उत्तर प्रदेश की मुख्य-मंत्री को एक खुली चिट्ठी – An Open Letter to Chief Minister (CM) of UP

 मैंने बलिया  और अन्य दूसरे उत्तर प्रदेश के जिलों के गांवों   में दलितों की यथा-स्थिति में कोई ज्यादा सुधार नहीं देखा | वे आज भी उसी हालात  में जी रहें हैं जिन हालातों में वे वर्षों पहले जीते थे | इसके अलावा, विकास कार्य कई जिलों में दिखाई नहीं देते और उत्तर प्रदेश में  नियम-कानून तो केवल गरीबों पर  ही लागू होते हैं, प्रभावशाली व्यक्तियों  पर  नहीं | इन सबका मुख्य कारण यह है की भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी ने उत्तर प्रदेश राज्य के सरकारी तंत्र में बहुत गहरी पैठ बना ली है और इसकी जड़ें इतनी मजबूत हो गयी हैं की  इसे धाराशायी करने के लिए एक आन्दोलन की जरूरत है |  जब तक की आप ‘भ्रष्टाचार मिटाओ,  उत्तर प्रदेश बचाओ’ की मंत्र पर काम नहीं करतीं,  तब तक सरकार द्वारा  किया गया कोई भी काम उत्तर प्रदेश की जनता तक सतही तौर पर  नहीं पहुंचेगा |  आपको इस नारे, “भ्रष्टाचार मिटाओ, उत्तर प्रदेश, बचाओ”,  को अपनी पार्टी के घोषणा पत्र में भी शामिल कर लेना चाहिए |     

 

एक सच्ची  लोकतांत्रिक व्यवस्था  में आम जनता (कोई भी व्यक्ति, जो सरकार में नहीं है), लोक सेवकों (जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक, उप डिवीजनल मजिस्ट्रेट, सर्किल ऑफिसर, पुलिस निरीक्षक आदि)  की मालिक होती है, न की कोई  एक व्यक्ति | कई सार्वजनिक नौकरों (लोक सेवकों) जैसे मंत्री-गण, राज्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, डी.एम., एस.पी., एस.डी.एम., आदि  को अभी  भी लगता है कि वे एक नौकर नहीं, शासक (जैसे पुराने दिनों में ब्रिटिश राज में था) हैं, और वे दलितों और गरीबों को वाजिब सम्मान नहीं देते | जैसा की सब जानते हैं, दलित लोग वे हैं, जो भारत में कई दशकों से दबाये हुए एवं  भेदभाव से ग्रसित तथा  सामंती व्यवस्था के असली पीड़ित है, और अभी भी हमें ऐसा कोई बदलाव देखने को नहीं मिलता, जहाँ दलितों एवं गरीबों के साथ लोक-सेवक या अन्य दूसरे लोग सम्मान के साथ पेश आते हों |  उत्तर प्रदेश के हर दलित और  गरीब को एक वीआईपी (विशिष्ट व्यक्ति) कार्ड मिलना चाहिए और मंत्री, डी.एम., एस.पी., एस.डी.एम., उत्तर प्रदेश के पुलिस सेवा के अधिकारी  इत्यादि  को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ताकि यदि एक  दलित उनके कार्यालयों में किसी काम के लिए पधारे तो उसे  वीआईपी के रूप में वाजिब सम्मान देकर उसका काम किया जाय, न की इसके उल्टा हो |  कोई भी व्यक्ति जो सरकार में नहीं हैं, वह सरकारी कर्मचारियों का  ग्राहक होता है, अतः  वह सरकारी कर्मचारियों से एक  “राजा”  के जैसे  बर्ताव का हकदार है, जैसा की निजी संस्था के कर्मचारी अपने  ग्राहकों के साथ करते हैं |   

 

हमारे अध्ययन  के मुताबिक़  उत्तर प्रदेश सरकार के विभिन्न सरकारी विभागों में ऐसे लोक-सेवक कार्यरत हैं जो अपने को विशिष्ट व्यक्ति एवं जनता का मालिक समझते हैं तथा जनता को अपना नौकर, और इसके साथ ही जनता का कोई काम या अपना कर्त्तव्य पूरा करके यह दिखाने की कोशिश करते हैं की वे जनता पर बहुत बड़ा अहसान कर रहे हैं | ज्यादातर मामलों में वे अपने नियत कार्यों एवं कर्तव्यों के निर्वहन के लिए आम जनता से रिश्वत की मांग करते हैं और रिश्वत न मिलने पर काम में अडंगा लगाकर जनता को परेशान करते हैं |  इनकी सोच यह नहीं है की जनता के धन से ही उन्हें प्रति माह जनता की सेवा के लिए वेतन दिया जाता है और उन्हें जनता को बिना परेशान किये दिल से सेवा करनी चाहिए | लोक-सेवकों को प्रशिक्षित कर आज यह समझाने की जरूरत है की उन्हें उस पद पर बैठाने के लिए मजबूर नहीं किया गया है और वे अपनी खुद की मर्जी/पसंद से जन-सेवा के कार्य को करने के लिए सरकारी नौकरी में एक लोक-सेवक के रूप में भर्ती  हुए  हैं |  यदि कोई लोक-सेवक यह सोचता है की उसे जबरन पद पर डाला गया है तो वह  नौकरी छोड़ कर अपने स्वयं के व्यवसाय करने के लिए स्वतंत्र है |  यहाँ कतार में कई उसके प्रभार  को संभालने के लिए तैयार बैठे हैं | 

 

आपसे मेरी सिफारिश है कि आप चुनाव के दौरान जनता से किये हुए वादों की सूची  में से जितना भी वादे आपकी पार्टी के सरकार में रहते हुए पूरे हुए हों उनका पूर्ण विवरण अपनी पार्टी के वेब-साईट पर डालें ताकि जनता उसे परख एवं आपके द्वारा किये हुए कार्यों तथा प्रदत्त सेवा का विश्लेषण  कर सके |  यह सूचना  उन्हें अगली सरकार के गठन पर फैसला करने में सक्षम बनाएगी |  मेरा मानना है कि आप उपर्युक्त सुझावों पर कार्य करने की क्षमता रखती हैं  और मैं आगे चलकर इस पर आपकी  कार्रवाई होते  हुए देखना चाहता हूँ |  और अंत में,  चूँकि  एक लोकतंत्र में आम जनता ही सरकार की मालिक होती है, अतः उत्तर प्रदेश का एक जन साधारण (नागरिक)  होने के नाते यह मेरा अधिकार और कर्तव्य है की आपसे एक अच्छे शासन की मांग करूँ | आप इस पर काम करें या न करें, आपकी मर्जी | भ्रष्टाचार मिटाओ अभियान के हमारे कार्यों पर पूर्ण विवरण के लिए आप हमारी वेब-साईट   vinay1340.wordpress.com  को  देख   सकती  हैं |

 

I don’t yet see any changes in status of Dalits in many villages of district of Ballia and others in UP. They are still living in same circumstances where they were many years ago. Also, development works are not visible in many districts of UP and Law and Order is only applicable to poor and not to influential. This is mainly because corruption and bribery system rooted so-deeply in state of UP. Until you work on the line of “Remove Corruption, Save UP (Bhrastachaar Mitao, UP Bachao)”, your work would not be visible to public of UP. You should include this slogan, “Bhrastachaar Mitao, UP Bachao”, in your party’s manifesto too.

 

 In the true democratic state, the general public (any person who is not in government) is the boss of Lok-Sevaks (District Magistrate, Superintendent of Police, Sub Divisional Magistrate, Circle Officer, Police Inspector etc.) and not an individual. Many public servants (Lok-Sevaks), such as Ministers, State Secretaries, DGP, DMs, SPs, SDMs etc., still think they are not a servant but ruler (like British of olden days) of the people and they don’t give due respects to Dalits and poor. Dalits are the people who are discriminated and real sufferers from many decades in India and still there are not impressive changes. Every Dalit and poor of UP should be given a VIP card and Ministers, DMs, SPs, SDMs, Police officials etc of UP must be trained to treat the Dalits as a VIP when they show into their offices and not to think the other-way-round. Any person who are not in government, are customers of Government servants and they should be given treatment like “God”.

 

Our experiences show that there are many public servants in various government offices who still think that they are VIPs and obliging the people by performing their work. In most cases, they ask for “Suvidha Sulka” to perform their assigned tasks. They don’t think that public is paying them every month to perform their duty. They should be given training to make them understand that they are not forced to work there but they are there with their own choice to serve the public. If they think, they are forcibly put for the position, they are free to leave the job and do their own businesses. There are many in queue to take up the charge,

 

I would like to recommend providing the list of promises made during the time of election and the list of accomplished promises when in Government on a party’s website (internet) to view of general public of UP. This would enable them to decide on formation of next government.

 

I believe you have ability to do so and I am looking forward for your action on this. Last but not the least, as, in a democracy, general public is boss of a government and as being a citizen of UP, it’s my right and duty to demand for  good governance.

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