भारत दौरा – २०१३

उत्तर प्रदेश की हालत बद से बदतर होती जा रही है । उत्तर प्रदेश को पिछले पांच सालों में  बहुजन समाज पार्टी  के नेताओं  ने लूटा और अब सपा के नेता और मंत्री लूट रहे हैं ।  उत्तर प्रदेश की जनता  भी यही चाहती है तभी तो सपा से एक बार लुटवाने के बाद इसे फिर से मौका दिया । आज आलम यह है की किसी भी सरकारी योजना  का लाभ बिना पैसा  खिलाये लाभार्थी को नहीं मिलता ।  विकाश के धन को नेता, मंत्री और सपा कार्यकर्ता मिलकर खूब लूट रहे हैं । हर सरकारी महकमे के सामने सपा के कार्यकर्ता  बैठे हुए हैं और अधिकारियों और नेताओं के लिए दलाली का काम कर रहे हैं । भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के कार्यकर्ताओं ने वृद्धा पेंशन, इंदिरा आवास, विधवा पेंशन, FIR लिखाने एवं पासपोर्ट बनाने तथा अन्य सरकारी सहायताओं आदि में धन उगाही, मिड डे मील, छात्रवृति, लैप टॉप वितरण, बेरोजगारी भत्ता, दवा आदि में घोटाला, स्कूल एवं सड़क के विकास के धन का लूट पाट,  नाम के वास्ते चल रहे सरकारी स्कूलों एवं अस्पतालों आदि के खिलाफ जाँच बैठवाया लेकिन  नीचे से ऊपर तक बैठे भ्रष्ट अधिकारिओं एवं मंत्रियों के वजह से भ्रष्टाचारियों को दंड नहीं दिला सके ।  जब तक उत्तर प्रदेश में भ्रष्ट पार्टियां जैसे सपा, बसपा कांग्रेस या भाजपा आदि रहेगी, उत्तर प्रदेश के हालात में कोई परिवर्तन नहीं होगा और गरीब और गरीब होता जायेगा | इस बार के हमारे भारत दौरे के दौरान संसद सदस्य का चुनाव लड़ने वाले कई  भावी प्रत्याशियों ने  मुझसे मुलाकात की ।  सबकी राय थी की संसद सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए  करीब दस करोड़ रुपये लग जाते हैं ।  यदि शानो शौकत एवं चार-पांच भरी गाड़ियों के  साथ चुनाव प्रचार न करो तो जनता घास भी नहीं डालती । जनता को मुर्ग मुस्सलम न खिलाओ तो वोट  मिलने का चांस न के बराबर है । इन सब में बहुत खर्च होता है, अतः घर फूँक कर यह नहीं किया जा सकता । इन पैसों को किसी तरह निकालना ही है और इसका एक ही माध्यम है – भ्रष्टाचार, अतः भ्रष्टाचार नहीं रोका जा सकता ।

भ्रष्टाचार मिटाओ सेना की बोर्ड ऑफ़ डाईरेक्टर की कैलिफोर्निआ में हुयी बैठक में इन तथ्यों का विश्लेषण किया  गया । एकमत से फैसला लिया गया कि भ्रष्टाचार मिटाओ सेना को इस दिशा में कुछ  करना चाहिए । महीनो तक चली दिमागी मैराथन के बाद एक विचार निकला और इसे भ्रष्टाचार मिटाओ सेना कि विजन में जोड़ दिया गया ।  इस विचार के अनुसार किसी भी पद के प्रत्याशी को अपना प्रचार चुनाव घोषणा के एक  दिन पूर्व तक ही  सिमित रखना है । चुनाव घोषणा के बाद किसी को भी चुनाव प्रचार न करने दिया  जाय और चुनाव आयोग हर प्रत्याशी का  जीवन परिचय जनता  तक पोस्ट के माध्यम से  पहुँचा दे । इसके बाद जनता जीवन परिचय  और चुनाव घोषणा के पहले  प्रत्याशियों द्वारा किये गए पहुँच के ऊपर वोट करने का  निर्णय लेगी । इससे फायदा यह होगा की चुनाव के समय बरसाती मेढ़क के तरह  उभरने वाले प्रत्याशियों  में  कमी आएगी और  चुनाव घोषणा के बाद ख़रीद फ़रोख्त एवं अन्य खर्च पर पैसे फूंकने की प्रवृति पर रोक लगेगी ।

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