भारत सरकार के गृह-मंत्री को एक खुली चिट्ठी – An Open Letter to Home Minister of India

भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के अध्यक्ष के डेस्क से

गृह मंत्री, भारत सरकार

हमारे देश की मुख्य समस्या नक्सलवाद, क्षेत्रवाद, आतंकवाद या अलगाववाद नहीं है, बल्कि वास्तविक समस्या हमारे देश में व्याप्त भ्रष्टाचार है  |  अगर भ्रष्टाचार को शाशन   एवं प्रशाशन से खत्म कर दिया  जाय तो हर बुराई  का अंत हो जायेगा और इस तरह से हमारे देश के बेरोज़गार नवयुवकों को किसी भी प्रकार के अलगाववाद में शामिल होने की जरूरत नहीं पड़ेगी |  सबसे पहले आपको इस बात का विश्लेषण करने की जरूरत है की लोग आजकल  आतंकवादी गतिविधियों  में लिप्त क्यों हो रहे हैं या नक्सली क्यों बन रहे हैं? यदि आपको इसका जवाब मिल गया तो आप नक्सलवाद, क्षेत्रवाद, आतंकवाद या अलगाववाद  जैसी  समस्याओं को चुटकियों में हल कर सकते हैं? इन समस्याओं के उत्पत्ति का कारण यह है की लोगों को उनका हक़ या अधिकार बिना रिश्वत खिलाये नहीं मिल रहा है |  आलम यह है की भारत सरकार भ्रष्टाचार को वास्तविक समस्या मानती ही नहीं है और  इसलिए सरकारी खजाने के लूटने वालों में कोई डर रह ही नहीं गया है |  यदि भारत के हर एक नागरिक को उसका हक़, उसके हिस्से से बिना कुछ गवाएं मिल जाय तो वे आत्म-निर्भर एवं खुशहाल बनेंगे  और इस तरह किसी को भी राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी |  भ्रष्टाचार ने आम जन के जीवन के लगभग हर एक पहलू (विकाश, कानून व्यवस्था एवं न्याय) को पंगु बना दिया है और ज्यादातर धनी एवं प्रभावशाली व्यक्ति ही जीवन के फल का आनंद उठा रहे हैं |  इसकी वजह से हम पिछले बीस सालों से गरीब लोगों की दशा में कोई बदलाव नहीं देख रहे हैं और गरीब एवं धनी के बीच की खाई दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है | मेरी राय में भारत केवल राजनीतिज्ञों, लोक-सेवकों एवं कुछ धनी व्यक्तियों की नज़र  में ही चमक रहा है |  भारत में भ्रष्टाचार के घटित मामले हमें विदेशों में शर्मिंदगी महसूस कराते हैं |

हाल ही में मैंने  कुछ ऐसे राजनीतिज्ञों का साक्षात्कार लिया जो चुनाव लड़ने की  तैयारी   कर   रहे  हैं |  मेरा उनसे पहल प्रश्न था की वे चुनाव क्यों लड़ना चाहते हैं तो सबका  एक  ही  उत्तर था की वे चुनाव जीतकर आम जनता का सेवा करने के साथ अपने निर्वाचन क्षेत्र का विकाश करना चाहते हैं |  फिर मैंने पूछा की आप चुनाव जीतने के लिए करोड़ों रुपये क्यों खर्च करते हैं तो उन्होंने बताया की बिना खर्च किये चुनाव जीतना मुश्किल है और आज के  ज़माने में मतदाता कुछ खाए-पीये बिना वोट नहीं देता |  हर एक उम्मीदवार खर्च  कर  रहा है और चुनाव वही जीत पाता है  जो ज्यादा से ज्यादा खर्च कर मतदाता को खरीद लेता है |  फिर मैंने पूछा की जनता का नौकर बनना आपके लिए इतना जरूरी है की किसी भी कीमत पर चुनाव जीतना चाहते हैं ? जब आपके पास इतना पैसा है और  नौकर चाकर हैं तो आप जीतने के बाद आम जनता से एक नौकर के तरह बरताव करेंगे ?  यदि आप जनता का सेवा ही करना चाहते हैं तो इस पैसे में लघु-उद्योग खड़ा कर बेरोज़गारों को काम देकर कर सकते हैं | क्या इसके लिए सरकारी पद पाना जरूरी है ?  इसके वावजूद की आप जितना   खर्च कर  रहे हैं उसके कुछ हिस्से का भी आप इस पद के लिए प्रदत्त तनख्वाह से भरपाई नहीं कर सकते, तो क्यों आप सरकारी नौकर बनाने के लिए घाटा उठाने के लिए भी तैयार हैं | फिर उनके पास कोई उत्तर नहीं था  और सही बात पर आ गए | उनके लिए चुनाव एक जुआ खेलने के तरह है | यदि जीत गए तो मालामाल, हार गए तो फिर दूसरी बार | उनके अनुसार जीतने के बाद लूट-खसोट कर पैसा अर्जित के लिए बहुत सारा मौका मिलेगा और उनका चुनाव में लगाया गया पैसा कई गुना हो जायेगा | उनका आगे कहना था की इसमें रुतबा और प्रतिष्ठा मिलने के साथ वे कानून से ऊपर हो जाते हैं और उनकी पहचान आम जनता से अलग हो जाती है | उनपर बराबरी का कानून भी नहीं लगता, क्योंकि उनपर महत्वपूर्ण व्यक्ति का तमगा लग जाता है |  सरकारी मशीनरी उनके हाथों की कठपुतली हो जाती है | उनके लिए राजनीति एक व्यवसाय  है |  

चुनाव जीतने के बाद ऐसे राजनीतिज्ञ क्या करेंगे ?  येन केन प्रकारेण अपना  चुनाव में लगाया हुआ पैसा  सुध समेत निकालने का पूरा  प्रयत्न करेंगे और हर तरह के भ्रष्ट कार्यों को प्रोत्साहन  देंगे | इस तरह से ज्यादातर जन-प्रतिनिधि भ्रष्ट बन जाते है  और भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई प्रभावी कानून न होने से इन्हें लूट-खसोट करने में कोई डर  नहीं रहता है |  अब ऐसे लोग भ्रष्टाचार को भला क्यों रोकेगें? जीतने के बाद ये जनता के हाथ से निकल जाते हैं और चूँकि हर जांच एजेंसी जैसे सी.बी.आई., सी.आई. डी., सी.वी.सी., पुलिस इत्यादि इनके ही नियंत्रण में रहती है, ये लोग अपनी भ्रष्ट करनी को छुपाने के लिए इसे भी पंगु या भ्रष्ट बना देते हैं |  चूँकि भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई भी सुधार संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्तियों द्वारा ही संभव है, लेकिन वे अपने ही खिलाफ  कार्रवाई कर अपने पैरों  पर कुल्हाड़ी नहीं मारना चाहेंगे | अतः जनता तड़प रही है लेकिन उसे कोई रास्ता दिखाई नहीं देता | वो भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कुछ भी करने में असक्षम है |  यदि जब तक हम भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगाते तब तक सामंती मानसिकता  और लूट-खसोट की प्रवृति रखने वाले लोग ही चुनाव में उतरेंगे, न की एक आम जनता के सेवक के तौर पर |  यदि हम किसी तरह से यह लागू कर सकें की जीतने के बाद तनख्वाह के आलावा न कोई रुतबा या न कोई सुविधा या लूट-खसोट के माध्यम से धन अर्जित करने का न कोई मौका मिलने वाला है तो कुछ हद तक हम भ्रष्ट या  राजनीति को व्यवसाय बनाने वाले लोगों को इसमें आने से रोक सकते हैं |  आप यह पूछ सकते हैं की जब राजनीति में ऐसी कोई आकर्षण वाली चीज ही नहीं रह जायेगी तो इसमे घुसेगा कौन ? यह एक वैध प्रश्न है | हम ऐसे पदों को एक आम सरकारी पद की तरह ही बना सकते हैं जिसमे जीवन-यापन के लिए सिर्फ तनख्वाह दिया जाय, लेकिन सरकारी खजाने से भव्य जीवन जीने का साधन, जैसे  रुतबा, महत्व, लाल बत्ती, मुफ्त का नौकर-चाकर,  आलिशान भवन या अंगरक्षक इत्यादि,  नहीं | हमें बहुत सारे बेरोज़गार नवयुवक मिल जायेंगे जो इन पदों के लिए आगे आयेंगे और चुनाव लड़ेंगे |  यदि हम व्यवस्था से भ्रष्टाचार को पूरी तरह से भी हटा देते हैं तो भी हमें नेताओं की कोई कमी नहीं रहेगी | हमें ऐसा कोई संवैधानिक तरीका भी निकालना  चाहिए जिससे की सरकारी कर्मचारी भी चुनाव लड़ सकें और यदि वे हार गए तो फिर से वे अपने पदों पर वापस जा सकें |  इससे फायदा यह होगा की राजनीति में भुक्खड़ लोगों के आने से निजात मिलेगी और इससे उन इमानदार लोगों को राजनीति में आने का मौका मिलेगा जो की सिर्फ तनख्वाह पर ही आम जनता का सेवा करना चाहते हैं |  इस पर ज्यादा जानकारी के लिए आप अध्याय १२ पढ़ें |

आज लोगों को  छोटी-मोटी समस्यायों के लिए धरना-प्रदर्शन  या नाकेबंदी पर उतरना पड़ रहा है | क्या सरकारी नौकर  जैसे  जिलाधिकारी,  पुलिस  कप्तान  इत्यादि ने  कभी इसका विश्लेषण किया है की लोग ऐसा करने के लिए बाध्य क्यों हो रहे हैं और अपना समय इन फालतू के कामों में क्यों व्यर्थ कर रहे हैं ? लोगों द्वारा ऐसा किये  जाने  का मूल कारण है की  प्रजा-तन्त्र को चलाने वाले भ्रष्ट सरकारी नौकरों द्वारा उनकी आवाजों को नहीं सुना जा रहा है और उनके किसी भी शिकायत का निस्तारण बिना घूस खिलाये नहीं हो पा रहा है |  अभी हमें भ्रष्ट प्रशाशनिक तंत्र को ओवरहाल करने की जरूरत के साथ इसे इसके काम के लिए कुशल एवं जवाबदेह बनाने का है |  यदि आम जनता का काम बिना किसी रिश्वत या परेशानी के समय पर कर दिया जाता है तो फिर उसके लिए धरना-प्रदर्शन  या नाकेबंदी करने की क्यों जरूरत पड़ेगी और इन सब कामों के लिए किसके पास इतना फुर्सत है? मुझे एक किस्सा आ गया | एक बार मैं एक उप-जिलाधिकारी के दफ्तर में बैठा हुआ था तभी दो दबे-कुचले श्रेणी के गरीब लोग फटे-पुराने कपडे में उसके दफ्तर में अपनी कुछ शिकयातें  लेकर उपस्थिति हुए |  वे अपमानित करके उसके दफ्तर से निकाल दिए गए और मुझे यह देखकर बहुत बड़ा धक्का लगा |  सरकारी नौकर लोगों की इज्ज़त उनके रुतबा, प्रभाव या सम्पन्नता से करते हैं |  अब आप यह बताईये की वे दोनों गरीब लोग क्या करेगें ? इसके अलावा उनके पास और कोई चारा नहीं है की वे भ्रष्ट-तंत्र के खिलाफ आवाज़  उठायें और अपनी बात कहने के लिए धरना-प्रदर्शन एवं हिंसा का सहारा लें |  ऐसा लगता है की आज-कल जिला-प्रशासन तब तक नहीं जागता जब-तक की जनता की छोटी-मोटी तकलीफों की तरफ ध्यान आकर्षित करने के लिए हिंसा व धरना-प्रदर्शन न हो |  यदि ऐसा होता रहा और आम जनता की आवाज़ आसानी  से नहीं सुनी गयी तो जनता के पास हथियार उठाकर भ्रष्ट प्रशासन के खिलाफ लड़ाई के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा |  अभी भी हमारे पास मौका है की हम जिला-प्रशासन के कार्य-कलापों का आत्मनिरीक्षण करें और सब-कुछ व्यवस्थित और सही रास्ते पर ला दें | और यह तभी संभव है जब प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को  किसी भी तरह जड़ से मिटा दिया  जाय |

हमारी टीम ने जो व्यौरा जुटाए हैं उसके मुताबिक़ सरकारी नौकरों में भ्रष्टाचार करने में कोई डर नहीं है और आम जनता को नियम-कानून की आड़ में प्रताड़ित  कर सरेआम लूट रहे हैं |  यह प्रत्येक सरकारी नौकरों का प्रतिदिन का अतिरिक्त कमाई का साधन बन गया है | बहुत सारे पकडे गए भ्रष्ट सरकारी नौकरों एवं राजनीतिज्ञों के खिलाफ चार्ज-शीट बनकर तैयार है लेकिन भ्रष्ट तत्वों के पैसों एवं प्रभाव के वजह से उनके ऊपर की अथोरिटी  भी भ्रष्ट बन गयी है और  उनके खिलाफ मुकद्दमा या अगली कार्रवाई का अनुमोदन नहीं कर रही है |  चूँकि नीचे से ऊपर तक के भ्रष्ट तत्त्व आम जनता की मेहनत की गाढ़ी कमाई को लूट कर मिल बाँट कर खा रहे हैं, अतः ये भ्रष्ट तत्त्व  काफी हद तक सुरक्षित हैं और अपने संवैधानिक पदों के बदौलत जांच एजेंसियों को पंगु बना दिए हैं | बहुत सारे लोगों के द्वारा बहुत अच्छे-अच्छे प्रस्ताव भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए रखे गए हैं लेकिन जन-प्रतिनिधि एवं लोक-सेवक इसे मिटाने के लिए उन प्रस्तावों को देखते भी नहीं | इसका कारण यह है की या तो वे भ्रष्टाचार को ज्वलंत समस्या नहीं समझते या फिर इसमे उनकी गर्दन फंसने का डर है |  चूँकि भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए जो भी अधिकार है वह इन संवैधानिक पदों पर बैठे हुए भ्रष्ट लोगों के हाथ में है, और वे ऐसे किसी प्रस्ताव पर काम कर अपना अंत नहीं करना चाहते, अतः हम आम  जनता कुछ करने लिए व्यग्र होने के वावजूद भी असहाय है |  अतः ऐसी स्थिति में आम जनता के पास भ्रष्टाचारियों के खिलाफ आन्दोलन करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है |  ‘भ्रष्टाचार मिटाओ सेना’ उत्तर प्रदेश से भ्रष्टाचार मिटाने के लिए देश के नियम कानून के तहत शांति पूर्ण तरीके अथक परिश्रम कर रही है लेकिन भ्रष्ट शाशन और प्रशाशन इसमें थोडा भी सहयोग नहीं कर रही है और हमें डर है की कहीं ये हम पर समनांतर सरकार  चलाने का लेबल  न चस्पा कर हमें कुछ करने से रोक दे |  इस तरीके से सरकार आम जनता के लिए नेक काम कर रहे लोगों को प्रताड़ित कर उन्हें हथियार उठाकर सरकार के खिलाफ लड़ने के लिए मजबूर कर रही है |

लोक-सेवक तो अपने फंसने के डर से भ्रष्टाचार के खिलाफ कुछ करते नहीं, लेकिन भारत के अधिकतर लोग भी भ्रष्टाचार की समस्या को   गंभीरता   से नहीं लेते | इसकी वजह से भारत प्रत्येक वर्ष और भ्रष्ट होता जा रहा है | ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत पिछले साल १७८ देशों की सूचि में भ्रष्टाचार के मामले में ८४वें स्थान पर था लेकिन इस साल और जायदा भ्रष्ट होने के वजह इसका स्थान ८७वां हो गया है |  इससे यह पता चलता है की भारत के लोगों के लिए भ्रष्टाचार कोई माईने नहीं रखता नहीं तो भारत का स्थान नीचे न जाकर ऊपर जाता और इसी वजह से ‘भ्रष्टाचार मिटाओ सेना’ लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रही है की भ्रष्टाचार ही सारे समस्यायों की जड़ है और इसके वजह से ही भारत में गरीबों की संख्या बढ़ती जा रही है |  यदि सरकारी नौकर विकाश के लिए आबंटित धन को नहीं लूटे होते तो आज भारत के गावों  की सड़क, स्कूल, हास्पिटल, बिजली इत्यादि भी चमकते और गरीबों में सम्पन्नता दिखाई देता लेकिन मुझे आज के गावों की हालत २० साल पहले की हालत से भी बदतर लगती है |  पहले ज्यादातर छोटी जाति के लोग ही गरीब थे लेकिन आज उच्च जाति के लोग भी गरीब होते जा रहे हैं और इस तरह भारत में गरीबों की  आबादी प्रतिवर्ष बढ़ती ही जा रही है |  सबूत के लिए आप उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के किसी गाँव में पधार कर  देख सकते हैं |

चूँकि प्रभावशाली लोग एवं विधि-निर्माता भ्रष्टाचार मिटाने में हमारी थोड़ी भी मदद नहीं कर रहे हैं, अतः हमारे जैसे आम आदमी के लिए भ्रष्टाचार मिटाने के लिए प्रभावी ढंग से कुछ कर पाना बहुत ही मुश्किल है|  इसलिए हम लोगों तक पहुंचकर भ्रष्टाचार की समस्या से उन्हें अवगत करा रहे हैं और सरकारी नौकरों के साथ काम कर उन्हें भ्रष्ट कार्यों में लिप्त न होने के लिए सपथ दिलाने की कोशिश कर रहे हैं | हमें ज्ञात है की बेईमान इतनी आसानी से अपना रवैय्या नहीं बदलेगा, जब तक की उसमें किसी कड़ी सजा का भय न हो, लेकिन निश्चित तौर पर कुछ अच्छे लोग अवश्य  मिलेंगे जो अपने में सुधार लाने की कोशिश करेंगे |  हम लोगों से यह आग्रह करेंगे की आप हमारी सहायता कर ‘राम’ की सेना बनाने में मदद करें ताकि हम ‘रावण’  (भ्रष्ट लोग) की शक्तिशाली सेना से लड़ सकें, और इसके लिए हम चाहते हैं आप भी इसमे सहयोग करें और हमारे सन्देश को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं | डायनासोर जैसे वृहद  आकृति  वाले  भ्रष्टाचार रूपी जानवर से लड़ने के लिए हमें कहीं न कहीं से तो शुरुआत करनी ही पड़ेगी |  भ्रष्टाचार, महिषासुर राक्षस का विकराल रूप ले चुका है और इसे हराने के लिए बहुत समय लगेगा और हो सकता है की हम अपने जीवन काल में इस पर विजय न प्राप्त कर सकें, लेकिन यदि हम एक ठोस नीवं की बुनियाद रखते हैं तो हमारी नयी पीढ़ी अवश्य ही इस पर विजय पाने में कामयाब होगी |

मेरा मंत्रियों के  समूह से यह अनुरोध है की वे अपने विभाग से विकाश के किसी भी कार्य के लिए एक पैसा भी तब तक निर्गत न करें जब तक की भ्रष्टाचार पर पूर्ण अंकुश नहीं लग जाता और पैसे की वितरण प्रणाली में थोड़ी सी भी लूट-खसोट की जगह नहीं रह जाती |  यदि आप ऐसा  नहीं करते तो हम सरकारी महकमे के  लूटेरों द्वारा जनता के पैसों को लूटते हुए  देखते रहेंगे और बाद में नाम के वास्ते जाँच बैठाकर लीपा-पोती करते रहेंगे |  अतः अच्छा यह होगा की हम कुछ ऐसा करें की सरकारी नौकरों को लूटने का मौका ही नहीं मिले और यह उनमे एक डर पैदा करके ही किया जा सकता है | कृपया आप बताएं की आप इस बारे में क्या सोचते हैं?

भ्रष्टाचार मिटाओ सेना से भ्रष्टाचारियों के खिलाफ शिकायत के लिए नीचे क्लिक करें –  

https://vinay1340.wordpress.com/bhrastachar-mitao-sena-%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%93-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%be/ 

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