Archive for April, 2014

क्या जन-तंत्र धन-तंत्र बनता जा रहा है?

April 18, 2014

भ्रष्टाचार मिटाओ सेना ने यह तय किया है कि चुनाव में उन प्रत्याशियों को रुपये ५० हज़ार से मदद करेगी जो भ्रष्टाचार मिटाओ सेना द्वारा तैयार किये हुए सपथ-पत्र पर दस्तख्वत कर दे । इसी कड़ी में भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के सदस्य कई प्रत्याशियों से मिले । आकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक वे प्रत्याशी जो करोड़ों खर्च कर रहे हैं, उन्होंने बेहिचक दस्तख्वत करने से मना कर दिया लेकिन जिनके पास एक लाख रुपये भी चुनाव खर्च के लिए नहीं है, वे ही दस्तख्वत करने के लिए तैयार हुए । क्या वे एक लाख रुपये में चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित राशि रुपये साठ लाख खर्च करने वालों से बराबरी कर सकते हैं? इन रोड़पतियों को मिडिया भी नहीं पूछता और इनकी समाजसेवा भी संसदीय क्षेत्र के कुछ ही भाग तक सिमित है । अतः ये एक लाख रुपये के बजट में संसदीय क्षेत्र के सभी लोगों तक नहीं पहुँच सकते । अन्य प्रत्याशियों से अधिक प्रतिभावान होने के वावजूद भी ये पैसे के अभाव में संसद का मुँह नहीं देख सकते । अतः क्या अब पूंजीपति ही चुनाव जीतकर हम पर राज करेंगें ? क्या संसद पहुँचकर देश सेवा की इच्छा रखने वाले रोड़पति या गरीब अब कभी संसद नहीं पहुँच पायेगा? क्या ऐसा कोई उपाय है कि एक गरीब भी संसद सदस्य बनने के लिए चुनाव लड़ सके और अन्य करोड़पति प्रत्याशियों की तरह चुनाव प्रचार कर चुनाव जीत सके? चुनाव के प्रत्याशियों में हम समानता का अधिकार कैसे लागू कर सकते हैं? क्या चुनाव आयोग उस प्रत्याशी को ५९ लाख रुपये से मदद करेगा जिसके पास चुनाव के लिए सभी संसाधनों से एकत्र राशि एक लाख रुपये से अधिक नहीं है? यदि नहीं, तो क्या यह असमानता नहीं है जहाँ कोई किसी पद को पाने के लिए १० करोड़ तक खर्च कर सकता है तो कोई एक लाख भी नहीं? इसीलिये अधिकतर प्रतिभावान लोग चुनाव नहीं लड़ पाते हैं । इस स्थिति में चुनाव आयोग को चाहिए कि सभी प्रत्याशियों के घोषणा पत्र एवं जीवन-परिचय घर-घर तक पहुँचा दे और किसी भी प्रत्याशी के जेब से एक भी पैसा खर्च न होने दे । इस विषय पर मेरा लेख https://vinay1340.wordpress.com/2014/02/04/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%a6%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a5%a8%e0%a5%a6%e0%a5%a7%e0%a5%a9/ पढ़ें । अभी फिलहाल भ्रष्टाचार मिटाओ सेना सुप्रीम कोर्ट में एक रिट दायर कर उन प्रत्याशियों को चुनाव आयोग से धन दिलाने की गुहार लगाएगी जिनके पास चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित खर्च से कम पैसे हैं । लेकिन अभी मैं देश के बारे में सोचने वालों से यह गुजारिश करता हूँ कि इस विषय पर बहस कर इसका कोई समाधान निकाला जाय ताकि जन-तंत्र को धन-तंत्र बनने से रोका जा सके । हम आपको अगले लेख में बतायेंगें कि लोक-सभा चुनाव के बाद कितने रोड़पति संसद पहुंचे हैं, कृपया इंतज़ार करें ।7

यदि भाजपा ने खरीद फरोख्त नहीं किया तो केंद्र में फिर कांग्रेस की सरकार होगी

April 7, 2014

सर्वप्रथम मैं यह बता दूं की यदि केंद्र में कांग्रेस के जगह भाजपा की सरकार बनी तो भी मैं गारंटी के साथ कह सकता हूँ कि देश की दिन-दशा में कोई बदलाव नहीं आएगा क्योंकि धनाढ्यों एवं भ्रष्टाचारियों के बूते चलने वाली सरकार कभी भी भ्रष्टाचार नहीं रोक पायेगी । दोनों पार्टियों की रैलियों एवं चुनाव में खर्च होने वाले करोड़ों रुपये भ्रष्टाचारियों एवं धनाढ्यों के हैं । मोदी कहते हैं कि सौ दिन में कालाधन वापस लायेंगें लेकिन यदि कालाधन आया भी तो फिर कालाधन बनकर विदेश चला जायेगा । इसका कारण यह है कि यह धन विकाश में लगेगा और विकाश के लिए अवमुक्त १०० पैसे में भ्रष्टाचार के कारण सिर्फ १० पैसे ही धरातल पर लगेगा और बाकी ९० पैसे माननीय तथा सरकारी नौकर लूट लेंगें, क्योंकि मोदी ने कभी यह नहीं बताया कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए क्या कोई फूल-प्रूफ आईडिया है उनके पास जिसे वे लागू करेंगें । यह सर्वविदित है कि केंद्र में आज तक की भ्रष्टतम सरकार काबिज है और इसके भ्रष्टाचार में लिप्त होने के वजह से गरीबों की संख्या में तीव्र गति से वृद्धि हुयी है और विकाश का कहीं नामो-निशान नहीं है । महंगाई के वजह से आज ऐसी स्थिति है कि बहुत सारे गरीब लोग एक वक्त का ही भोजन कर पाते हैं, लेकिन इस गरीबी को छुपाने के लिए रोजाना ३२ रुपये कमाने वाले को धनाढ्य बना दिया गया । अतः लोग कांग्रेस पार्टी से त्रस्त हैं और इसका असर यह होगा कि लोग विपक्षी पार्टियों को वोट देकर अपना गुस्सा निकालेंगें । अतः मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा को इसका फायदा मिलेगा । चूँकि यह पार्टी एक संप्रदाय विशेष की पसंद नहीं है, अतः वोट के ध्रुवीकरण के वजह से भाजपा अपने एवं अपने सहयोगियों के साथ भी २७२ का आंकड़ा नहीं छू पायेगी । आंकड़ों के विश्लेषण के बाद मुझे लगता है कि भाजपा और उसके सहयोगी २५० सीट से आगे नहीं बढ़ पायेंगें और बहुमत जुटाने में उनके पसीने छूट जायेंगें । बिडम्बना यह है कि अधिकतर विपक्षी पार्टियाँ साम्प्रदायिकता के नाम पर कांग्रेस की गोद में जा बैठेंगें और भाजपा की सरकार किसी भी कीमत पर नहीं बनने देंगें । ग्रामीण क्षेत्र के लोग आज भी देश की समस्याओं पर ध्यान न देकर जाति – पाति, धर्म, पैसे, बाहुबल, लोक-लुभावन घोषणाएं आदि पर वोट करते हैं और इसका फायदा सपा, बसपा, राजद, जद (यू), द्रमुक, बीजद आदि जैसी क्षेत्रीय पार्टियों को होता है । मुझे पूरा विश्वास है कि ये सभी पार्टियां कांग्रेस के खिलाफ बही हवा का भरपूर फायदा उठायेंगी । इसमें से अधिकतर पार्टियां साम्प्रदायिकता के नाम पर लोगों को उल्लू बनाते हुए एक अच्छी-खासी संख्या जीतकर ले जायेंगी । कांग्रेस के खिलाफ कैसी भी बयार क्यों न हो फिर भी यह संख्या के आधार पर भाजपा के बाद दूसरी बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी । अतः इस स्थिति में क्षेत्रीय पार्टियां कांग्रेस पर तीसरे-चौथे-पांचवे आदि मोर्चे की सरकार बनाने के लिए दबाव नहीं डाल सकती । अतः होगा यह कि सपा, बसपा, राजद, जद (यू), कम्यूनिस्ट पार्टी आदि मिलकर किसी भी कीमत पर भाजपा का सरकार बनने से रोकेगी और कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन देकर केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगी । यदि भाजपा को सरकार बनाना है तो उसे सपा, बसपा व राजद में सेंध मारनी होगी क्योंकि इन पार्टियों में भ्रष्टाचारियों एवं अपराधियों की फ़ौज है जिन्हें आसानी से ख़रीदा जा सकता है । यदि भाजपा को सरकार बनानी है तो इन पार्टियों को तोड़ने की योजना अभी से बनानी होगी क्योंकि हम सपने में भी नहीं सोच सकते कि मुलायम, लालू, मायावती, नीतीश आदि कभी मोदी का समर्थन करेंगें । संख्य़ा बढ़ाने के लिए भाजपा को चाहिए की लोगों को यह समझाए की यदि लोग भाजपा के अलावा किसी भी अन्य पार्टी को वोट देंगें तो वो कांग्रेस को ही जाएगा अतः यदि कांग्रेस से निजात पाना है तो सिर्फ व सिर्फ भाजपा को ही वोट करें । कांग्रेस से लोगों की नाराजगी का यह अच्छा मौका है, जरूरत है भूनाने की । यदि हो सके तो भाजपाई बंधु श्रद्धालुयों के आस्था को ठेस पहुंचाने वाले ‘हर-हर’ नारे को बदलकर, ‘दर-दर मोदी, घर-घर मोदी’ कर दें ।

Youtube परहिंदीमेंभाषण:

Part 1 – http://www.youtube.com/watch?v=qj6GcVJy7Ro

Part 2 – http://www.youtube.com/watch?v=ibm3EItawUw&feature=relmfu

Check here for the copy of speech to read and disseminate.

पूर्ण विवरण के लिए मेरी किताब, उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश में कैसे बदलें, पढ़ें |

भ्रष्टाचार मिटाओ सेना के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए पढ़ें – https://vinay1340.wordpress.com/bhrastachar-mitao-sena/

मोदी बनाम मनमोहन सिंह

April 1, 2014

मैं हर किसी के राय की क़द्र करता हूँ । कोई जरूरी नहीं है कि कोई मेरा लेख पढ़कर अपनी राय बदल दे । एक की राय दूसरे से भिन्न होना प्रजा-तंत्र के लिए जरूरी है । मेरी राय में मोदी एवं मनमोहन सिंह में बहुत सारी समानताएं हैं । मनमोहन सिंह १० साल से गद्दी पर हैं, मोदी भी हैं गुजरात में । मनमोहन सिंह भी विकाश का ढिंढोरा पीटते हैं, मोदी भी । मनमोहन सिंह की क्षत्र-साया में उनके लोगों ने देश को खूब लूटा और मोदी की क्षत्र-साया में मोदी के लोगों ने गुजरात को । लोग कहते हैं कि मनमोहन सिंह के शाशन में भ्रष्टाचार देश में चरम पर है फिर भी मनमोहन सिंह बहुत ईमानदार हैं , वैसे ही भ्रष्टाचार गुजरात में चरम पर है फिर भी मोदी बहुत ईमानदार हैं । मनमोहन सिंह  अपने भ्रष्ट मंत्रियों के कारण सख्त लोक-पाल बिल नहीं बनाना चाहते और मोदी उनसे भी एक कदम आगे बढकर अपने लोगों को बचाने के लिए लोक-आयुक्त को राज्यपाल से छीनकर अपने हाथों में  ले लिया । मनमोहन सिंह  भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कुछ नहीं करते और मोदी भी । मनमोहन सिंह ने दागी लोगों को टिकेट दिया और मोदी ने भी । अम्बानी एवं टाटा मनमोहन सरकार चलाते हैं तो  वे ही गुजरात में मोदी सरकार चलाते हैं । मनमोहन ने तीव्र गति से बढती हुयी महंगाई को छुपाने के लिए ३२ रुपये रोज़ कमाने वाले को धनाढ्य करार दिया तो वहीँ मोदी ने गुजरात में गरीबों की संख्या छुपाने के लिए एक कदम आगे बढकर  12 रुपये रोज़ कमाने वाले को धनाढ्य करार दिया । मनमोहन की कांग्रेस पार्टी एक साम्प्रदायिक पार्टी है जिसने सिखों  का नर संहार  किया वहीँ मोदी की पार्टी भी क्योंकि उसने मुस्लिमों का । मनमोहन की कांग्रेस पार्टी की रैलियों में करोड़ों खर्च होता है जिसे भ्रष्टाचारियों एवं धनाढ्यों से अर्जित किया जाता है, वहीँ मोदी का भी वही हाल है । इस समानता की लिस्ट बहुत लम्बी है । अब हमें यह सोचना है की मोदी प्रधान-मंत्री बने तो मनमोहन सिंह से अच्छा विकल्प कैसे हो सकते ? लाल-कृष्ण अडवाणी क्यों नहीं? साथ ही अब हम २१ वीं सदी में जी रहे हैं । विश्व किसी भी शक्तिशाली राष्ट्र को कमजोर राष्ट्र पर हावी नहीं होने देगा । अतः हमें पाक-चाईना की चिंता छोड़ भारत को सशक्त बनाना होगा और यह तभी सम्भव है जब माननीय विकाश या जनता का धन न लूट सकें और १००% धन विकाश में लग सके । राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बारे में सुना हूँ की वे देश के बड़े शुभचिंतक हैं  लेकिन वे अभी तक देश के असली शत्रु, भ्रष्टाचार को नहीं पहचान पाये हैं न उसके  खिलाफ जंग छेड़े हैं । राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को भी देश को असली शत्रु से बचाने के लिए भाजपा को छोड़ ‘आप’ पार्टी का सहयोग करना चाहिए क्योंकि केजरीवाल में कुछ है और दिल्ली इसका जीता-जागता उदहारण था ।


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