स्कूलों में भाषा नीति – On “Languages” – by Dr. Vinaya K. Singh, Ph.D.

 

उत्तर प्रदेश में भाषा को लेकर भी बहुत उधेड़-बुन चल रहा है और लेखक ने इस विषय पर भी कुछ प्रकाश  इस अध्याय में डाला है |   हिंदी, अभिव्यक्ति की एक महान भाषा है और सबको इसे सीखनी एवं इसकी इज्जत करनी चाहिए, लेकिन सिर्फ हिंदी ही एक उत्तर प्रदेश वासी की संपूर्ण विकाश के लिए सहायक नहीं है |  आजकल विश्व में एक नयी वैश्विक-ग्राम की अवधारणा   जन्म ले रही है | इसके अंतर्गत  पूरी दुनिया को एक बहुत बड़ा देश माना गया है और इस दुनिया के प्रत्येक देश को एक गाँव की संज्ञा दी गयी है |  इसलिए यह हम कह सकते हैं की विश्व की अर्थव्यवस्था और इसकी संस्कृति में सक्रिय योगदान के लिए सिर्फ हिंदी भाषा बोलना/लिखना/पढ़ना ही पर्याप्त नहीं होगी |  उदाहरण के रूप में भारत के विकाश एवं इसको एकजुट रखने के लिए हिंदी को राष्ट्रीय भाषा के तौर पर अपनाया गया था |  हिंदी को राष्ट्रीय भाषा का सम्मान इसलिए मिला क्योंकी इसे अधिसंख्य भारतीयों के द्वारा बोली व समझी जाती है |  उसी तरह से अंग्रेजी, विश्व समुदाय की बहुमत की भाषा है, न की हिंदी, और यदि हम अपना समृद्धि एवं प्रगति चाहते हैं तो  अंग्रजी को तहे दिल से गले लगाना  चाहिए |  अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है और इसे विश्व समुदाय की अधिकतर आबादी की तरफ से स्वीकार किया जा चुका है, अतः हम उत्तर प्रदेश वासी इस दुनिया का हिस्सा बनना चाहते हैं तो हमें अंग्रेजी भाषा को निश्चित तौर पर बेझिझक सीखनी और बोलनी चाहिए |

 

हम उत्तर प्रदेश वासियों को इस तथ्य को भली भांति समझ लेना चाहिए की सिर्फ उत्तर प्रदेश ही पूरा भारत या पूरी दुनिया नहीं है और हम उत्तर प्रदेश वासियों को उत्तर प्रदेश के बाहर भी अपनी और अधिक समृद्धि के लिए बहुत सारे अवसर मिल सकते हैं |  अंग्रेजी का ज्ञान उत्तर प्रदेश के बाहर काम करने में बहुत सहायक हो सकता है |  उत्तर प्रदेश में बहुत से लोग अंग्रेजी भाषा का विरोध करते हैं लेकिन अधिकांशतः उसमें वे लोग शामिल हैं जिनके परिवार के लोग कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़े हैं या जिन्हें अंग्रजी भाषा में दक्षता हासिल है |  उत्तर प्रदेश वासियों को ऐसे लोगों के झांसे में नहीं आना चाहिए |  उत्तर प्रदेश सरकार को सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों में अंग्रेजी भाषा को एक विषय के रूप में कक्षा -१ से ही अनिवार्य कर देनी चाहिए |  यह उत्तर प्रदेश के एक ग्रामीण को भी अंग्रेजी वालों को अंग्रेजी में, हिंदी वालों को हिंदी में और गाँव के स्थानीय भाषी को उनके ही भाषा में जवाब देने में सक्षम बनाएगा |  

 

यह बात साबित हो चुकी है की हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी का ज्ञान रखने  वाले  एक ग्रामीण को समृद्धि पाने के लिए उस उत्तर प्रदेश वासी से ज्यादा अवसर मिले हैं जिसे केवल हिंदी का ही ज्ञान है | इन सब तथ्यों के आधार पर जन-प्रतिनिधियों एवं लोक-सेवकों को अपनी सोच बदलनी  चाहिए और उत्तर प्रदेश वासियों  को हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी का ज्ञान भी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए |  हिंदी को जबरदस्ती थोपना नहीं चाहिए बल्कि इसे अपनाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए | यह और बेहतर होगा यदि सरकार त्री-भाषीय फार्मूले को  उत्तर प्रदेश में कक्षा १ से कक्षा – १० तक लागू  कर सके |  हिंदी और अंग्रेजी के अलावा तृतीय भाषा अपने देश के किसी अन्य राज्य में बोलने वाली भाषा हो सकती है |

The next thing author would like to address is languages in UP. Hindi is a great language and everyone should respect and learn it, but Hindi alone couldn’t be helpful in development of an UPaite. Nowadays there is concept of global villages. This means the whole world is assumed as a vast country and each country of the world is a small village of it. So, we can say that to actively contribute in the world economy and its culture, only Hindi couldn’t be sufficient. For example, to unite and develop the India, we came-up with a national language called Hindi. Hindi adopted as national language because it was understood and spoken by majority of Indians. Same way the world language is English, not Hindi and if want to prosper and progress, we may want to embrace English. English is international language and it’s being accepted by majority of the world populations, and if we UPaites want to become a part of the world, we must definitely learn and speak English.  

We must understand the fact that UP is not whole India or whole world and an UPaite may get other opportunities outside of the UP to become more prosperous. English could help more in that case. Many people in UP oppose English but most of them are the people whose family members have studied in convent schools and their language at home is English. UPaites shouldn’t come under influence of them. The UP government should consider making English a compulsory subject from class one in all the government aided schools. This will enable even a villager of UP to answer an English person in English, Hindi person in Hindi and a local UPaite in UPaite’s local language.

It has been proved that a villager with knowledge of English has got more opportunities to prosper than an UPaite who only speaks the Hindi. Based on these facts, the elected public representatives must mend their mind and should push for English and Hindi together. Hindi must not be forced to accept but people should be encouraged to embrace. It would be better, if government could think of tri-language pattern from the grade five. Hindi, English and third language could be any other language chosen from other states of our country.

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