्य-मंत्री को जिले स्तर का संवैधानिक अधिकार (जो की आज जिलाधिकारी में निहित है )  प्राप्त हो और प्रत्येक ग्राम-प्रधान जिला विधान-सभा का सदस्य हो | राज्य सरकार, जिला सरकार के कार्यों में तब तक  दखल न दे जब तक  की यह संविधान के खिलाफ न हो (जैसा  की आज राज्यों एवं केंद्र के बीच है) | इस तरह से राज्यों को सुशाशन के वास्ते विभाजित करने के जगह जिलों को विभाजित कर सकते हैं और इसमे कम खर्च भी आएगा |

२. मुख्यमंत्री किसी भी राजनितिक पार्टी का हो सकता है और और वह किसी भी पार्टी के प्रधान को अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर सकता है | जिले के सारे अधिकारी और कर्मचारी मंत्रिमंडल के नियंत्रण में रहें और जनता को यह अधिकार हो की मंत्रीमंडल के सदस्यों को जनता की कसौटी पर खरा न उतरने पर ५१% वोट के माध्यम से वापस बुला सके | इसके साथ ही जिले का एक लोक-पाल भी नियुक्त किया जाय जो की भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर जिले के किसी भी मंत्रिमंडल के सदस्य या अधिकारी के खिलाफ जांच कर ३-महीने में अपना फैसला सुना दे |  इस तरह से जिला प्रशासन लोगों के हाथ में होगा और यह आम जनता का स्थान लोक-सेवकों से ऊपर होने का अहसास दिलाने के साथ ही लोगों को एक भ्रष्ट-रहित सुशासन प्रदान करेगा |

३. जिले के लिए नियुक्त IAS/IPS अधिकारी  किसी मंत्री-प्रधान के अधीन काम करेंगे और प्रधान को दिए गए विभाग में एक प्रबंधक के रूप में कार्य करेंगे |  बेकार IAS/IPS अधिकारी  को हटाने के प्रावधान के साथ इन पदों को धीरे-धीरे  प्रबंधन के पेशेवरों  से बदला जाय |  इससे  IAS/IPS  पर होने वाले खर्च पर लगाम लग सकती है और सामंती युग का अंत करने में भी मदद मिलेगी | आम जनता जो की जिला सरकार में नहीं है और नियम-कानून का अक्षरशः पालन करती है उनका स्थान जिले के मुख्य-मंत्री से ऊपर होगा | जिले का मुख्य-मंत्री, सारे ग्राम-प्रधान  एवं सरकारी अधिकारी आम जनता को उचित  आदर देंगे और अपना बॉस समझेंगे |

 ४. सभी जन-प्रतिनिधि के पद को वेतन पर काम करने वाला बना दिया जाय और उन पर सरकारी नौकरों का संविधान लागू हो | इस तरह से बहुत सारे शिक्षित बेरोजगारों को जन-प्रतिनिधि के रूप में काम मुहैय्या होगा और उन्हें अपने जिला-वासियों का सेवा करने का मौका भी मिलेगा | इस प्रणाली के लागू होने पर आम जनता को गाँव में ही उनका जन-प्रतिनिधि (ग्राम-प्रधान) मिल जायेगा जो उनकी समस्यों को सुलझाने के लिए जिला विधान-सभा में उनकी आवाज़ उठाएगा और उसका जल्द ही निपटारा स्थानीय अधिकारीयों  के द्वारा हो जायेगा | इसके लिए उन्हें संसद सदस्य या विधायक को पकड़ने के लिए इधर-उधर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और इससे जीवन जीना आसान  हो जायेगा |  

५. जिला स्तर पर आज के सारे सरकारी प्रारूप को वैसा ही  रख सकते हैं, सिवा इसके की  जिला स्तर  के सभी निर्णय जिला मंत्री-मंडल लेगा न की राज्य सरकार | इसके अलावा गाँव के नीचे स्तर के कर्मचारी  से लेकर जिले के मुख्य-मंत्री तक के लिए सारी सुविधाएं एक सामान होंगी | सिर्फ उनकी तनख्वाह और संवैधैनिक अधिकार में ही अंतर होगा | किसी को भी ब्रिटश राज से छानकर आ रही भव्य जीवन जीने का सुविधा सरकार के तरफ से नहीं दी जाएगी | इससे सरकार बनाने  वाले उन भ्रष्ट तत्वों पर रोक लग सकती है जो इसमे लूट-पाट एवं रुतबा के लिए आते हैं | इसके साथ ही सरकारी खर्च में बहुत ही भारी कटौती भी हो सकती है |

जिला स्तर के पूर्ण संविधान के लिए आप हमसे हमारे इ-मेल के पता vinay_k_singh@hotmail.com पर संपर्क कर सकते हैं |

पूर्ण विवरण के लिए मेरी किताब, उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश में कैसे बदलें पढ़ें  |

भ्रष्टाचार मिटाओ सेना से भ्रष्टाचारियों के खिलाफ शिकायत के लिए नीचे क्लिक करें –  

https://vinay1340.wordpress.com/bhrastachar-mitao-sena-%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%93-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%be/ 

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4 Responses to “Are we in category of 92% or 8% – क्या हम ९२% जन या ८% में आते हैं?”

  1. ANAND Says:

    ब्‍लागजगत पर आपका स्‍वागत है ।

    नि:शुल्‍क संस्‍कृत सीखें । ब्‍लागजगत पर सरल संस्‍कृतप्रशिक्षण आयोजित किया गया है
    संस्‍कृतजगत् पर आकर हमारा मार्गदर्शन करें व अपने
    सुझाव दें, और अगर हमारा प्रयास पसंद आये तो संस्‍कृत के प्रसार में अपना योगदान दें ।

    यदि आप संस्‍कृत में लिख सकते हैं तो आपको इस ब्‍लाग पर लेखन के लिये आमन्त्रित किया जा रहा है ।

    हमें ईमेल से संपर्क करें pandey.aaanand@gmail.com पर अपना नाम व पूरा परिचय)

    धन्‍यवाद

    • Vinaya Singh Says:

      आनंद जी,

      मेरे ब्लॉग के लिए कीमती वक्त निकालकर थोड़ा समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद |

      धन्यवाद
      विनय

  2. Sushil Bakliwal Says:

    शुभागमन…!
    कामना है कि आप ब्लागलेखन के इस क्षेत्र में अधिकतम उंचाईयां हासिल कर सकें । अपने इस प्रयास में सफलता के लिये आप हिन्दी के दूसरे ब्लाग्स भी देखें और अच्छा लगने पर उन्हें फालो भी करें । आप जितने अधिक ब्लाग्स को फालो करेंगे आपके ब्लाग्स पर भी फालोअर्स की संख्या उसी अनुपात में बढ सकेगी । प्राथमिक तौर पर मैं आपको ‘नजरिया’ ब्लाग की लिंक नीचे दे रहा हूँ, किसी भी नये हिन्दीभाषी ब्लागर्स के लिये इस ब्लाग पर आपको जितनी अधिक व प्रमाणिक जानकारी इसके अब तक के लेखों में एक ही स्थान पर मिल सकती है उतनी अन्यत्र शायद कहीं नहीं । आप नीचे की लिंक पर मौजूद इस ब्लाग के दि. 18-2-2011 को प्रकाशित आलेख “नये ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव” का अवलोकन अवश्य करें, इसपर अपनी टिप्पणीरुपी राय भी दें और अगली विशिष्ट जानकारियों के लिये इसे फालो भी करें । आपको निश्चय ही अच्छे परिणाम मिलेंगे । पुनः शुभकामनाओं सहित…

    नये ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव.

    • Vinaya Singh Says:

      सुशीलजी,

      मेरे ब्लॉग पर आपकी टिपण्णी के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद | मैं आपका ब्लॉग पढ़ा और उससे बहुत ही प्रभावित हुआ | मैं अवश्य ही आपके ब्लॉग क़ो पढ़ता रहूँगा |

      धन्यवाद
      विनय

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