जीओ शेर अरविंद केजरीवाल

केजरीवाल जी, आपने एवं आपकी टीम ने एक ऐसा मिशाल कायम किया है जो आने वाली पीढ़ी को रास्ता दिखायेगा। आज के दिन में आप जैसा ईमानदार एवं देश के प्रति समर्पित व्यक्ति किसी भी राजनीतिक पार्टी में नहीं है । आपके कर्म के वजह से भ्रष्टाचार मिटाओ सेना आँख बंद कर आप पर भरोसा करती है, क्योंकि आप सपने में भी गलत नहीं कर सकते । आपसे भ्रष्टाचार मिटाओ सेना को उम्मीद है कि आप ही अन्य राजनीतिक पार्टियों को एक नयी दिशा प्रदान कर भ्रष्टाचारियों एवं अपराधियों से निजात दिलाएंगें ताकि भारत से गरीबी मिट सके । हर भारतीय को मालूम है कि नेता लोग मंत्री बने रहने के लिए किस स्तर तक गिर जाते हैं, लेकिन आपने अपने कर्तव्य पालन के लिए मुख्यमंत्री पद कुर्बान कर दी । आज भारत को आप जैसे नेता की जरूरत है, जो बिरले ही पैदा होते हैं । आप के स्तर का नेता आज की किसी भी राजनीतिक पार्टी में नहीं है । आप की ‘आप’ पार्टी को पता है कि भ्रष्टाचार खत्म किये बिना भारत की तक़दीर नहीं बदल सकती । अतः इसके लिए आपने दिल्ली में सख्त जन लोक-पाल बिल लाने की कोशिश की लेकिन बहुमत न होने से यह पास नहीं हो सका । अतः इस स्थिति में क्या करना चाहिए था? गवर्नेन्स के नाम पर मनमोहन सिंह के तरह कुर्सी से चिपके रहना चाहिए था या देश की तक़दीर बदलने के लिए आगे बढ़ना चाहिए था? हाँ, एक काम यह किया जा सकता था कि जन लोक-पाल बिल लाने के पहले केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजना चाहिए था । लेकिन इससे क्या होता? केंद्र में बैठे महिषासुर (भ्रष्टाचारी) इसे मंजूरी दे देते? कतई नहीं । हाँ, इतना अवश्य हुआ होता कि दिल्ली सरकार दो-चार दिन और चल गयी होती । लेकिन इससे होता क्या? जब मजबूत जन लोक-पाल बिल ‘आप’ पार्टी पास नहीं करा सकती तो नाम के वास्ते सरकार चलाने का क्या औचित्य था? एक सही कहावत है कि ॥ जो कल करना सो आज कर, जो आज करना सो अब । पल में प्रलय होएगी बहुरि करोगे कब ॥ अतः केजरीवाल जी ने जो किया वो उचित ही था । नेट पर बहुत सारे लोगों ने केजरीवाल जी को इस कदम के लिए भद्दी-भद्दी गालियाँ दी तो किसी ने रण छोड़ दास चांचड़ और भगोड़ा कहा । मिडिया ने भी बहुत सारी अनर्गल बातें छापी । लेकिन दुःख की बात यह है कि यह सब बिना बहस किये या कारण बताये किया गया, जो कि अनुचित है । केजरीवाल जी के कदम को अनुचित सिद्ध करने के बाद उन्हें गाली देना ज्यादा उचित था । लोगों एवं मिडिया को इसका ध्यान रखना चाहिए । ‘आप’ पार्टी में अब अन्य पार्टियों के भ्रष्ट कार्यकर्ता धड़ल्ले से शामिल हो रहे हैं, लेकिन इन्हें ‘आप’ पार्टी का फेस (मुख) बनाने से परहेज करना चाहिए । ‘आप’ पार्टी को यह भी ध्यान रखने कि जरूरत है ‘बिन्नी’ जैसे भस्मासुर घुसने न पाये, और यदि घुस गए तो बिना सजा के बच न सके । आप के तरह अन्ना जी पर भी भ्रष्टाचार मिटाओ सेना आँख बंद कर विश्वाश करती है । अन्ना जी का १७ सूत्रीय कार्यक्रम देश के भले के लिए ही होगा और बिना सोचे समझे ‘आप’ पार्टी को इसे मान लेना चाहिए । यदि ‘आप’ पार्टी को कुछ करने के लिए सालों इंतज़ार नहीं करना है तो अन्ना जी सरीखे महापुरुष को साथ में लाना बहुत जरूरी है । ‘आप’ पार्टी का वजूद उन्ही के वजह से है, अन्यथा ‘आप’ को सालों लग जाते आम जनता में पैठ बनाने में । कम्युनिस्ट पार्टी ५० सालों से भी ज्यादा दिनों से वजूद में है लेकिन एक-दो राज्यों को छोड़कर कहीं अन्य अपना पैठ नहीं बना सकी । अतः ‘आप’ पार्टी को अच्छे लोगों के घर तक जाकर पार्टी में जोड़ने से हिचक नहीं करना चाहिए। भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के अनुभव एवं विश्लेषण के मुताबिक ‘आप’ पार्टी को इस लोक-सभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से एक भी सीट नहीं मिलेगी क्योंकि वहाँ की ग्रामीण जनता जाति -पाति में बंटी हुयी है और इसके साथ ही ‘आप’ पार्टी का कोई ऐसा प्रत्याशी नहीं मिला जो चुनाव के पहले से गॉंव-गाँव घूमकर लोगों से संवाद कायम कर अपनी पैठ बनाई हो । उत्तर प्रदेश में ‘आप’ पार्टी का कोई आधार नहीं है और यह अहसास करने में कहीं देर न हो जाय । भगवान आपको सद्बुद्धि दें ।

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