अरबिंद केजरीवाल को भ्रष्टाचार मिटाओ सेना की खुली चिठ्ठी

अरबिंद भाई, भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रही सभी संस्थाएं आप एवं अन्नाजी की अगुआई में इसलिए समर्थन दी कि आप कभी भी तय किये गए सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगें । हमारा उद्देश्य था कि अन्य पार्टियों की तरह हम सत्ता के पीछे नहीं भागेंगे और विपक्ष में बैठकर सरकारी नौकरों से व्यवस्था परिवर्तन के मुद्दे जैसे सख्त जन लोक पाल लागू कराना, VVIP/VIP कल्चर खत्म कराना, स्वराज लाना, प्रतिवर्ष सभी नेताओं एवं अधिकारियों एवं उनके रिश्तेदारों के खातों को ऑडिट कराकर आय से ज्यादे सम्पत्ति रखने वाले को जेल भेजना, हर गाँव में ग्रामीण सेवा केंद्र खोल ग्रामीणों का काम बिना भाग-दौड़ के एक समय सीमा में कराना तथा किसी भी तरह के न्यायिक मामले का छह माह या एक साल में निपटारा आदि की लड़ाई लड़ते रहेंगें । हमारा मानना था कि एक बार व्यवस्था परिवर्तन हो गया तो हम अपनी दूकान बंद कर किसी भी सडी-गली पार्टी को राज करने देंगें क्योंकि एक बार व्यवस्था परिवर्तन के बाद कोई भी भ्रष्टाचार कर नहीं पायेगा । आप लोक सभा चुनाव हारने के बाद हताशा में कांग्रेस पार्टी से मिलकर दिल्ली में सरकार बनाना चाहते थे कि, अब आपको व्यवस्था परिवर्तन का मौका न मिले । ऐसी दुविधा में आपको अपने सिद्धांतों को ध्यान रख निर्णय लेना चाहिए, तब सब आसान हो जाता । याद रहे कि अन्नाजी के आंदोलन एवं आपके कार्यकर्ताओं द्वारा जन-जन तक पहुँच आपको दिल्ली में जीत दिलाई | लोक सभा चुनाव के बाद आपको सोचना चाहिए था कि जब ३५ साल से ज्यादा पुरानी पार्टियां भारत के जन जन तक नहीं पहुँच पाई हैं तो आप की दो साल पुरानी पार्टी क्या खाक कर लेगी? मेरा अनुभव कहता है कि उत्तर प्रदेश में लोग जाति, मजहब, भ्रष्टाचार आदि में इतने जकड़े हुए हैं की आपकी पार्टी को १० साल से ऊपर लग जायेंगें यहाँ खाता खोलने में । अतः दिल्ली जीत के बाद क्या होता यदि आप प्रशांत भूषण को दिल्ली का मुख्य मंत्री एवं योगेन्द्र यादव को अपने पार्टी का संयोयक बना देते? क्या आपके सिद्धांत में बंधे ये लोग वो नहीं कर पाते जो आप चाहते हैं? यदि आपने देश के खातिर त्याग दिखाया होता तो हम भारत में पनपे राजनीतिक शून्य को भर सकते थे । मोदी जी के विकाश में एक पैसे का विकाश और ९९ पैसे का लूट हो रहा है | हमें लगता है कि मोदीजी को गरीबी दूर करने के लिए १०० साल से ज्यादा लगेंगें । एक विश्लेषण के मुताबिक शिक्षा खर्च एवं बढ़ती हुयी महंगाई दर को देखते हुए गरीबी रेखा की सीमा रुपये पंद्रह हज़ार प्रति माह होना चाहिए लेकिन गरीबों की संख्या कम दिखाने के लिए मोदीजी की गुजरात सरकार ने १२ रुपये रोज़ और कांग्रेस की मनमोहन सरकार ने ३० रुपये रोज़ कमाने वाले को धनाढ्य करार दिया । पिछले कुछ दिनों के हलचल से मुझे लगता है कि आप दिल्ली से ही संतुष्ट हैं । आपको अपने सिद्धांतों से चिपके हुए लड़ाई लड़नी थी, भले ही यह कितनी ही लम्बी क्यों न हो । यदि आपने बिना किसी देरी और बिना किसी बहाना के दिल्ली में सख्त जन लोक पाल नहीं लाया तो आपकी बची-खुची साख भी खत्म हो जाएगी और हमें भाजपा और कांग्रेस से ही ता-उम्र काम चलाना पड़ेगा ।

पूर्ण विवरण के लिए मेरी किताब, उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश में कैसे बदलें, पढ़ें |

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