Archive for May, 2015

आरक्षण की जरूरत क्यों पड़ती है

May 24, 2015

जब तक पढाई का स्तर सबके लिए समान नहीं होता तबतक गरीब का बच्चा धनी के बच्चे से कम्पीट नहीं कर सकता । उदाहरण के लिए कुछ भारत में ऐसे कोचिंग सेंटर हैं जहाँ से आईएएस /आईपीएस की गॉरंटी है लेकिन फी पच्चीस लाख रुपये से ऊपर है । अब अगड़ी जाती के गरीब बच्चों को ही लीजिये । क्या अगड़ी जाती के प्रतिभावान बच्चे इन अगड़ी जाती के अमीर बच्चों से कम्पीट कर पायेंगें जिनसे ऐसे कोचिंग सेंटर भरे पड़े हैं ? हमें तो ऐसा लगता है की अगड़ी जाती के गरीब बच्चे कभी IAS/IPS नहीं बन पायेंगें | आज आलम यह है की किसी भी गर्वान्वित सरकारी पद के लिए धनाढ्यों में ही एक दूसरे se कम्पेटिसन है क्योंकि मोटी – मोटी रकम देकर अच्छी शिक्षा vahi पाते हैं और गर्वान्वित सरकारी पद को हथिया लेते हैं । क्या किसी भी गाँव के हाई स्कूल से पढ़े बच्चे अमीरजादों के पंद्रह हज़ार महीने वाले हाई स्कूल से पढ़े बच्चों से मुकाबला कर पायेंगें । यदि जल्द ही कुछ किया नहीं गया तो राज करने वाले हर पद पर अमीरों के खानदान के ही लोग होगें और देश की बागडोर इन्हीं अमीरों के हाथ होगी तथा गरीब छोटी-मोटी नौकरी के साथ गुलामों की तरह घिसता रहेगा । यदि गरीबों और अमीरों के बीच असमानता ऐसे ही बढ़ती गयी तो गरीब के बच्चे काले अंग्रेजों के खिलाफ बन्दुक उठा लेगें और अमीर लोग उन्हें आतंकवादी या नक्सलाईट बोलकर मारते रहेंगें । महाभारत का युद्ध इसका ek प्रमाण है की एक शक्तिशाली भाई ही एक गरीब भाई का हक़ मार रहा था tatha उनके लिए कांटे ही कांटे बिछा रखा था । अतः अगड़ी जाती के कोटे में प्रतिभावान अगड़ी जाती के कम अंक पाने वाले बच्चों को आरक्षण की जरूरत है । अब यदि इसके liye लड़ाई लड़ी जाय तो अगड़ी जाती के अमीरजादे बोलेगें की सरकार गरीब अगड़ों को २५ लाख वाले कोचिंग में भेजे ya ऑक्सफ़ोर्ड भेजकर बराबरी पर लाये लेकिन आरक्षण न दें । जब भ्रष्ट सरकार प्राइमरी स्कूलों की पब्लिक स्कूलों से बराबरी नहीं करा पायी है तो क्या करोड़ों गरीब अगडों को २५ लाख वाले कोचिंग में भेज सकती है ताकि बराबरी का कम्पेटिसन हो? आज ५३५ सांसदों में ४७५ से ज्यादा महा करोड़पति (५० करोड़ से ऊपर की सम्पति) हैं । क्या इनसे कोई गरीब समाज सेवक चुनाव में बराबरी कर सकेगा? अतः चुनाव आयोग जो करोड़पति नहीं है उन्हें करोड़ रुपये चुनाव प्रसार के लिए दे या कुछ सीट गरीब अगड़ों के लिए आरक्षित कर दे । हमारे लोग इसके लिए लड़ाई लड़ रहे हैं और मैं जब भी भारत आता हूँ तो इसकी अगुआई करता हूँ । अभी हमारे लोग पूर्वांचल के जिलों में जगरूकत फैला रहें हैं और हर गाँव में हैंडबिल बाँट रहे हैं की गाँव का प्रधान कैसा हो । एक लीडर का काम होता है की अपनी विजन के अनुसार लोगों को चलना सिखाये और ऐसे लीडर पैदा करे जो इसमे अहम भूमिका निभाए । एक लीडर सभी जगह नहीं रह सकता और उसका अनुआई hi सफलता का कुंजी होता है|


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