भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक चिट्ठी – Letter to Mr. Manmohan Singh, Prime Minister of India

श्री मनमोहन सिंह, प्रधानमंत्री, भारत सरकार

मैं समाज के कल्याण के लिए कार्य कर रहा हूँ और इस शोध में लगा हुआ हूँ की कैसे दीन, वंचित और गरीब के जीवन यापन में कुछ सुधार लाया जाय |  मैं इस पत्र में इसके लिए कुछ योजनायें लिख रहा  हूँ और इस दिशा में आपकी सोच एक सराहनीय कदम होगा |

मैंने देखा है की सरकार, सरकारी योजनाओं जैसे ग्रामीण रोज़गार योजना और ऐसे ही अन्य दूसरे सामाजिक कल्याण की योजनों पर अथाह पैसा खर्च करती है लेकिन वास्तविकता में यह गरीबी मिटाने के लिए उतना प्रभावकारी सिद्ध नहीं हो पा रहा है जितना की होना चाहिए | इन सबका एक ही कारण है – वितरण प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार   | अधिकांशतः सरकारी नौकरों और दलालों तक ही इन योजनाओं  का पैसा सिमित होकर रह जाता है और यह कुछ ही वास्तविक लाभार्थी तक पहुँच पाता है |  अतः इस अथाह खर्च का क्या उपयोग है जब तक की इन योजनाओं को असली लाभार्थी तक पहुंचाने के लिए हमारे पास इमानदारी से लागू करने वाली सरकारी तंत्र विकसित न हो? इसलिए मैं कुछ बजट सुशाशन एवं सत्ता का गाँव स्तर तक विकेंद्रीकरण के लिए रखने के लिए प्रस्तावित कर रहा हूँ जो की भ्रष्टाचार मिटाने में कारगर सिद्ध होगी और असली लाभार्थी को उसका हक़ दिलाएगी |  बहुत  सारे राजनितिज्ञ सत्ता के विकेंद्रीकरण के बारे में अपना राय दिए हैं लेकिन इसका कार्यान्वयन उतना प्रभावी नहीं है जितना की होना चाहिए |

आज जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान का नियंत्रण आम जनता के हाथो में नहीं है और उन्हें मुख्यमंत्री के अलावा कोई नहीं हटा सकता |  चूँकि ये आम जनता के द्वारा चुनकर नहीं आते अतः इन्हें इनके  रिटायर्मेंट  के पहले नहीं हटाया जा सकता और इस तरह से  इन्हें कोई भ्रष्ट  कार्य करने में डर नहीं लगता | यदि जिलाधिकारी का चुनाव सीधे जनता के वोट  के माध्यम से पांच साल के लिए हो  तो थोडा उनमें  डर रहेगा की उनके भ्रष्ट कामों के वजह से उन्हें पांच साल के बाद सड़क पर आना पड़ सकता है | अतः वह गलत काम करने में हिचकिचाएंगे | इसके लिए मैं निम्न  संविधान बनाने का प्रस्ताव दे रहा हूँ जिससे जिला प्रशासन आम लोगों के  हाथों में होगा | 

१. राज्य के ही तर्ज पर प्रत्येक जिला स्तर पर विधान-सभा का गठन हो | इसके अंतर्गत  जिले के लोग जिले का एक मुख्यमंत्री सीधे तौर पर अपने बहुमूल्य वोट के माध्यम से  चुनें  और वो  मुख्यमंत्री चुने हुए प्रधानों से जिले के मंत्रीमंडल का निर्माण करे और जिले का प्रशासन संभालने के साथ जिले की संसाधनों की देख-भाल करे | राज्य के मुख्य-मंत्री के तरह ही जिले के मुख्य-मंत्री को जिले स्तर का संवैधानिक अधिकार (जो की आज जिलाधिकारी में निहित है )  प्राप्त हो और प्रत्येक ग्राम-प्रधान जिला विधान-सभा का सदस्य हो | राज्य सरकार, जिला सरकार के कार्यों में तब तक  दखल न दे जब तक  की यह संविधान के खिलाफ न हो (जैसा  की आज राज्यों एवं केंद्र के बीच है) | इस तरह से राज्यों को सुशाशन के वास्ते विभाजित करने के जगह जिलों को विभाजित कर सकते हैं और इसमे कम खर्च भी आएगा | 

२. मुख्यमंत्री किसी भी राजनितिक पार्टी का हो सकता है और और वह किसी भी पार्टी के प्रधान को अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर सकता है | जिले के सारे अधिकारी और कर्मचारी मंत्रिमंडल के नियंत्रण में रहें और जनता को यह अधिकार हो की मंत्रीमंडल के सदस्यों को जनता की कसौटी पर खरा न उतरने पर ५१% वोट के माध्यम से वापस बुला सके | इसके साथ ही जिले का एक लोक-पाल भी नियुक्त किया जाय जो की भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर जिले के किसी भी मंत्रिमंडल के सदस्य या अधिकारी के खिलाफ जांच कर ३-महीने में अपना फैसला सुना दे |  लोक-पाल की शाखा ब्लाक से लेकर जिले स्तर तक होनी चाहिए ताकि जनता को शिकायत के लिए दर-दर भटकना न पड़े और इसके साथ ही न्याय मिलने में देरी न हो | इस तरह से जिला प्रशासन लोगों के हाथ में होगा और यह आम जनता का स्थान लोक-सेवकों से ऊपर होने का अहसास दिलाने के साथ ही लोगों को एक भ्रष्ट-रहित सुशासन प्रदान करेगा | 

३. जिले के लिए नियुक्त IAS/IPS अधिकारी  किसी मंत्री-प्रधान के अधीन काम करेंगे और प्रधान को दिए गए विभाग में एक प्रबंधक के रूप में कार्य करेंगे |  बेकार IAS/IPS अधिकारी  को हटाने के प्रावधान के साथ इन पदों को धीरे-धीरे  प्रबंधन के पेशेवरों  से बदला जाय | इससे  IAS/IPS  पर होने वाले खर्च पर लगाम लग सकती है और सामंती युग का अंत करने में भी मदद मिलेगी | आम जनता जो की जिला सरकार में नहीं है और नियम-कानून का अक्षरशः पालन करती है उनका स्थान जिले के मुख्य-मंत्री से ऊपर होगा | जिले का मुख्य-मंत्री, सारे ग्राम-प्रधान  एवं सरकारी अधिकारी आम जनता को उचित  आदर देंगे और अपना बॉस समझेंगे | 

४. सभी जन-प्रतिनिधि के पद को वेतन पर काम करने वाला बना दिया जाय और उन पर सरकारी नौकरों का संविधान लागू हो | इस तरह से बहुत सारे शिक्षित बेरोजगारों को जन-प्रतिनिधि के रूप में काम मुहैय्या होगा और उन्हें अपने जिला-वासियों का सेवा करने का मौका भी मिलेगा | इस प्रणाली के लागू होने पर आम जनता को गाँव में ही उनका जन-प्रतिनिधि (ग्राम-प्रधान) मिल जायेगा जो उनकी समस्यों को सुलझाने के लिए जिला विधान-सभा में उनकी आवाज़ उठाएगा और उसका जल्द ही निपटारा स्थानीय अधिकारीयों  के द्वारा हो जायेगा | इसके लिए उन्हें संसद सदस्य या विधायक को पकड़ने के लिए इधर-उधर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और इससे जीवन जीना आसान  हो जायेगा |  

५. जिला स्तर पर आज के सारे सरकारी प्रारूप को वैसा ही  रख सकते हैं, सिवा इसके की  जिला स्तर  के सभी निर्णय जिला मंत्री-मंडल लेगा न की राज्य सरकार | इसके अलावा गाँव के नीचे स्तर के कर्मचारी  से लेकर जिले के मुख्य-मंत्री तक के लिए सारी सुविधाएं एक सामान होंगी | सिर्फ उनकी तनख्वाह और संवैधैनिक अधिकार में ही अंतर होगा | किसी को भी ब्रिटश राज से छानकर आ रही भव्य जीवन जीने का सुविधा सरकार के तरफ से नहीं दी जाएगी | इससे सरकार बनाने  वाले उन भ्रष्ट तत्वों पर रोक लग सकती है जो इसमे लूट-पाट एवं रुतबा के लिए आते हैं | इसके साथ ही सरकारी खर्च में बहुत ही भारी कटौती भी हो सकती है | 

जिला स्तर के पूर्ण संविधान के लिए आप हमसे हमारे इ-मेल के पता vinay_k_singh@hotmail.com पर संपर्क कर सकते हैं |

Mr. Manmohan Singh

PM of India

 I am working for the welfare of society and engaged in research on how to improve the livings of oppressed, deprived and poor citizen of India. I am providing some idea on this in this letter, and your thinking in direction of this would be highly appreciated.

 I see government is spending lot of money on Gramin Rozagaar Yozana or other welfare programs but in reality, this is not as impressive as it should be. This is only because of corruption in the distribution system. Mostly the government officials and brokers are getting benefited of such programs and it reaches to very few real people. So what is use of this extravaganza of expense until we don’t have honest system to dispense the programs? Therefore I am proposing to have some budget for good governance and decentralization of power at root level. Many politicians have thought about decentralization of power but its implementation is not as affective as we expect. I am proposing to think in line of having system at district level for improving the governance as it is currently having at states’ level. We can experiment with it in few districts and if it’s successful, later we can think of Tehsil and block level. Below I discuss, how it will work 

  1. Formation of district level assembly at district similar to states level assembly. The district level assembly should work in same line of state assembly and will govern the resources of district. The state should not interfere with its functioning until it works against constitution and state could act like centre as it acts in case of states. This way there would be no need for splitting bigger state into smaller one but we can split larger districts into smaller one for the good governance.
  2. A district governor post should be created and it should be directly elected from votes at district level. The governor should have constitutional authority at district level as a CM has at state level. Each Gram Pradhan should be member of district assembly and district governor should have right to assign post of secretaries from the elected Gram Pradhans. He/she can choose any gram pradhan for this post irrespective of political affiliation. There should be created a compulsory corruption removal department to look over and punish the corrupt government officials and elected members who practices the corruption.
  3. Each secretary selected from gram pradhans for a department would have assistant secretary as head of that department and could be an IAS officer.  This could help in creation of more positions for IAS officers and results in employments for youth. All the departments’ officials should have same format as it’s operating currently. We can hire IAS officers as per the number of departments and district governor will have right to transfer or dismiss the IAS officer without involvement of state government. Useless IAS officers can be transferred to state by district governor.
  4. There could be a district level Lok-Pal who can monitor the functioning of district government and can have power to take action against district governor or secretaries (Gram Pradhans) on their wrong doings and recommend impeachment for district governor. Also, public should have right to recall any district level elected members if 51% of elected members’ constituents are not happy with functioning of an elected member.
  5. The general public, not in government and follows the law of land, should be treated superior than district governor and every elected member should give respect to the public and think public as their boss.
  6. All the elected members should be paid and treated as public servant. This will allow many educated young unemployed youth to get jobs as elected members and chance to serve the people of a district.
  7. This system will help public to get their grievances handled very quickly and in quality manner, and there will be no need to spend money on getting hold of MLA or MP to help them on their complaint or visit to state’s capital. The general public will be more capable to visit district than state’s capital. They can find their representative (Gram Pradhan) everyday near them right there in their village.  Gram Pradhan can raise the poor’s voice and complaints everyday in district assembly to be taken care by respective officials immediately.
  8. All other formats of government will work as is; expect the district government’s employees and district level decisions should be made by elected government at the district level. There would be need of budget for this but, if there is a will, there is way. Like, we spend too much on other governments programs without having good results, why not we could cut budget from them and divert to this novel and innovative idea.

 Please write me at vinay_k_singh@hotmail.com for more details on district level constitution.

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