भ्रष्टाचार – On “Corruption” – by Dr. Vinaya K. Singh, Ph.D.

भ्रष्टाचार क्या है, नैतिकता का अभाव |  अतः जहाँ अनैतिकता है वहां भ्रष्टाचार है | कोई भी  अपराध  ले लें, वह अनैतिक वजहों   के  कारण ही होता है |  उदाहरण के तौर पर दूध में पानी के मिलावट को ही ले लें |  दूध बेचने वाला ज्यादा पैसा कमाने के लिए दूध में पानी मिलाने का अनैतिक कार्य करता है, अतः वह भ्रष्टाचार के वजह से अपराध में लिप्त है | दूसरा उदाहरण विकाश कार्य से सम्बंधित सरकारी नौकरों का ले लें | सरकारी नौकर विकाश के  धन का बन्दर बाँट करते हैं  और विकाश के लिए निर्गत धन का अधिकतर   पैसा खा जाते हैं, अतः सतह पर विकाश दिखाई नहीं देता |  सरकारी नौकर यह नहीं सोचते की इस धन से विकाश होने पर ज्यादा  लोगों का भला होगा और ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में नैतिकता खो देते हैं और भ्रष्ट बन जाते हैं | तीसरा  उदाहरण कानून-व्यवस्था का  ले लीजिये जहाँ रिश्वत एवं प्रभाव के बल पर खूनी, माफिया  एवं गुंडे भी आराम  की जिंदगी गुजर बसर कर रहें  है और यह पुलिस विभाग के सरकारी नौकरों में नैतिकता के अभाव के कारण हो रहा है |  अतः उपर्युक्त उदाहरणों के आधार पर हम यह कह सकते हैं की हर अपराध की जननी भ्रष्टाचार है | जब तक हम इस पर अंकुश नहीं लगाते तब तक प्रदेश का भला कभी नहीं हो सकता, चाहे आप कितना भी कोशिश क्यों न कर लो |  चूँकि भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाती अतः उन्हें अनैतिक कार्य करने में थोड़ा भी डर नहीं लगता | इस वजह  से विकाश, कानून व्यवस्था एवं न्याय प्रणाली पंगु होती जा रही है |  प्रजा-तंत्र को अच्छी तरह से चलाने में सबसे बड़ी भूमिका सरकारी नौकरों की होती है और इसलिए हर सरकारी नौकर ईमानदार एवं नैतिकता-पूर्ण होना चाहिए लेकिन  पूर्व सतर्कता आयुक्त की एक टिपण्णी के मुताबिक़ ८५% सरकारी नौकर भ्रष्ट हैं और बाकि भ्रष्ट बनने के कगार पर हैं | अतः हमारे देश में प्रजा-तन्त्र है कहाँ? सिर्फ वोट देने का अधिकार होने से ही कोई देश प्रजा-तांत्रिक थोड़े ही हो जाता है |  यदि हम सरकारी नौकरों में भ्रष्ट कार्य करने के प्रति डर पैदा कर दें तो हर तरह का अपराध बंद हो जायेगा और आम जन के जीवन में परिवर्तन दिखने लगेगा | 

सरकारी नौकरों के रग-रग में भ्रष्टाचार गुजर-बसर कर रहा है | हर सरकारी नौकर (मंत्री से लेकर संत्री तक) इसी फिराक में रहता है की कहाँ से कुछ उपरी कमाई हो या लूट-खसोट का कोई मौका मिले | हर एक आम जनता को ये सरकारी नौकर ललचाई नज़रों से देखते रहते हैं, जैसे शेर एक शिकार को देखता है और मौका मिलते ही झपट्टा मारता है |  ये  सरकारी  नौकर नियम कानून की आड़ में आम जनता को तड़पा-तड़पा कर मार रहे हैं और रिश्वत एवं कमिसन खोरी के लिए एक तरह से मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं | इनकी आत्मा मर चुकी है | इनकी शिकायत करने पर कहीं कुछ नहीं होता | जाँच के लिए अधिकारी भी तैयार बैठे हैं और वे भी इसी क्षण का इंतज़ार करते रहते हैं की कब कोई जाँच बैठेगा ताकि कुछ खाने-पीने को मिलेगा | इस तरह जाँच में लीपा-पोती कर दिया जाता है | आम जनता से जब रिश्वत माँगा जाता है तो आम जनता के पास यह कहने के सिवा क्या सबूत है की अमुक सरकारी नौकर ने घूस माँगा है |  अब यह जाँच अधिकारी की जिम्मेदारी बनती है की गुप-चुप तरीके से भ्रष्टाचार में लिप्त सरकारी नौकर के खिलाफ जांच कर या स्टिंग आपरेशन  के जरिये फंसाकर उसे सजा दिलाई जाय, लेकिन ऐसा नहीं होता है | अतः सरकारी नौकर अब रिश्वत न मिलने पर धमकी भी देने लगे हैं क्योंकि उनकी जड़ बहुत मजबूत हो गयी है |  अब ऐसे माहौल में उत्तर  प्रदेश में प्रजा-तन्त्र कहाँ है जहाँ प्रजा की सेवा सरकारी नौकरों के द्वारा मनोभाव से होती हो? अतः भारत में प्रजा-तंत्र लड़खड़ा  रहा है और इसकी वजह से  कानून व्यवस्था, न्याय और विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और कुछ ही दिनों में भ्रष्टाचार की यह प्रक्रिया प्रजा-तंत्र को पंगु बनाने वाली है |  धीरे-धीरे इसका असर सब तरफ दिखने भी लगा है | उत्तर प्रदेश में पैसे के बल पर कानून को ख़रीदा  जा रहा है और पुलिस एवं जाँच  एजेंसियां निष्पक्ष काम नहीं कर रही है| अतः यहाँ पैसे वालों के लिए अलग एवं गरीबों के लिए अलग कानून है | एक शुद्ध प्रजा-तंत्र में ऐसा नहीं होना चाहिए | सरकरी तंत्र में लूटेरों के वजह से विकास का पैसा लूट लिया जा रहा है और सतह पर विकास कहीं भी दिखाई नहीं देता |

सरकारी नौकरों में थोड़ी भी नैतिकता नहीं रह गयी है | हर एक को पता है की बिना कुछ दिए या लिए उत्तर प्रदेश में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता है, लेकिन कोई इसके खिलाफ कुछ भी नहीं करता |  सरकारी नौकर राजा-महाराजाओं की जीवनशैली अपनाने के लिए जी भरकर आम जन को लूट रहे हैं | आम जन भी अपना काम कराने के लिए मजबूरी में इन्हें घूस दे रही है | जन-प्रतिनिधि चुनाव में अपना लगाया हुआ पैसा निकालने के लिए लूट-खसोट को कानूनी तौर पर वैध कर दिए हैं और कुछ ईमानदार लोगों द्वारा इनके खिलाफ कार्रवाई कराने पर जांच एजेंसी जैसे पुलिस, सी. आई. डी., सी. बी. आई. इत्यादि को अपने प्रभाव में कुछ करने नहीं देते हैं | पैसे के बूते अवैध कार्य को भी वैध बना दिया जा रहा है | आज का आलम और लोगों की मानसिकता यह है की यदि किसी व्यक्ति का किसी मलाईदार पद पर नियुक्ति नहीं है जिसके बदौलत  वह आलीशान जीवन जी सके तो लोगों में उसकी इज्जत नहीं होती और साथ ही उसकी खिल्ली भी उड़ाई जाती है |  लोग इस वाक्यांश को अब भूल चुके हैं की प्रजा-तंत्र और देश की प्रगति के लिए ‘इमानदारी ही सर्वोत्तम नीति है’ | सुप्रीम कोर्ट ने भी भ्रष्टाचार के खिलाफ तल्ख़ टिपण्णी करते हुए कहा है की सब लोग देश को लूटने  में लगे हुए हैं और अब इन भ्रष्टाचारियों  के खिलाफ कुछ ऐसा करने की जरूरत है जिससे की भ्रष्टाचार में डूबे हुए लोगों में भय पैदा हो | इसने यहाँ तक कहा है की यदि भ्रष्टाचार में किसी के खिलाफ थोडा भी सबूत मिलता है तो उसे सरेआम लैम्प पोस्ट से टांग कर फाँसी दे दी जाय | इससे दहशत फैलेगी और लोग भ्रष्टाचार में लिप्त होने के पूर्व कई बार सोचेंगे |

एक अच्छी जिंदगी जीने के लिए सबको पैसे चाहिए लेकिन भ्रष्ट तरीके से कमाकर यह पाना उचित नहीं है |  इससे जरूरतमंदों एवं गरीबों का शोषण होता है और साथ ही विकास प्रभावित होता है |  भ्रष्ट पुलिस वालों से तंग आकर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के छात्रों द्वारा यहाँ तक की भारत के पूर्व राष्ट्रपति से भी यह शिकायत किया गया था की पुलिस विभाग के हर स्तर पर बिना घूस लिए काम नहीं होता और उन्हें अपना पासपोर्ट बनवाने  के लिए पुलिस वालों को भारी रकम घूस के तौर देनी पड़ रही है | क्या यह पुलिस के अधिकारियों को  पता नहीं है? वे सब-कुछ जानते हैं, लेकिन अपनी आँखें मूंदे हुए हैं | यदि  वे चाह दें तो   पुलिस महकमें  में  घूसखोरी  एक दिन में बंद हो जायेगा लेकिन वे ऐसा नहीं करते क्योंकि उन्हें पता है की यदि वे ऐसा करते हैं तो उनकी एवं उनके आकाओं की अतिरिक्त्त आमदनी का साधन बंद हो जायेगा | भ्रष्टाचार की महामारी पुलिस महकमे में इस कदर व्याप्त कर गयी है की वे यहाँ तक की छात्रों, यानी की अपने देश के कल के भविष्य, को भी अपने चंगुल से नहीं छोड़ते | पुलिस विभाग, कुछ तो शर्म करो |  मुझे यह नहीं पता की सरकार को चलाने वाले लोग आखिर क्यों इतनी योजनायें फालतू में निकालते हैं जिसका की लाभ जिसे मिलना चाहिए उसे नहीं मिलता और भ्रष्ट लोगों तक ही यह सिमित होकर रह जाता है | इससे गरीब या देश का कैसा भला होता है ? हमने तो कोई भला नहीं देखा |  गरीबी घटने के जगह बढ़ ही रही है | हमारे  गाँव की कच्ची सड़क हर साल बिगड़ती एवं बनती है और मलाई  खाने वाले इससे मजा मार रहे हैं, आम जनता का इसमें क्या भला हो रहा है?  क्या सरकार यह सुनिश्चित नहीं कर सकती की सड़क एक ही बार में ऐसा बने की लूट-खसोट न हो और सारा का सारा मद सड़क बनाने पर खर्च हो, जिससे की सड़क कई सालों तक चले और इसे दुबारा बनाने के लिए आये हुए मद को दूसरे  विकास कार्य में लगाया जा सके | लेखक के शोध के मुताबिक़ सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनायें जैसे वृद्धा पेंशन, कन्या धन, महामाया, इंदिरा आवास-विकास, मनारेगा इत्यादि का  फायदा रिश्वत के बल पर अपात्र उठा रहे हैं और अपवाद के रूप में कुछ असली पात्र को तभी इसका लाभ मिलता है जब वे किसी तरह से जुगाड़-पानी कर सुविधा शुल्क सरकारी तंत्र में काम करने वाले लूटेरों को दे पाते हैं | प्रदेश का मुखिया कहाँ हैं की  उन्हें  भ्रष्टाचार कहीं दिखाई ही नहीं देता और सब जगह सबकुछ चकाचक ही दिखाई देता? हमें प्रदेश का नेतृत्व प्रदान करने के लिए एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जो अपनी छवि से एक उदहारण प्रस्तुत कर सके, तभी उसे कुछ दिखाई देगा और प्रदेश की असली समस्या, यानी की भ्रष्टाचार, के खिलाफ कुछ कठोर कदम उठा सकेगा |

लेखक के एक सर्वे के मुताबिक किसी योजना  के लिए अपात्र  व्यक्ति योजना का लाभ पाने के लिए ख़ुशी-ख़ुशी योजना का आधा हिस्सा भ्रष्ट सरकारी नौकरों में घूस या उपहार के रूप में बाँट देता है और इस तरह आसानी से योजना का पात्र बन जाता है |  इसके लिए ये अपात्र व्यक्ति यह कारण बताते हैं की यह लाभ तो बिना मेहनत की कमाई का है और सरकार द्वारा मुफ्त में घर बैठे ही दिया जा रहा है,  अतः इस लाभ को मिल-बाँट कर खाने में हर्ज़ ही क्या है | क्या सरकार के योजना नियंता यही सोचकर योजनायें पारित करते हैं? अरे भाई अब तो जागो और कुछ ऐसा करो की असली हकदार को ही उसका हक़ मिले, न की खुद ही लूट लो |  गाँव का प्रधान हर किसी से लाभ का आधा पैसा एकत्रित करता है और उस पैसे को ऊपर  से नीचे तक सभी सरकरी नौकरों में उनके हिस्से के अनुसार बांटता है | सरकारी नौकर खुश हैं की उन्हें सरकार से तनख्वाह एवं अन्य सुविधाओं के अलावा मुफ्त में मलाई भी मिल रहा है, अतः भ्रष्टाचार के खिलाफ कुछ करते ही नहीं | अतः पीड़ित किसके यहाँ भ्रष्टाचार के खिलाफ  गुहार लेकर जायें?   उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी समस्या  है की प्रदेश के लगभग सभी सरकारी नौकर (मंत्री से लेकर संत्री तक) भ्रष्ट हैं अतः इनके पैसे के प्रभाव की वजह से  भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई भी जांच आगे बढती  ही नहीं और इसलिए भ्रष्टाचारियों को कोई सजा नहीं हो पाती है | अतः भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद  हैं | क्या ऐसा कोई उपाय है की भ्रष्टाचार में लिप्त किसी सरकारी नौकर को सजा दिलाई जा सके? इसके लिए जांच एजेंसी में बहुत ही इमानदार लोग होने चाहिए जो किसी भी तरह के लालच से विचलित न हों | लेकिन इसकी भी क्या गारंटी है की यदि किसी इमानदार आदमी को  जाँच-भार सौंप भी दी जाती है तो उसको मिलने  वाला  लोभ उसे विचलित नहीं करेगा | तो अब हम क्या करें? क्या हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें और प्रदेश को लूटते हुए देखते रहें? नहीं, हमें कुछ तो नए प्रयोग करने ही चाहिए और इसके तहत पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार  को सरकारी बिपत्ति घोषित कर देनी चाहिए और सरकार की प्रथम  प्राथमिकता इसका निदान होना चाहिए |

यदि ब्लाक से लेकर जिले के हर स्तर तक एक ऐसी जांच आयोग  का गठन कर दिया जाय जो जांच  के लिए हर संसाधनों से लैश हो तथा सिर्फ भ्रष्टाचार के मामले की ही जांच करे और  गठन के बाद सरकार के नियंत्रण से मुक्त रहे तो शायद हम भ्रष्टाचार पर कुछ हद तक अंकुश लगा सकें  | इसके साथ ही जाँच आयोग को जांच के लिए कहीं से किसी भी तरह का अनुमति  लेने का प्रावधान न हो |  इसमें यह प्राविधान हो की ब्लाक  स्तर के सरकारी नौकरों का ब्लाक, तहसील स्तर के तहसील और जिले स्तर के जिले स्तर पर बनाई गयी जांच आयोग को शिकायत किया जाय और जाँच आयोग सरकारी नौकरों पर दोष सिद्ध करने लिए कोई कोर कसर न छोड़े | दोष सिद्ध होने पर कड़ी सजा का प्रावधान हो और आयोग  द्वारा दिए गए सजा को केवल उच्च या उच्चतम न्यायालय में ही चुनौती देने का प्रावधान हो | चूँकि रिश्वत के लेन देन या विकाश के पैसे के लूट का कागज़ पर कोई निशान नहीं होता अतः ऐसे मामलों में  शिकायतकर्ता के द्वारा सबूत पेश करना एक टेढ़ी खीर है | उदहारण के तौर पर विकाश के लिए मिले हुए एक लाख रुपये में से मिली भगत के माध्यम से ९० हज़ार रुपये तक भ्रष्ट तत्त्व कमिसन के रूप में बाँट लेते हैं लेकिन कागज पर यही दिखाते हैं की काम १० हज़ार रुपये में न होकर एक लाख रुपये में हुआ है | अतः ऐसे मामलों में जांच आयोग को सबूत के लिए कठोर मेहनत करनी पड़ेगी | इसी तरह से यदि किसी काम के लिए कोई सरकारी नौकर रिश्वत मांगता  है तो  शिकायतकर्ता सिर्फ जांच आयोग से शिकायत  ही कर सकता है न की कोई सबूत दे सकता है | अब ऐसे मामले में आयोग को चाहिए की शिकायकर्ता के साथ मिलकर स्टिंग  आपरेशन  या किसी   अन्य प्लान के अंतर्गत रिश्वतखोर को पकड़े |  

उत्तर प्रदेश सरकार में है कोई ऐसा जो  करदाताओं की गाढ़ी कमाई को कैसे लूटा जा रहा है उसके बारे में वास्तव में सोचता हो |  सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है की वह यह सुनिश्चित करे की करदाताओं का एक भी पैसा न लूटा जाय और यह ज़रूरतमंदों को पूरा का पूरा मिले या विकाश कार्य में पूरा का पूरा लगे तथा इसे सरकारी नौकर लूट न सकें | यदि सरकार ऐसा नहीं कर पा रही है तो वह करदाताओं के साथ अन्याय कर रही है, अतः प्रजा-तन्त्र के काबिल नहीं है |  यदि भ्रष्टाचार को नियंत्रित  कर लिया जाय तो  हर समस्या का समाधान हो जायेगा | हर छोटी या बड़ी समस्या का जड़ भ्रष्टाचार ही है | यदि भ्रष्टाचारियों में यह डर  हो जाय की उन्हें सजा मिलनी ही मिलनी है और वो बच कर नहीं जा सकते तो वे अपने को भ्रष्ट कार्य करने से रोकेंगे  और यदि ऐसा हुआ  तो   हर  एक  का हक उसको  बिना किसी परेशानी के मिलने  लगेगा, विकाश कार्य दिखाई देगा और घपलेबाज़, मिलावटखोर या किसी भी अन्य तरह के अपराधी पैसे के बल पर कानून से नहीं भाग पाएंगे | इसके लिए एक प्रभावी भ्रष्टाचार निवारण तंत्र की जरूरत है जो हर रोज़ सरकारी नौकरों एवं जन-प्रतिनिधियों के क्रिया-कलापों की देख-रेख करे |  इसमे गैर सरकारी संगठनों की मदद ले सकते हैं और सरकार को इसके लिए बजट में धन का प्रावधान करना चाहिए |  

गैर सरकारी संस्थाओं को भ्रष्टाचार के नियंत्रण में प्रयोग कर आम  जनता  की  शिकायतों पर इनके माध्यम से स्टिंग ऑपरेशन करा सरकारी नौकरों (मंत्री से लेकर संत्री तक) को आसानी से रंगे हाथों पकड़ा जा सकता है |  भ्रष्टाचारियों को पकड़ने के लिए स्टिंग ऑपरेशन हर रोज़ हर स्तर (ब्लाक, तहसील एवं जिला) पर करना चाहिए |  लेकिन नियम यह होना चाहिए की रंगे हाथ पकड़े गए लोगों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ना है और उनको उनके अंजाम तक पंहुचा कर ही दम लेना है | यदि पकड़ा गया व्यक्ति सरकारी नौकर है और वह एक पैसे के भी हेरा-फेरी या रिश्वतखोरी में पकड़ा जाता है तो उस पर बिना तरस खाए उसे नौकरी से हटाकर बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए |  नौकरी से बर्खास्तगी के आलावा अपराध की गंभीरता के आधार पर अर्थदंड के साथ-साथ जेल की सजा का भी प्रावधान होना चाहिए | एक नियम बनाकर जिलाधिकारी पर भी इसकी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और उसे भी दंड का भागी बनाया जाना चाहिए यदि जांच में यह पाया जाय की भ्रष्ट सरकारी नौकर उसके जिले में कार्यरत है और अपराध की गंभीरता  एक तय सीमा से ज्यादा  है |  सजा के तौर पर सिर्फ तबादला या निलंबन ही भ्रष्टाचार की समस्या को हल नहीं कर सकता | हमारे समाज से भ्रष्टाचार की बुराई को दूर करने के लिए कुछ कठोर कार्रवाई की जरूरत है |  यहाँ तक की गंभीर से गंभीर मामलों में भी जिलाधिकारी का सिर्फ तबादला ही होता है जबकि उसे नौकरी से तत्काल बर्खास्त कर देना चाहिए यदि वह भ्रष्टाचार में परोक्ष या अपरोक्ष रूप से लिप्त या उसे रोकने में असमर्थ  पाया जाता है तो |

भ्रष्टाचार के खिलाफ  किसी भी तरह के मुकद्दमे के त्वरित निपटारे के लिए विशेष न्यायालयों का गठन बहुत जरूरी है जो सिर्फ व सिर्फ भ्रष्टाचार के मामलों पर ही सुनवाई करें |  यदि मुकद्दमे का  निपटारा ३-६ महीने के अन्दर किसी भी कीमत में हो जाय और दोषी को सजा मिल जाय तो यह एक बहुत ही प्रभावी कदम होगा और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में बहुत सहायक भी सिद्ध होगा | हो सकता है की भ्रष्टाचार के मामलों को रफा-दफा करने के लिए जन-प्रतिनिधियों, नेताओं  या उपरी स्तर  के सरकारी नौकरों, जिनका की इन मामलों से सम्बन्ध हो, के द्वारा जांच आयोग या न्यायालयों पर दबाव बनाया जाय | इसके लिए हम निगरानी तंत्र का इस्तेमाल कर सकते हैं जो इन सफेदपोशों की करनी को रिकार्ड कर इनका भंडाफोर   करे और इन्हें भी सजा दिलाये | गैर सरकारी संगठनों के साथ मिलकर इलेक्ट्रानिक तकनीक के माध्यम से एक प्रभावी निगरानी तंत्र विकशित किया जा सकता है जो इन सफेदपोशों को सजा दिलाने में कामयाब हो सके |  जनपदीय स्तर पर  हुए भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में जिलाधिकारी को यदि सीधे तौर पर उत्तरदाई बनाये जाये तो वह भी जिला स्तर पर भ्रष्टाचार को रोकने के लिए निश्चित तौर पर कुछ कारगर कदम उठा सकता है|  यदि किसी जिले में भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी का कोई गंभीर मामला उठता है तो जिलाधिकारी का निलंबन कर जांच आयोग  के माध्यम से जांच कराई जाय और जिलाधिकारी द्वारा इसे रोकने में कोई चूक पाई जाती है तो उसे त्याग पत्र देने को कहा जाय या नहीं तो उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाय |  स्थानांतरण या निलंबन जैसी सजा से भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगाया जा सकता क्योंकि यह अब सरकारी नौकरों के जीवन का हिस्सा बन चुका है और इससे उन्हें थोड़ा भी डर नहीं लगता |

लेखक अपने एक अमेरिकी दोस्त से बात-चित  के दौरान पाया की यदि अमेरिका में कोई पुलिस अधिकारी  रिश्वतखोरी में लिप्त पाया जाता है तो विभाग के तरफ से उसे नौकरी से तुरंत बर्खास्त कर दिया जाता है और इसके साथ की उसको सरकार के तरफ से मिलने वाली अन्य सुविधाएं जैसे पेंशन, लाभ-भत्ता इत्यादि जब्त कर ली जाती है | इसके अलावा यदि भुक्तभोगी नागरिक या कोई अन्य उस पुलिस अधिकारी के खिलाफ न्यायलय में मुकद्दमा करता  है तो अधिकारी भिखारी भी बन सकता है क्योंकि न्यायालय उसे जेल की सजा सुनाने के  अलावा  रिश्वत के वजह से हुए नुकसान के अनुसार भारी मात्रा में अर्थदंड भी दे सकता है |  अर्थदंड वसूलने के लिए उसके जीवन की सारी कमाई और सम्पति जब्त करने का भी प्रावधान है | इस तरह से रिश्वतखोर कंगाल हो सड़क पर आ जाता है और उसे अपनी जिंदगी पुनः नए सिरे  से शुरू करनी पड़ती है | अतः अमेरिका में किसी पुलिस अधिकारी की कभी हिम्मत नहीं होती की रिश्वत के बारे में सोचे या मांगे और पैसे के लालच की वजह से नियम-कानून को तोड़े | इस तरह के कठोर सजा का प्रावधान ही उसे एक ईमानदार नागरिक बनाकर रखने में कामयाब है |

भ्रष्टाचार रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को यह अनिवार्य कर देना चाहिए की प्रदेश के हर एक सरकारी  नौकर (संत्री से लेकर मंत्री तक) एवं उसके परिवार के सदस्यों  के बैंक खातों एवं चल-अचल सम्पति की हिसाब-किताब का जाँच हर साल एक लेखा-परीक्षक के माध्यम से हो | यदि जांच में यह पाया जाय की किसी सरकारी नौकर की सम्पति उसके आय से कमाए हुए सम्पति से ज्यादा है तो उसे किसी भी हाल में बिना सजा दिलाये न छोड़ा जाय और उसे सरकारी नौकरी से तो बर्खास्त ही कर दिया जाय क्योंकि प्रदेश में प्रजा-तन्त्र सही माईने में तभी लागू  होगा जब उसको चलाने वाले ईमानदार हों |  इसके अलावा एक भ्रष्ट-मुक्त समाज का निर्माण करने के लिए एह सुनिश्चित करने की अति-आवश्यकता है की हमारी नयी पीढ़ी नेक एवं इमानदार हो और यह हम उन्हें प्राईमरी स्कूल से ही नैतिकता का पाठ पढ़ाने एवं हर रोज़ इमानदार नागरिक बनने का सपथ दिलाने की नयी व्यवस्था लागू कर  प्राप्त कर सकते हैं |

Nowadays our Country is struggling with problem of corruption which has affected law and order, judiciary and development and is in the process of paralyzing them. Because of distress and our society becoming uncivilized, the SC has commented that every one is looting our country India and we need some stringent laws to make people more civilized. It even went a step further and proposed for uncivilized law (hanging in lamppost) to check the corruptions. I believe they are not wrong on assessing the situation of country on corruption. There is something alarming which compelled SC to comment like this. 

Corruption is one of the biggest problems in UP that don’t make development visible. It has become part of life of every UPaite. They think this is necessary for the progress. Takers think this is very much important to live life king size and givers think this is must to get their work done. This way even an illegal work becomes legal. Each and every person of government department knows that but nothing works in controlling this. Author’s research shows the situation is so worse that if a person doesn’t have a job where he/she can’t get any bribe, his/her job would be no longer respectable. People have forgotten the phrase, “honesty is the best policy”. Everyone needs money to live beautiful life but this is not the way to get that. This impacts the development and also involves the exploitation of the needy people. Students of Indian Institute of Technology, Kanpur complained to the President of India about the corruption in getting a passport, which has so rooted in the police department that even it doesn’t spare the students too, who are the future of our state and country. It is untrue that this is unknown to the police officers but they don’t want to stop because their one of the source of incomes may be snatched away. There are several plans government offers to the villagers but are they really implemented with 100% going out to them? Also, there are government programs like Kanya Dhan Yojana, Indira Awas Vikas Yojana, Unemployment Allowances etc., but are they really effective? Author observed, no.  

Author made a comprehensive survey on these programs and his observations were that the selected candidates for any program were happy to share half the money as gift to government officials for making them into the awardees list. This is because they say it is free money and getting it without any hard work so what is wrong in sharing it. Head of Village (Gram Pradhan) collects about half the money of the benefits from each candidate and distributes it to the government officials from bottom to top in hierarchy. Officials are happy because they are getting butter (malai), apart from salary and other benefits, too. But does there anyone who truly thinks that how the hard earned money of tax payers getting looted? Government must be responsible in ensuring that each and every penny of tax payers goes to the needy and not shared among the corrupt government officials, otherwise it would be injustice to taxpayers. To ensure this, we may need effective anti-corruption system that every day monitors the day to day activities of government officials and elected representatives. Non-Government Organizations (NGO) can play a great role in this and government may need to assign budgets for this purpose.

There are many government institutions that are mainly established to look into corruption cases but they aren’t yet so effective since corruption is there too. The NGO can be involved in controlling the corruption by help of their sting operations based on public complaints, and net the officials red-handed. These operations should take place every day at every level viz. Village, Block, Tehasil and District. But the rule should be not to spare any individual, if he/she is caught red-handed, on any cost. He/she should be asked to resign from the job without any mercy, even if he/she caught for taking a single penny or small amount. With the dismissal from the job and imprisonment, a penalty can also be fixed based on the seriousness of the corruption. A DM can also be fixed responsible and punished for such corruption when it’s found that the government official involved in corruption is state government employee worked under his/her district and amount involved in corruption is more than certain limit. Only transfer or suspension could not solve this problem. This may need some stern action to remove the evil of corruption from our society. Even the DMs in serious cases are just getting the transfer as punishment, but they should be dismissed from duty immediately, if they are either found involved or unable to check the corruption.

There is need of inquiry commission at every level of state machinery to monitor the act of elected public representatives, ministers, bureaucrats etc. The levels may consist but not limited to Village, Block, Taluk, District, Headquarter of Districts and State. The commission may be formed with honest judges, public representatives and government officials. The commission at a particular level will have authority to hear the plea and complaints only about Lok-Sevaks at that level and empowered with suspension and dismissal of an officer at that level. For example, the commission at district level may work on complaints at district level officers, say DM and/or SP, and based on the findings in inquiry, it may suspend or even dismiss the DM or SP. There are many such commissions at state level, but they are either ineffective in taking action against powerful bureaucrats/ministers or out of reach of the poor public. We have seen at several occasions that even the court orders are being violated by top level bureaucrats in UP.

Special courts only to deal the cases of corruption could also be set-up to help finish such case with fast-pace. There may be occasions in such cases where elected representatives or lok-sevaks at top level constitutional positions may pressurize authorities to spare the corrupted individuals because of their link to them, but in doing so they may also need to be exposed and punished. The NGO can play here role also in trapping them and disclosing the telephonic conversations related with the case. Making a DM accountable for serious corruption cases at district level, may pressurize him/her to check the corruption at the district level. For a serious corruption case in district, an inquiry can be ordered after DM’s suspension and if found lapses on his/her part, he/she must be asked to resign or otherwise dismissed. Transfers or suspensions are not going to solve the corruption problem since they have become part of life of government officials, and not the punishments anymore. 

Author had a discussion with one of his US friends on corruption and his friend informed him that if a police officer in US is found indulged in corruption, he will loose his/her job without any mercy shown to him/her and with that he/she will loose all the government benefits too. Guess what, if he/she is being sued, he/she might land into begging since he/she could be ordered to pay the penalties and losses due to corruption to plaintiff from his/her savings. He/she would become bankrupt. Based on the level of corruption, he/she may be jailed too. Now you can imagine why a police officer in US can’t dare to break the law & order for a bribe. 

Also, government must make it compulsory to audit the bank accounts and properties of government servants and elected members including their family members every year to check the corruption. If their earnings found more than their sources of incomes, they must not be let go Scot free in any circumstances. Also, to develop a corruption free society, we need to ensure our new generations are honest and we may do so by initiating a process of taking oath of honesty from schooling. But after all, all these need people to unite together to vote for the right candidates and elect the dutiful representatives.

Please see below for reports on corruption in India:

  1. Ballia 42
  2. 41
  3. 40
  4. 39
  5. 38
  6. 37
  7. RichnessOfPoliticians – 36
  8. 35
  9. Shabash Shanti Bhushan – 34
  10. 33
  11. 32
  12. Officers eat “Pustahaar” in commission
  13. 81% NRIs paid bribes
  14. Mayawati’s Assets
  15. 3 Crores in 36 hours
  16. Supreme Court’s Notice
  17. 36% Indians bribed judiciary in 2006
  18. Corruption on rise in India
  19. Only 1% public of UP trust Police 
  20. Only raids will not solve the problem of Corruption
  21. 9
  22. 10
  23. 11
  24. 12
  25. 13
  26. 14
  27. 15
  28. 16
  29. 17
  30. 18
  31. 19
  32. 20
  33. PM Asks to Declare Assets
  34. It is shame for us
  35. Indians are Most Undemocratic
  36. 21
  37. 22
  38. 23
  39. 24
  40. 25
  41. 26
  42. 27
  43. 28
  44. 29
  45. 30
  46. 31
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2 Responses to “भ्रष्टाचार – On “Corruption” – by Dr. Vinaya K. Singh, Ph.D.”

  1. Some part of my Speeches Delivered at Various Public Gathering Organized by Bhrastachar Mitao Sena « How to transform Uttar Pradesh (UP) into Uttam Pradesh (Best State) Says:

    […] On “Corruption” – by Dr. Vinaya K. Singh, Ph.D. […]

  2. My Visit to India – A Report « How to transform Uttar Pradesh (UP) into Uttam Pradesh (Best State) Says:

    […] On “Corruption” – by Dr. Vinaya K. Singh, Ph.D. […]

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