मुझे निकट भविष्य में कांग्रेस पार्टी के समक्ष किसी अन्य पार्टी द्वारा कोई चुनौती या खतरा दिखाई नहीं देता – I don’t see any challenge to Congress Party in near future

मैं कांग्रेस पार्टी के लिए निकट भविष्य में किसी भी अन्य राजनीतिक दलों द्वारा कोई भी चुनौती या खतरा   नहीं देखता, कम से कम  केंद्र में तो नहीं | बहुत ही धूमिल संभावना है कि केंद्र में किसी भी गैर-कांग्रेस पार्टी के सरकार का गठन हो, चाहे केंद्र में मौजूदा कांग्रेस पार्टी की सरकार देश के लिए अच्छा करे या बुरा | इसके बहुत सारे कारण हैं | पहला कारण यह है की भाजपा कभी भी अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती जब तक की यह  अल्पसंख्यक समुदाय को विश्वास में लेने में सक्षम नहीं हो जाती | हिंदू धर्म सहिष्णुता का पर्याय है और हिन्दू कभी भी एकत्र होकर विशुद्ध रूप से धर्म के आधार पर एक पार्टी के लिए मतदान नहीं कर सकते |  अगर भाजपा किसी भी तरह से बहुमत स्तर तक पहुँचने में सक्षम हो भी जाती है तो तथाकथित  धर्मनिरपेक्ष दल एकजुट होकर पूरी कोशिश करेंगें  की भाजपा की सरकार न बने, बल्कि इसके बदले वे कांग्रेस पार्टी का समर्थन कर केंद्र में कांग्रेस का सरकार बना सकती है | मुझे नहीं लगता की  तीसरे / चौथे मोर्चे का कोई भी भविष्य है, या यह कभी भाजपा या कांग्रेस के समर्थन के बिना सरकार बना सके | अगर किसी तरह से तीसरा मोर्चा सरकार बनाने में सक्षम हो भी जाता है तो प्रधानमंत्री पद के हजारों दावेदारी और अन्य दूसरों के महत्वाकांक्षाओं और लोभ के कारण वे एक दूसरे का खींच-तान करते रहेंगें और इस प्रकार सरकार लंबे समय तक नहीं चल पायेगी | हमने केंद्र में कुछ समय के लिए  इस तरह के परिदृश्यों को देखा है और जनता को भी इसके बारे में पूरा पता है | 

मुझे यकीन नहीं होता की क्यों लोग प्रधानमंत्री या किसी भी मंत्रिस्तरीय पद को पाने लिए इतना पागल हो जा रहे हैं? मेरे विचार के अनुसार, एक लोकतंत्र में ‘मंत्री’ शब्द एक देश के लोक-सेवक/सरकारी नौकर  के रूप में परिभाषित किया जाना चाहिए और उनका मालिक आम जनता, जो देश के कानून के अक्षरशः पालन करता है और सरकारी पद पर नहीं है, होना चाहिए | अगर लोगों को यह समझ आ जाये की तो वे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या लोक सेवक के पद को भाव देना कम कर देंगें  और इस तरह से  कुछ हद तक भ्रष्टाचार को कम किया जा सकता है | बहुत सारे चयनीत सदस्यों और मंत्रियों को यह लगता है की उनका स्थान सम्मानीय एवं अन्यों से ऊपर है, न की  एक नौकर का, और हमें इस मनः स्थिति को बदलने की जरूरत है | यह ब्रिटिश या राजाओं-महाराजाओं का युग नहीं है, बल्कि एक लोकतंत्र का समय है जहां आम जनता का स्थान इन लोक सेवकों से उच्च है | हमें इस आशय पर काम करने की जरूरत है और लोगों को उनके अधिकार और कर्तव्य को समझाना है ताकि इस हक़ को पाने के लिए लड़ाई लड़ सकें | भारत में कई सांसद और विधायक ऐसे हैं जो या तो अमीर, बाहुबली या दोनों हैं और अगर आप उनसे लोक-सेवक के रूप में सलूक करें तो वे बिदक जाते हैं |  वे इस लोक-तंत्र में भी अपने को सामंती युग के शासक के रूप में देखते हैं  तथा अपने को कानून से ऊपर समझते  हैं, और यही कारण है कि वे किसी भी कीमत पर एक सांसद या विधायक बनना चाहते हैं | 

मैं आपको एक गरीब किसान की एक कहानी सुनाता हूँ | उसका पुत्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना चाहता था लेकिन वह अमेरिकी वीजा प्राप्त करने में असमर्थ था |  किसी ने उनसे मदद के लिए केंद्र में कैबिनेट मंत्री से संपर्क करने का सुझाव दिया |  जब वह कैबिनेट मंत्री के घर पहुंचा तो मंत्री के सचिवों ने मंत्री के साथ मुलाकात का समय मांगने पर उसे सहयोग नहीं किया | वे उसे मंत्री से मिलाने  के लिए कुछ पैसे चाहते  थे |  किसी तरह वह अपने स्थानीय सांसद की मदद से वह मंत्री से मुलाकात कर सका | मंत्री ने उससे कहा की उसके सचिव को सारे दस्तावेज उपलब्ध करा दे और उस किसान को बताया गया कि कुछ दिन के बाद वीजा देने के लिए अमेरिकन एमबेसी को लिखा गया एक सिफारिश पत्र उसे भेज दिया जायेगा | किसान सारी औपचारिकताओं को पूरा कर अपने गृहनगर चला गया |  वह कुछ महीनों तक इंतजार किया लेकिन उसे मंत्री के कार्यालय से कोई पत्र नहीं मिला |  उसने पुनः मंत्री से मिलने के लिए दिल्ली का दो-तीन बार दौरा किया लेकिन मंत्री के सचिवों ने उसे यह कहकर खाली हाथ लौटा दिया की वे उसके प्रार्थना पत्र पर गौर फरमा  रहे हैं |  वे उसे विभिन्न बहाने जैसे मंत्री जी बहुत व्यस्त है, वह अनुपलब्ध है, या वह स्टेशन के बाहर है, कर  उसे मंत्री से मिलने के लिए अनुमति नहीं देते थे | किसान के लिए दिल्ली में कई दिनों तक ठहराना मुमकिन नहीं था या इस काम के लिए दिल्ली का  कई बार दौरा  करना भी संभव नहीं था | किसी तरह वह मंत्री का टेलीफोन नंबर प्राप्त करने में कामयाब हो गया और उसने सोचा कि उसके अनुरोध की स्थिति के बारे में जानने के लिए गाँव से  ही मंत्री को फोन के माध्यम से संपर्क करना दिल्ली आने-जाने से  बेहतर होगा | 

क्या आपको लगता है कि अगर आप मंत्री से बात करने के लिए टेलीफोन कॉल करने का प्रयास करें तो कोई मंत्री  आपके फोन का जवाब देगा ?  मुझे नहीं लगता कि यह कभी भारत में संभव होगा | अब देखिये की उस गरीब किसान के साथ  क्या हुआ | जब उसने मंत्री के घर को फोन लगाया तो कोई फोन नहीं उठाया | कई दिन कई बार कोशिश करने के बाद एक बार मंत्री के सचिव ने फोन उठाया | उसके बाद क्या हुआ, सचिव ने कहा कि वह  उसके अनुरोध के बारे में कुछ नहीं जनता है | अब बेचारा किसान क्या कर सकता था | उसने सचिव से अनुरोध किया की मंत्री को फोन पर बुला दे | लेकिन क्या आपको पता है की सचिव को यह प्रशिक्षण दिया जाता है की वह एक मंत्री को भगवान की तरह माने  और जब कोई बात करना चाहे तो एक ऐसा परिदृश्य बनाये जैसा कि मंत्री अभी बहुत व्यस्त है और वह फोन पर नहीं आ सकता | सचिव किसान से बहाने बनाना  शुरू कर देता था की  या तो मंत्री अभी बाथरूम में है, तो बैठक में है, तो वह कार्यालय में है, तो वह बेडरूम में सो रहा है इत्यादि, और वह फोन पर नहीं आ सकता | जब उसके स्थानीय सांसद ने गांव से मंत्री से फोन पर बात करने की कोशिश की तो उसके साथ भी यही हाल हुआ |  अंत में उसके प्रार्थना पत्र पर कोई कार्रवाही नहीं हो सका और उसका बेटा उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका नहीं जा सका | क्या आपको लगता है कि एक लोकतंत्र में  ऐसा  होना चाहिए और एक आम आदमी को फोन पर मंत्री से बात करने की अनुमति न दी जाय ? यदि ऐसा है तो आधुनिक तकनीकों का उपयोग क्या है ? इन नयी तकनीकों के माध्यम से हम एक अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं और समय के साथ परिवहन में लगने वाले पैसे को भी बचा सकते है | मुझे लगता है कि मेरे तर्क से कई लोग सहमत होंगें |   यदि आप सहमत नहीं हैं तो आप कृपया मेरी वेबसाइट vinay1340.wordpress.com पर जाएँ जहाँ पर हम एक स्वस्थ बहस कर सकते हैं | 

अब हम केंद्रीय  सरकार के बारे में बात करते हैं | मेरा विश्लेषण है कि अब केंद्र में सरकार बहुत स्थिर है और अन्य क्षेत्रीय पार्टी क्षुद्र स्वार्थ के लिए सरकार को ब्लैकमेल नहीं कर सकती | आम जनता को इसी लाइन पर सोचना चाहिए और हमें लगता है की यह एक अच्छी शुरुआत है  | लेकिन हमें समय-समय पर केंद्र सरकार को बदलते रहना चाहिए| यह केंद्र सरकार से अच्छा काम करवाने के लिए आवश्यक है और इससे केंद्र की सरकार कभी अभिमानी नहीं होगी और उसको यह सबक भी मिलेगा की वह आम जमता का नौकर है | लेकिन कांग्रेस के अलावा  कोई और ऐसा राजनीतिक दल है जो भविष्य में केंद्र में सरकार बनाने में सक्षम हो जाएगा, कोई अनुमान ? यह तभी संभव हो सकता है अगर भाजपा कुछ नया प्रयोग करे या तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल कुछ आम सहमति के कार्यक्रम पर भाजपा का समर्थन करें |  यदि ऐसा होता है तो  यह एक चमत्कार होगा |  इस सबका निष्कर्ष यह है कि भाजपा को बहुसंख्य में अल्पसंख्यक समुदाय पसंद नहीं करता है और आम जनता को यह मालूम है की केवल कांग्रेस ही एक स्थिर सरकार दे सकती क्योंकि इसका नियंत्रण नेहरू परिवार के हाथ में है | नेहरू परिवार को इसके लिए  साधुवाद |  तीसरा मोर्चा कभी भी एक स्थिर सरकार प्रदान करने में सक्षम नहीं हो सकता है क्योंकि वहाँ उनके पास  अन्य  एजेंडों  के  साथ  प्रधान-मंत्री पद के कई दावेदार हैं जिससे सरकार की स्थिरता को खतरा हो सकता है | यदि किसी तरह ये तथाकथित धर्मनिरपेक्ष और क्षेत्रीय दल भाजपा के साथ काम कर कुछ साझा न्यूनतम कार्यक्रम पर चुनाव लड़ते हैं तो हो सकता है की केंद्र में सरकार परिवर्तन का मौका मिल सके | कांग्रेस की सरकार के जगह केंद्र में किसी और दूसरे दल का सरकार बनने पर आम जनता को इससे फायदा होगा और एक अच्छी सेवा प्रदान करने एवं स्वस्थ लोक-तंत्र के लिए यह जरूरी भी है | इससे यह यह साबित भी होगा कि आम जनता, जो की किसी सरकार का भाग नहीं है और देश के कानून का अक्षरशः पालन करती है वह  लोक सेवक, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री की तुलना में ज्यादा शक्तिशाली है |

I don’t see any challenges or danger for Congress party from any other political parties in near future, at least at center. There is very bleak possibility that any non-congress government could be formed at center irrespective of Congress government does good or bad for the country. There are several reasons for that. The first one is BJP can’t be able to form government on its own until it takes the minority in confidence. Hinduism is religion of tolerance and Hindus can’t be congregated and vote for a party purely on basis of religion. If somehow it’s able to reach near the majority level, the so called secular parties will do their best to refrain BJP to form the government and rather they could support Congress party to form the government. I don’t think, if there is any future for Third/Fourth Front or it can ever form any government without support of BJP or Congress. Even, if Third Front is able to form the government, this will not lost long due to tones of aspirants for the prime ministerial post. Due to ambitions and greediness, they start pulling the strings of each others and thus the government would not survive longer. We have seen such scenarios at center few times and public is also aware of this. 

I am not sure why people are so crazy for Prime Ministerial or any Ministerial post. As per my view, in a democracy, word ‘Minster’ should be defined as public servant of a country and his/her boss would be the non-government general public who follows the law of land. If people can understand this, they will stop giving importance to PM, CM, ministerial or Lok-Sevak posts and this way somewhat corruption could also be reduced. Most of elected members and ministers think it a position of status and respect, not as a servant, and where we need to make a change. This is not the era of British or Kings’ Rule but we are living in the age of democracy where status of general public is higher than these Lok-Sevaks. We have to work on this line and explain to our people to understand their rights and duty and fight for this. There are many MPs and MLAs in India who are either rich, Bahubalis or both and they would become so arrogant, if you treat them as public servant. They still think themselves as ruler and above the law, and for that reason they want to become an MP or MLA. 

I will tell you a story of a poor farmer. His son wanted to go abroad for higher studies but he was unable to get the US Visa. Someone suggested him to contact a cabinet minster in center for the help. When he visited at home of a cabinet minister at center, his secretaries were not so cooperative to make an appointment for him with the minister. They wanted some money for allowing him to meet the minister. Somehow, with help of his local MP, he met the minister. Minister asked him to provide some documentation to his secretaries and told to farmer that he might receive a recommendation for Visa in few days. The farmer completed the formalities and left for his hometown. He waited for couple of months but he didn’t receive any response from minister’s office. He made couple of visits to Delhi to meet the minster but the minster’s secretaries returned him empty handed saying they will look into it. They didn’t allow him to meet the minister stating various excuses such as he is very busy or he is unavailable or he is out of station. It was not possible for farmer to stay in Delhi for longer or make many trips to Delhi for this work. Somehow he got the telephone number of minister and he thought it would be better to make him call from his village to follow-up and know the status on his request. 

Do you think, if you try to make a telephone call and you can expect a cabinet minister to respond to your call? I don’t think it will ever happen in India. Just see what happened to the poor farmer. When he called the minster’s home, no one was picking up the phone. Somehow he was able to get hold of minister’s secretary. Then what, secretary told he didn’t have any idea about his request. Now what farmer should do? He requested secretary to get minster online. But you know what, secretary was trained to treat minister as “Lord” and created a scenario that minister is too busy and he can’t come online. The secretary started making excuses such as Minister is in bathroom, he is in meeting, he is in office, and he is in bedroom and so, and can’t be able to talk to him. Same thing happened when the local MP called to minister from his village. Finally nothing was done to his request and his son was not able to go abroad for study. Do you think, this should happen in a democracy and a general public should not be allowed to talk to a minister on phone? Then what is use of modern technologies. This is the way one can contact an official and save money and time in transportation. I think many would agree with my arguments. If not, you can please visit to my website at vinay1340.wordpress.com and we can have a healthy debate on this. 

Now let us talk about government at center. My analysis is that now the government at center is very stable and other regional party can’t blackmail the government for petty selfishness. Public should think on this line and this could be good thing to start. But need sometime change of guard at center is necessary to get good work from government and to avoid arrogancy and teach a lesson to a server. But other than Congress, which political party would be able to form government in future at center, any guesses. It could be possible if BJP can experiment something new or so called secular parities can support BJP on some common ground. If this happens, this would be a miracle. The conclusion of above all is that BJP is not liked by majority of minorities and now public understand that only Congress is able to provide a stable government since control of party is hands of Nehru’s Family. Thanks to Nehru family. The third front will never be able to provide a stable government because there are too many aspirants for the PM posts with too many agendas which go against it. If somehow these so called secular parties and regional parties can work with BJP and fight an election on some common minimum program, there could be a chance of change in guard at center. This will benefit the public of India to have different government at center alternatively for good governance and democracy to work. This will prove that a general public, not in government and who follows the law of land, is powerful than a Lok-Sevak, PM, CM or minister.

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