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उत्तर प्रदेश के अधिकांश वोटरों में अभी परिपक्वता की कमी है

April 2, 2012

आज उत्तर प्रदेश की जनता ने एक ऐसी पार्टी को फिर से सरकार चलाने की जिम्मेदारी सौंपी है जो हाल ही में दस साल तक सरकार में रहने के बाद भी उत्तर प्रदेश की दिन-दशा में कोई परिवर्तन नहीं कर सकी | इतिहास गवाह है की यह पार्टी हमेशा ही लोक-लुभावन वादे कर सरकार बनाने में सफल हुयी है और इसके सेवा काल में गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार चरम सीमा पर रहा है | यह एक ऐसी पार्टी है जो हमेशा ही वोट की राजनीति करती है तथा एक  धर्मं  विशेष एवं एक जाति विरादरी के लोगों पर  मेहरबानी के लिए जानी जाती  है |  इसकी  सोच भी प्रगातिशीलवादी नहीं है और समय-समय पर ऐसे  विचार प्रस्तुत करती है जिससे लगता है की उत्तर प्रदेश को पाषाण-युग में ले जाने का इरादा है | इसके  शीर्ष  नेताओं  पर  न्यायलय  में  भ्रष्टाचार  के  मामले भी लंबित हैं |  यदि जबतक उत्तर प्रदेश में राजनीतिक पार्टी के रूप में कोई दूसरा अच्छा विकल्प नहीं  मिलता  तबतक  आम जनता को बसपा के विकल्प के रूप में तुलनात्मक  दृष्टी से  बसपा-सपा से बेहतर पार्टी को एक बार मौका देना चाहिए था |  हमें लगता है की एक धर्म विशेष के लोगों ने एकमुश्त में सपा को बोट किया है और दूसरी तरफ जिस जाति विशेष के लिए यह पार्टी जानी जाती है उसने भी बिना सोच समझ के इस पार्टी को वोट किया है | इससे यही लगता है की उत्तर प्रदेश के वोटर, जाति एवं धर्म में बंटे हुए हैं और इतनी परिपक्वता अभी नहीं आयी है की बे अपनी एवं अपनी नयी पीढ़ी की भलाई को देखकर वोट कर सकें | अपने अनुभव के आधार पर मैं शर्त लगा सकता हूँ की यदि खुद  अल्लाह या भगवान भी जन्म लेकर उत्तर प्रदेश के चुनाव में खड़े हो जाएँ तो वो भी इन परिस्थियों में नहीं जीत पायेंगें | 

 सपा के मुखिया एक विशेष धर्म के लोगों के मशीहा के रूप में अपने को स्थापित करना चाहते हैं लेकिन यदि उन्हें उनकी थोड़ी  भी फिक्र  होती तो अपने परिवार को आगे बढ़ाने का लालच त्यागकर उस धर्म विशेष के किसी व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाते |  इससे उनके करनी और कथनी में अंतर नहीं आता और लोगों में उनका कद भी बढ़ा  होता | इसके  साथ ही उस धर्म विशेष के लोगों में उनका विश्वास भी जमता | लालू यादव के तर्ज़ पर आज ‘माई’ (M.Y.) ने मुलायम का भी पुरा साथ दिया है,  लेकिन  जिस  तरह  से लालू ने बिहार को अपने परिवार का प्राईवेट लिमिटेड कंपनी समझ लिया था आज उसी रास्ते पर उत्तर प्रदेश भी है | जिस तरह से लालू ने १५ सालों के सेवा काल में बिहार का सत्यानाश किया यदि वैसा ही हाल उत्तर प्रदेश का  होता है  तो मुलायम का भी लालू यादव का ही हश्र हो सकता है | पिछला साल गवाह है की विधायक और मंत्री बनने के बाद ये लोग इतने घमंडी हो जा रहे हैं की जनता की सलाह-मशवीरा को थोड़ा भी तबज्जो नहीं देते | जिस जनता ने उन्हें अपनी सेवा के लिए भेजा है उसे ही भूल जाते हैं| आज आम जनता  द्वारा  किसी जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान या उससे ऊपर के अधिकारी के खिलाफ शिकायत करने पर कोई  कदम उठाने वाला नहीं है | हमें जिलाधिकारी या पुलिस कप्तान जैसे अधिकारियों  को  जनता के वोट के माध्यम से चयन करने की जरूरत है ताकि उनके भ्रष्ट कार्यों के लिए जनता कम से कम पांच साल के बाद तो उसे सजा दे सके |

 सपा के लोग भी इस जीत से अचंभित हैं क्योंकि उन्हें उनके कर्मों के वजह से ऐसी आशा नहीं थी | अब मुलायम को चाहिए की जनता ने जो उत्तर्दायीत्व उनको सौंपा है उस पर खरा उतरने के लिए पांच साल के बाद का गद्दी का मोह त्यागकर कुछ ऐसे कदम उठायें जिससे  की  आम जनता का भला हो, न की सिर्फ उनके लोगों, मंत्रियों, अधिकारियों  एवं कार्यकर्त्ताओं का | आज  राजनिति की परिभाषा बदलने की जरूरत  है और इसके लिये व्यवस्था में परिवर्तन अति आवश्यक है | आज राजनिति का मतलब किसी तरह से सत्ता हासिल कर सामंतवाद के ज़माने का सुख भोगने और लूट-पाट करने  से है लेकिन प्रजा-तंत्र में ऐसा नहीं होना चाहिए| हमें एक ऐसी व्यवस्था कायम करने की जरूरत  है जिससे मंत्री से लेकर संत्री तक के लोगों में एक आम आदमी से कौफ  पैदा हो और उनका स्तर आम जनता से ऊपर न होकर  सरकारी नौकर का हो | इससे सामंती मानसिकता वाले माफिया, गुंडे, मवाली, भ्रष्ट लोग राजनिति में नहीं जायेंगे | चुनकर गए हुए लोग सेवा के लिए प्रतिबद्ध होंगे और किसी भी तरह सरकार बनाकर मंत्री पद पाने  के लालच से दूर रहेंगें | लोग सरकारी नौकरी  पाने के लिए लालायीत न होकर अपना व्यवसाय करना ज्यादा पसंद करेंगें और विधायक, लोग नियम-कानून बनाने के लिए बनेंगे और सरकार में रहने से बेहतर विपक्ष में रहना ज्यादा पसंद करेंगें | भ्रष्टाचार मिटाओ सेना ऐसी व्यवस्था लाने के लिए कृत-संकल्प है | मेरा यह विचार है की यदि सपा की सरकार सबकुछ छोड़कर जबतक भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए कुछ नहीं करती है तो मैं यह गारंटी के साथ कह सकता हूँ की पांच साल के बाद उत्तर प्रदेश की जनता सपा का सरकार बनाने के लिए अवश्य पछताएगी |

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