भ्रष्टाचार मिटाना है, सबको सुखी बनाना है

भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष के डेस्क से

भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष के डेस्क से

मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार,

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है | कोई भी सरकारी काम घूस के बिना नहीं होता | गरीबों के लिए सरकारी कार्यक्रम का लाभ घूस के बल पर अपात्र उठा रहे हैं | पुलिस को पैसा खिलाकर अपराधी जेल के बाहर ऐश कर रहे हैं | दलाल, जन-प्रतिनिधि  और सरकारी कर्मचारी विकाश के धन का लूट खसोट एवं बन्दर-बाँट करके धन का कुछ ही हिस्सा धरातल पर लगा रहे हैं | अपराध चाहे वह मिलावट, विद्युत् चोरी, धोखा-धडी, घोटाला, दलाली, जालसाजी या प्रतिदिन का छोटा-मोटा ही क्यों न हो, सबका जड़ भ्रष्टाचार है, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार के तरफ से कोई ऐसा कदम नहीं उठाया गया जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके | उल्टे यह सुनने को मिलता है की दूसरे जगह भ्रष्टाचार है लेकिन उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार तो है ही नहीं| जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान को शिकायत देने पर भी भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही नहीं होती है और जांच के नाम पर लीपा-पोती की जाती है | मेरी पुस्तक, ‘उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश में कैसे बदलें’ के आधार पर बिहार एवं अन्य दूसरे राज्य कार्य कर सकते हैं तो इसे उत्तर प्रदेश में अपनाने में क्या समस्या है?  यह तो उत्तर प्रदेश के लिए ही है | इसे हिंदी में रूपांतरित, प्रचारित एवं इस पर कार्यान्वित कर उत्तर प्रदेश में बदलाव लाया जा सकता है |

आपको उत्तर प्रदेश की जनता ने कुछ अलग दिखाने का मौका दिया था लेकिन दुःख की बात है की इसका सदुपयोग नहीं हो सका | दबे-कुचलों को विशिष्ट व्यक्ति का पहचान पत्र नहीं दिया गया जिसके माध्यम से जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान एवं मंत्री उन्हें सलामी देकर उचित आदर एवं प्राथमिकता के साथ उनकी व्यक्तिगत समस्याओं का निपटारा करते | इससे सामाजिक न्याय दिलाने में एक क्रांति आती  एवं वर्षों से दबे-कुचले लोग भी अपने को सम्मानित महसूस करते | अभी भी समय है | हम चाहते हैं की विधान-सभा में भ्रष्टाचार को मुख्य मुद्दा बनाकर उचित कार्यवाही की जाय ताकि भ्रष्टाचारी लूट-खसोट करने से डरें एवं विकाश के साथ गरीबों में सुख का अनुभूति हो |  यदि ऐसा नहीं हुआ तो जनता आज नहीं तो कल जरूर जागरूक होगी और जाति, धर्मं एवं सम्प्रदाय से ऊपर उठकर सेवा की जगह मेवा खाने वालों को उनका सही जगह जरूर दिखाएगी | सरकारी नौकरों जैसे जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान, सचिव, मंत्री इत्यादि की मानसिकता अभी भी अंग्रेजी हुक्मरानों जैसी ही है और वे अपने को जनता का सेवक न समझकर हाकिम की तरह ही व्यवहार कर रहे हैं | हमें आपसे एक ऐसे सरकार की अपेक्षा थी जो इस मानसिकता को बदले लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हो सका | इसीलिये  लोग विधायक, सांसद, जिलाधिकारी या पुलिस कप्तान बनने के लिए लालायीत रहते हैं और पद मिलने पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं | 

हमें आशा है की हमारी नयी पीढ़ी अपने अधिकारों को समझेगी और ऐसी मानसिकता वाले लोगों को अपना सेवक बनाने का मौक़ा कभी नहीं देगी और हमें उम्मीद है एक दिन हमारा सपना, ‘भ्रष्टाचार मिटाना है, सबको सुखी बनाना है’ अवश्य साकार होगा |

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