सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ एवं भत्ते – On “Employee Benefits” – by Dr. Vinaya K. Singh, Ph.D.

हमारे शोध के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों में कार्य-संस्कृति का अभाव है | अधिकांशतः   कर्मचारी बिना मन के काम करते हैं और यदि घूस न मिले या ऊपर से दबाव न पड़े तो वे अपने मन से सरकारी कार्य  करने में रूचि ही नहीं रखते हैं |  बहुत सारे कर्मचारी अपना निजी व्यवसाय खोले हुए हैं और सरकारी नौकरी उनके लिए केवल समय बिताने का एक साधन मात्र है, न की दायित्वों को निभाने का| चूँकि सरकारी नौकरी में गए लोगों को नौकरी से हटाना एक टेढ़ी खीर है, अतः इन्हें किसी भी तरह का भय नहीं सताता |  सरकारी संगठनों/विभागों का यह कर्त्तव्य बनता है की वे कार्य करने के लिए ऐसा वातावरण  प्रदान   करें जिससे की सरकारी कर्मचारियों में एक कार्य-संस्कृति पैदा हो और कार्य करने के प्रति उनमें रुझान हो |  प्रत्येक सरकारी कर्मचारी को  प्रेरित  करने  की जरूरत है जिससे की वे बिना किसी आलसपन के सरकारी कामों का निपटारा दायित्व-पूर्ण तरीके से एवं बिना किसी त्रुटी के गुणवत्ता-पूर्वक करें |  लेखक के सामने बहुत सारे मामले प्रकाश में आये जहाँ उत्तर प्रदेश की आम जनता सरकारी कर्मचारयों के पास काम लेकर तो गयी लेकिन  कर्मचारी काम को टरकाने के लिए बहुत सारे बहाने बनाए और बिना कुछ किये उन्हें चलता किया | कर्मचारियों में काम करने की मंशा उन्हें एक अच्छा प्रशिक्षण, प्रोत्साहन, सम्मान एवं अच्छे की पहचान देकर कर सकते हैं |

कर्मचारियों को सरकार की तरफ से मिलने वाले लाभ एवं भत्ते भी एक बड़ी भूमिका निभाते हैं |  जैसा की हम निजी संस्थाओं के कर्मचारियों में देखते हैं की वे किस तरह से संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अपने आप को प्रेरित रखते हुए संस्था को समर्पित कर देते हैं, वैसा हमने उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों में कभी नहीं देखा |  यह निजी संस्थाओं में बनाये गए कार्य संस्कृति के वजह से होता है और वैसा ही कार्य-संकृति हमें उत्तर प्रदेश के हर सरकारी संगठनों/विभागों  में अपनाने  की जरूरत है |  एक समिति बनाकर निजी संस्थाओं में कार्य करने के वातावरण एवं संस्कृति का मूल्यांकन कर उनमें से अच्छी बातों का उपयोग कर हर सरकारी विभागों में उसका क्रियान्वयन करना चाहिए |  कर्मचारियों के बुनियादी संवर्धन कार्यक्रम के अंतर्गत उन्हें अच्छा प्रशिक्षण एवं उनके कैरियर के निर्माण के लिए अधिक अवसर प्रदान कर सकते हैं |  इसके अलावा प्रत्येक कर्मचारी को इसका प्रशिक्षण देना चाहिए की वह किस तरह से आम जनता को गुणवत्ता-पूर्ण सेवा प्रदान कर सकता है और अपनी जिम्मेदारियों  को समझते हुए इमानदारी  पूर्वक  काम एवं सरकार द्वार बनाये हुए ‘आचार संहिता’  का पालन करे |  प्रत्येक विभाग के पास इसके कर्मचारियों के लिए एक औपचारिक रूप से ‘आचार संहिता’   पर नियम-कानून होना चाहिए और प्रत्येक कर्मचारी को इसकी समझ होनी चाहिए  तथा प्रत्येक वर्ष कर्मचारियों से इसे पालन करने के सपथ के साथ उनका इस पर अमल करने के लिए दस्तख्वत लेना चाहिए |  आचार संहिता को अच्छी प्रकार से लागू करने तथा निगरानी करने के लिए एक समिति बना सकते हैं और इसके पास आचार संहिता का उल्लंघन करने वालो के खिलाफ कार्रवाई कर सजा देने का अधिकार होना चाहिए |  

सरकारी विभागों को एक कर्मचारी के द्वारा किये गए कार्य को मापने के लिए कार्य-प्रदर्शन पर आधारित माप-तंत्र विकशित करनी चाहिए और  इस आधार पर हर कर्मचारी की त्रैमासिक माप कर उनके प्रदर्शन के मुताबिक़ अतिरक्ति लाभ, भत्ता  एवं पुरस्कार की संतुति करनी चाहिए |  इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों  में एक प्रदर्शन पर आधारित पैकेज/लाभ का प्रचलन करना चाहिए जो की  कर्मचारियों को पदोन्नति, अतिरिक्त वेतन वृद्धि,  बोनस, उच्च शिक्षा के लिए मौक़ा या कैरियर बनाने के लिए प्रशिक्षण  आदि के रूप में दिया जा सकता है | उच्च कार्यशीलता का प्रदर्शन करने वाले को पहचान के साथ पुरस्कृति करना चाहिए |  कम कार्यशीलता का प्रदर्शन करने वाले को बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए |  जो भी सरकारी कर्मचारी केवल समय बीताने के  लिए कार्यालय आते हैं उनकी पहचान एवं उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई  कर उन्हें काम से जल्द से जल्द निकाल देना चाहिए |  यदि संभव हो तो कार्य के प्रति उदासीन रहने,  कम कार्यशीलता का प्रदर्शन करने, एवं आम जनता  की सेवा में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों को गोल्डेन हैण्ड-शेक  योजना  के अंतर्गत सरकारी नौकरी छोड़ने की पेशकश की जा सकती है | 

सरकार का यह कर्त्तव्य बनता है की सरकारी कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए कुछ करे ताकि  सरकारी  कर्मचारी  उत्तर प्रदेश के नागरिकों को उच्च कोटि की सेवा प्रदान कर सकें |  एक कर्मचारी का मनोबल निम्न बिन्दुयों पर निर्भर करता है: 

  • कर्मचारी के साथ बुरा व्यवहार या उसका अपमान: किसी कर्मचारी के साथ बुरा व्यवहार या उसका अपमान, उसके मनोबल को गिराता है | कभी-कभी किसी कर्मचारी का बॉस कर्मचारी की रोज़-रोज़ की गलतियों  या किसी अन्य चीज़ के कारण उसे पसंद नहीं करता है |  ऐसी परिस्थियों में कर्मचारी अपने बॉस का कोपभाजन बनता है और बॉस के द्वारा समय-समय पर अपमानित होता रहता है | बॉस को चाहिए की वह इस तरह के रवैये से बचे और अपने अधीनस्थ कर्मचारी को उसकी गलती सुधारने का मौका दे |
  • पहचान: किसी भी कर्मचारी द्वारा आम जनता को उच्च सेवा प्रदान करने तथा कठिन परिश्रम के लिए उसे पहचाना एवं पुरस्कृति किया जाना चाहिए |  कभी-कभी किसी कर्मचारी के कठिन परिश्रम एवं गुणवत्ता पूर्वक प्रदान किया हुआ सेवा पर बॉस के द्वारा ध्यान न दिए जाने एवं कर्मचारी को उचित सम्मान तथा पहचान न मिलने के कारण उसके मनोबल पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है | बॉस को यह सुनिश्चित करना चाहिए की किसी भी कर्मचारी के साथ अन्याय और उसके लायकपन  की अनदेखी न हो |  इसके साथ ही बहुत ही लायक कर्मचारी को उसके कैरियर को आगे बढ़ाने के लिए अवसर भी प्रदान करना चाहिए |
  • भेदभाव: उत्तर प्रदेश में बहुत सारे ऐसे मामले  देखने को मिले हैं जहाँ यदि कोई कर्मचारी अपने बॉस का चमचा है तो वह दूसरे कर्मचारियों के सापेक्ष नाकाबिल होते हुए भी उसे पहचान एवं पुरस्कार मिलता है  | यह अन्य कर्मचारियों में अपना सर्वश्रेष्ट ने देने की प्रवृत्ति उत्पन्न करता है और इसके साथ ही उनके मनोबल को भी गिराता है |  कहीं-कहीं बॉस के द्वारा कर्मचारियों के पृष्ठभूमि के ऊपर भी भेदभाव किया जाता जो मनोबल पर बुरा असर डालने का एक और कारण है|  किसी भी कीमत पर सरकारी विभागों से भेदभाव को मिटाना चाहिए जिससे की एक स्वस्थ कार्य-संस्कृति का जन्म हो सके |

यदि कर्मचारियों का मनोबल ऊँचा है तो वे निश्चित तौर पर सरकारी विभाग के आचार संहिता का पालन करने के लिए प्रेरित रहेंगे और उत्तर प्रदेश की आम जनता को एक उच्च  कोटि की सेवा प्रदान करने की चेष्ठा करेंगे |  उच्च कोटि की सेवा में निम्न बिन्दुएँ शामिल है: आम जनता के लिए सम्मान, जनता की शिकायत का एक निर्धारित समय-सीमा में निस्तारण करना,  शिकायत प्रगति पर जनता से संवाद कायम रखना, जनता के रिकार्ड को सहेज कर रखना ताकि काम पड़ने पर आसानी से उपलब्ध हो सके, काम के लिए रिश्वत की अपेक्षा न करना आदि |  सेवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए निम्न बिन्दुओं  पर विचार किया जा सकता है:

  • मनोबल: यह सुनिश्चित करें की एक कर्मचारी का मनोबल हमेशा ही उंचा रहे |
  • समय: किसी भी काम के लिए एक सही समय-सीमा निर्धारित करें और काम न होने पर जुर्माना या सजा का प्रावधान करें |
  • प्रेरणा: कर्मचारी को हमेशा उच्च सेवा प्रदान करने के वास्ते मूल्यों को पालन करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए |
  • इनाम:  उच्च सेवा प्रदान करने वाले को हमेशा पुरस्कृति  किया जाना चाहिए |

 

Our research shows that government employees in UP don’t have a work culture. Most of them do their duty forcibly but not by their own. Also, many of them operate their own private businesses, thus the government service for them is just a part time job, and so don’t show their interest in doing the government work. The duty of the government organizations is to provide a working environment and create work culture in government employees. Each employee should be motivated to do his/her job responsibly without showing laziness and provide quality services to the public of UP. There were cases reported to author, where customers approach to government employees to get their works done, but the employees didn’t entertain customers seriously and make excuses to avoid the work. Motivations to work can be created by enriching and recognizing the employees.  

 Employee benefits also play a great role in development of a state. As we see, how the employees of privately owned organizations are devoted and motivated to work to meet the goal of their respective organizations. The same culture needs to be adopted in government institutions too. A committee can be formed to evaluate the work environment and cultures of privately owned organizations and use the good things out of that for implementation in the government organizations. Basic enrichment program for the employees could be trainings and opportunities for building their career. Also, each employee needs to be trained on how to provide quality service to public, what his/her responsibilities are and how to maintain the integrity towards his/her organization. Each department should have a formalized ‘code of conduct’ for its employees and each and every employee of the department should be encouraged to follow the ‘code of conduct’. A committee can be formed to monitor and enforce the code of conduct and may have authority to take action against the violators. 

Government institutions need to develop performance based metrics to measure the performance of an employee on quarterly basis for recommendation of the additional benefits and rewards. Also, a performance based package/benefits needs to be evolved for the government employees and could be paid in form of promotions, additional increments, bonuses, higher educations, trainings etc. The high performer must be recognized and rewarded. Low performer should be shown the door. Employee who is there only for time-pass must be identified and should be asked to go. If possible, very low performers and employees careless in serving the public can be offered the golden hand shake scheme to leave the organizations.

Government’s duty is to make sure that morale of employees are high so that they could provide the quality services to citizens of UP. The morale of an employee depends upon following variables:  

  1. Ill treatment/Humiliation: Ill treatment or humiliation of an employee results into low morale. Sometimes boss of a department doesn’t like an employee because of his/her regular mistakes or errors in his/her work or due to some other reasons. This might cause humiliation of an employee by his/her boss. The boss attitude should be to avoid such practice and encourage the employee to recover from his/her drawbacks.
  2. Recognition: Work of an employee should be properly recognized and should be rewarded for his quality and hard work. Sometimes an employee’s hard work gets ignored and he doesn’t get the reward as his deserved and this may result into lowering the morale. Boss should ensure that injustice isn’t met with am employee. Also well deserved candidates should be offered opportunities for the career growth.
  3. Discriminations: It has been seen in many cases that an employee who is closer to boss gets recognized even if he/she is far more inferior in abilities than other employees. This creates a tendency in other employees not to give their best and lowers their morale. Discrimination based on employees’ background may also result in lowering the morale. Discrimination must be avoided at any cost.
  4. Lay-offs: Lay-offs basically occurs in developed country but this is not an adapted practice in government of UP. So there is no point to discuss this, but it may cause lowering the morale of an employee, if he/she has a fear of laying-off any time because of government inability of paying the salaries.

If morale of employees are high, they could certainly be motivated to follow the code of conduct of department and deliver the quality services to the public of UP. The quality service to public of UP may include but not limited to: respect to public, handling the complaint in specified time, proper communication, handy records, not expecting anything for the service etc. To improve the quality of service, one can think of following points: 

  1. Morale: Make sure that morale of an employee is high.
  2. Time: Assign right amount of time to a task.
  3. Motivation: Motivate constantly to follow the standards to deliver the quality work.
  4. Reward: Reward those who deliver the quality work.

 

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One Response to “सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ एवं भत्ते – On “Employee Benefits” – by Dr. Vinaya K. Singh, Ph.D.”

  1. S. N. Singh Welfare & Education Society and its Mission « How to transform Uttar Pradesh (UP) into Uttam Pradesh (Best State) Says:

    […] On “Employee Benefits” – by Dr. Vinaya K. Singh […]

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