निष्कर्ष – Conclusions – by Dr. Vinaya K. Singh, Ph.D.

 

इन सबके वावजूद, जो भी इस किताब के पिछले अध्यायों में लिखा गया है वह तभी पूरा हो सकता है जब सरकार महान राजनीतिज्ञों एवं श्रेष्ठ राजनीतिक पार्टियों द्वारा गठित हुयी हो | आज सरकार के कामकाज में सुधार के लिए राजनीतिक एवं आम जन की इच्छाशक्ति की जरूरत है | राजनीतिक दलों के मुखियाओं को किसी भी सार्वजनिक प्रतिनिधित्व के लिए उम्मीदवार का चयन करने से पहले लाख बार सोचने की जरूरत है | प्रत्याशी के हार या जीत की परवाह किये बिना मुखिया को चाहिए कि एक ऐसे प्रत्याशी को चुनाव मैदान में खड़ा करे जिसकी छवि साफ़-सुथरी हो और वह इमानदारी का प्रतिमूर्ति एवं कर्त्तव्यनिष्ठ हो | राजनीतिक दलों को लालच एवं सत्ता का बलिदान कर हमेशा ही राज्य के भलाई के बारे में सोचना चाहिए |  आज अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने की जरूरत है की वे बिना किसी फायदा के राज्य, एवं मुख्य तौर पर जनता, के कल्याण के बारे में सोचें और अपने को सेवा के बदले में भ्रष्ट एवं असंवैधानिक तरीके से पैसे कमाकर अपना कल्याण करने से स्वयं को दूर रखें | राजनीतिक दलों के सदस्यों से यह ब्यान-हल्फी ले लेना चाहिए कि वे इमानदारी पूर्वक राज्य कि सेवा करना चाहते हैं और वे राजनीतिक पार्टी में सिर्फ पैसा कमाने या हक से जयादा कोई भी लाभ, जो की वर्तमान या भविष्य में मिल सकता है, के वास्ते शामिल नहीं हो रहे हैं | इसके अलावा उनसे लिखित रूप में यह ले लेना चाहिए की वे राजनीति को व्यापार बनाकर पैसे कमाने के लिए नहीं अपना रहे हैं, और यदि वे सार्वजनिक कार्यालयों में किसी निर्वाचित पद पर आसन्न  हुए तो वे अपने पद या प्रभाव को अनुचित गतिविधियों में लिप्त होने के लिए उपयोग नहीं करेंगें | उनसे यह भी लिखाकर ले लेना चाहिए कि एक राजनीतिक कार्यकर्त्ता होने के नाते वे किसी भी परिस्थिति में कोई भी लाभ या पक्षपात नहीं लेना चाहेंगें और भ्रष्ट आचरण के माध्यम से  व्यक्तिगत या  परिवार के किसी सदस्य के फायदे के लिए कभी भी काम नहीं करेंगें |  यदि वे अपने ब्यान से बाहर जाकर काम करते हैं तो उन्हें बाहर का दरवाजा दिखा कर कानून के अनुसार सजा दी जानी  चाहिए |

 

हालाँकि राजनीतिक दल अपने स्वार्थों के बलिदान का इच्छा-शक्ति रखें तो उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश में बदलने में एक महत्वपूर्ण  भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन इससे कम की भूमिका आम जनता की भी नहीं होगी और आम जनता चाहे तो उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश में बदलने में एक महान भूमिका निभा सकती है | उत्तर प्रदेश की आम जनता के हाथों में अमूल्य वोट का अधिकार है और वह इसका उपयोग कर एक अच्छे व्यक्ति को अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी भी प्रकार के विधानसभा में भेज सकती है | चुनाव के दौरान आम जनता को चाहिए की चुनाव मैदान में खड़े प्रत्याशियों में से प्रत्येक के जीवन-वृत्ति का पूरी तरह से अध्ययन करने के बाद ही किसी प्रत्याशी को वोट डालें |  यदि हम वास्तव में उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश में बदलना चाहते हैं तो हमें प्रत्याशी के गुणवत्ता के ऊपर वोट देने की जरूरत है, न कि किसी  राजनातिक पार्टी या राजनीतिक पार्टी के मुखिया के नाम पर |  आज समय की पुकार है कि हमारे जैसे आम लोग किसी भी उम्मीदवार को वोट करने से पहले उसके बारे में कई बार विश्लेषण करें और यदि उसके जैसा कोई दूसरा उम्मीदवार न हो तो ही उसको वोट करें | हमें अपने आप से यह प्रश्न पूछना चाहिए की हम जिस व्यक्ति को वोट करने जा रहे हैं वह वास्तव में हमारी सेवा करेगा की नहीं, वह अपने कार्यकाल के दौरान इमानदार रहेगा की नहीं या वह केवल अपने और अपने परिवार के कल्याण के लिए ही काम नहीं करेगा | यदि हम इन प्रश्नों के जवाब से संतुष्ट होते हैं तभी जाकर उसे मतदान करना चाहिए | यदि हम किसी प्रकार विधान सभा के सभी सदस्यों में से कम से कम ५१% इमानदार सदस्यों को भजने में कामयाब हो जाते हैं तो हम यकीन के साथ कह सकते हैं की वे उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश में बदलने में जरूर सक्षम होंगें |

 

इस पुस्तक में उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश में बदलने के लिए जो भी प्रस्ताव प्रस्तुत किये गए हैं वे न ही अव्यवहारिक हैं और न ही काल्पनिक | सारे प्रस्ताव व्यवहारिक हैं और उन्हें आसानी से लागू किया जा सकता है | हमारे देश में हमेशा के लिए आज का यह त्रुटी-पूर्ण लोक-तंत्र नहीं रहेगा| एक दिन सही का लोक-तन्त्र हमारे देश में जरूर आएगा और उस दिन आप देखिएगा की लेखक ने जो भी इस पुस्तक में लिखा है वह सच साबित होने लगेगा | लेखक को एक दिन ऐसा होने का आश है |  क्या समय-समय पर राज्यपाल और मुख्य-मंत्री नहीं कहते हैं की वे आम जनता के नौकर हैं ? वे ऐसा हमेशा बोलते रहते हैं लेकिन अंतर यही है की वे वास्तविक जीवन में इसका पालन नहीं करते | लेकिन यह असंभव नहीं है | वे अपने वास्तविक जीवन में भी एक सेवक की तरह बर्ताव करना शुरू कर देंगें यदि आम जनता शिक्षित एवं जागरूक होकर अपना अधिकार मांगना शुरू कर दे |  बहुत सारे शिक्षित लोग हैं जिन्हें अपने अधिकार के बारे में पता है, लेकिन अभी भी बहुत सारे ऐसे भी लोग हैं जिन्हें लोक-तंत्र का मतलब पता नहीं है और हमें उन तक पहूँचने की जरूरत है | लेखक के मतानुसार आज का कोई भी अपराध लें वह किसी न किसी तरह से पैसे के लालच से जुड़ा है, या दूसरे शब्दों में कहें तो जहाँ पैसे का मामला है वहाँ भ्रष्टाचार है| अतः हम यह कह सकते हैं कि हर अपराध की जड़ भ्रष्टाचार है | यदि हम भूत में टाडा जैसे कानून बना सकते हैं तो वैसा ही कठोर कानून भ्रष्टाचार की रोक-थाम के लिए क्यों नहीं बना सकते ? यदि सरकारी नौकरों में यह डर पैदा हो जाय की भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने  पर  उनसे  आतंकवादियों  की तरह सलूक किया जायेगा और उन्हें वैसा ही सजा भी दिया जायेगा तो वे भ्रष्ट काम करने से पहले दो या तीन बार अवश्य सोचेंगें |  और यहाँ पर लेखक यह जरूर कहेगा कि ऐसा कानून बनाना कोई कल्पना नहीं है, सिर्फ इच्छा-शक्ति कि जरूरत है |   

आज राज्य की आम जनता को एक साथ मिलकर भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन को गति प्रदान करने की जरूरत है और उत्तर प्रदेश के मालिकों को यह बताना नितांत आवश्यक है की  राज्य में कुछ भी ठीक से काम नहीं करेगा जबतक की भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए कोई उचित कदम न उठाया जाय | कानून-व्यवस्था, न्यायपालिका एवं विकाश आज राज्य की बुनियादी जरूरतें हैं लेकिन ये सब भ्रष्टाचार से कसकर जुड़े हुए हैं | यदि हम भ्रष्टाचार मिटाने में थोडा भी कामयाब होते हैं तो हमें अंतर दिखाई देने लगेगा | आज समय की पुकार है की हम सब को मिलकर सिर्फ एक उद्देश्य पर काम करने की जरूरत है और वह उद्देश्य है, ‘भ्रष्टाचार मिटाओ, उत्तर प्रदेश बचाओ’| लेखक को पूर्ण विश्वाश है की हम एक न एक दिन उत्तर प्रदेश में अवश्य बदलाव लायेंगें | आज हम भारत की मौजूदा परिस्थिति का अध्ययन करें तो पाएंगे कि भ्रष्टाचार भारत के लिए एक न एक दिन क्रांति बिंदु जरूर बनेगा और जो भी नेता इसके खिलाफ जंग छेड़ेगा उसे जय प्रकाश नारायण जैसे महान नेता का कद हासिल होगा |

After all, all the aforementioned things could only be achieved if there is government formed by noble political parties and noble politicians. There is a need of political and public will to improve the functioning of government. Head of political parties need to think million times before selecting a candidate for any public representation. He/she should always try to provide honest and dutiful candidates to contest the elections, even if candidates are going to loose the elections. Parties have to sacrifice the greediness for the power and should think only for the welfare of the state. Party workers should be motivated to work for the welfare of the state, and public in general, and must be restrained to think of for earning money for their welfare using unconstitutional means. Members of political party should be asked to sign the statements stating that they really want to serve the state honestly and don’t want to join solely for money sake or any benefits more than they would be entitled for now or in the future. Also, they should give in writing that that they will not make politics a money making business, and if they elected for public offices they will not use their positions/influences for indulging in inappropriate activities. They should also state, they don’t want any favor in any circumstances for being members of a party and will not involve in corrupt practices to earn money for the personal benefits or for the benefits of a family member. If they go against their oath, they must be shown the door and punished as per the law.

Though the political parties could play an important role in transforming UP in a best Pradesh by having a will to sacrifice but none the less, the great role will only be played by the public itself. The public of UP have invaluable voting right to send right persons into assembly of any kind to represent them The public need to review the bio-data of each and every candidate in the field during the election, and then vote. If we really want to transform Uttar Pradesh in Uttam Pradesh, we need to vote based on the quality of a candidate, and not based on the name of a political party or head of a party. Now it’s call of time for general public like us to analyze the candidature of a person and think and think many times before taking a decision to vote for him/her. We should question ourselves if the person to whom are we going to vote is really going to serve us, will he/she be honest during his/her tenure and will he/she not work only for his/her and his/her family welfare. If we find satisfied with the answers, exercise our vote to him. If we are somehow able to send at least 51% of total assembly members as honest ones, we are sure they may be able to transform the Uttar Pradesh in Uttam Pradesh.

The proposals in this research paper are neither impractical nor utopian. Everything is practical and can be easily implemented. Our country will not remain practicing faulted democracy for ever. One day our country will certainly practice the real democracy and that day you will see whatever author proposed have become the real. Author has hope. Don’t we know that the governor and chief minister say that they are the servant of public? They say every day, but they don’t implement in real life. But it’s not impossible. They will start implementing in real life too, if we could educate the public and ask them to demand their dues. There are many who know their rights but still there are many who have not understood the meaning of democracy and we have to reach on them. In author’s opinion, almost every crime is somehow associated with money or in other words with corruption. Thus we may conclude that the mother of most of the crimes is corruption. If we can make law like TADA, why can’t we make law like that to control the corruption? If government servants will have fear of called terrorists for practicing the corruption and may face rigorous punishment, they may certainly think twice or thrice before practicing corruption. And author would like to tell here that doing this is not impractical but we need a will.

We have to gather momentum from our public against the corruption and we need to prove them that until you remove corruption, nothing will work properly. The law & order, judiciary and developments are basic needs of a state but they all have a tight link with corruption. If we are successful in removing the corruption, we can see the difference. The call of time is now to work together on one and only one mission, ““Bhrastachar Mitao, UP Bachao””. Author is sure, we can make a change. If we look on current scenarios in India, the corruption could be a point of revolution and a leader crusading against this can get a stature of Jai Prakash Narayan.

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