मोदी बनाम मनमोहन सिंह

मैं हर किसी के राय की क़द्र करता हूँ । कोई जरूरी नहीं है कि कोई मेरा लेख पढ़कर अपनी राय बदल दे । एक की राय दूसरे से भिन्न होना प्रजा-तंत्र के लिए जरूरी है । मेरी राय में मोदी एवं मनमोहन सिंह में बहुत सारी समानताएं हैं । मनमोहन सिंह १० साल से गद्दी पर हैं, मोदी भी हैं गुजरात में । मनमोहन सिंह भी विकाश का ढिंढोरा पीटते हैं, मोदी भी । मनमोहन सिंह की क्षत्र-साया में उनके लोगों ने देश को खूब लूटा और मोदी की क्षत्र-साया में मोदी के लोगों ने गुजरात को । लोग कहते हैं कि मनमोहन सिंह के शाशन में भ्रष्टाचार देश में चरम पर है फिर भी मनमोहन सिंह बहुत ईमानदार हैं , वैसे ही भ्रष्टाचार गुजरात में चरम पर है फिर भी मोदी बहुत ईमानदार हैं । मनमोहन सिंह  अपने भ्रष्ट मंत्रियों के कारण सख्त लोक-पाल बिल नहीं बनाना चाहते और मोदी उनसे भी एक कदम आगे बढकर अपने लोगों को बचाने के लिए लोक-आयुक्त को राज्यपाल से छीनकर अपने हाथों में  ले लिया । मनमोहन सिंह  भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कुछ नहीं करते और मोदी भी । मनमोहन सिंह ने दागी लोगों को टिकेट दिया और मोदी ने भी । अम्बानी एवं टाटा मनमोहन सरकार चलाते हैं तो  वे ही गुजरात में मोदी सरकार चलाते हैं । मनमोहन ने तीव्र गति से बढती हुयी महंगाई को छुपाने के लिए ३२ रुपये रोज़ कमाने वाले को धनाढ्य करार दिया तो वहीँ मोदी ने गुजरात में गरीबों की संख्या छुपाने के लिए एक कदम आगे बढकर  12 रुपये रोज़ कमाने वाले को धनाढ्य करार दिया । मनमोहन की कांग्रेस पार्टी एक साम्प्रदायिक पार्टी है जिसने सिखों  का नर संहार  किया वहीँ मोदी की पार्टी भी क्योंकि उसने मुस्लिमों का । मनमोहन की कांग्रेस पार्टी की रैलियों में करोड़ों खर्च होता है जिसे भ्रष्टाचारियों एवं धनाढ्यों से अर्जित किया जाता है, वहीँ मोदी का भी वही हाल है । इस समानता की लिस्ट बहुत लम्बी है । अब हमें यह सोचना है की मोदी प्रधान-मंत्री बने तो मनमोहन सिंह से अच्छा विकल्प कैसे हो सकते ? लाल-कृष्ण अडवाणी क्यों नहीं? साथ ही अब हम २१ वीं सदी में जी रहे हैं । विश्व किसी भी शक्तिशाली राष्ट्र को कमजोर राष्ट्र पर हावी नहीं होने देगा । अतः हमें पाक-चाईना की चिंता छोड़ भारत को सशक्त बनाना होगा और यह तभी सम्भव है जब माननीय विकाश या जनता का धन न लूट सकें और १००% धन विकाश में लग सके । राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बारे में सुना हूँ की वे देश के बड़े शुभचिंतक हैं  लेकिन वे अभी तक देश के असली शत्रु, भ्रष्टाचार को नहीं पहचान पाये हैं न उसके  खिलाफ जंग छेड़े हैं । राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को भी देश को असली शत्रु से बचाने के लिए भाजपा को छोड़ ‘आप’ पार्टी का सहयोग करना चाहिए क्योंकि केजरीवाल में कुछ है और दिल्ली इसका जीता-जागता उदहारण था ।

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