क्या ८ हज़ार करोड़ के बोझ तले  दबी भाजपा से कोई उम्मीद है?

विभिन्न न्यूज़ एजेंसियों के मुताबिक मोदी ने करीब ४०० से ऊपर जनसभाएं की जिसमे भ्रष्टाचारियों एवं उद्योगपतियों से अर्जित करीब रुपये ४ हज़ार करोड़  खर्च हुए  और उतना ही तकरीबन ४०० से ऊपर खड़े किये गए प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार में । अतः कुल ८ हज़ार करोड़ के एहसान तले दबी  भाजपा  देश के लिए कुछ कर पायेगी ? क्या उन भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़े कदम उठा पाएगी जो जमाखोरी कर महँगाई को बढ़ाने  में अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन भाजपा को उनका साथ है ?  क्या भाजपा उन भ्रष्टाचारियों को जेल पहुंचाएगी जो विकाश के एक करोड़ लागत के खर्च के लिए सरकार का सौ करोड़ का चुना लगाये हैं, लेकिन भाजपा को जिताने में उनकी अहम भूमिका रही है? क्या भाजपा, कांग्रेस सरकार द्वारा पारित बिना नख-दन्त के लोकपाल बिल को सख्त जन लोकपाल बिल में परिवर्तित कर अपने ऊपर एहसान करने वालों को जेल भिजवाकर देश की दुर्दशा से निजात और भ्रष्टाचार की मार से आहत आम आदमी को उनका हक़ दिला पायेगी? क्या भाजपा कभी आम आदमी पार्टी सरीखे आदर्श पार्टी बन सकती है जिसने आम आदमी को भ्रष्टाचार से निजात दिलाने में समर्थ न होने के काऱण अपनी सरकार तक की तिलांजलि दे दी? मुझे तो भाजपा से कोई उम्मीद की किरण दिखाई नहीं देती क्योंकि यह भी पार्टी भ्रष्टाचार की नीवं पर खड़ी है । बस अब समय का इंतज़ार है ।

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