शाहरुख खान के अपमान पर इतना हो-हल्ला क्यों – क्या हम समानता का कानून लागू करना नहीं चाहते हैं? – Why cry on Shahrukh’s humiliation – don’t we want to practice equality?

मैं पिछले दो-तीन दिनों से यह देख रहा हूँ की शाहरुख खान की अमेरिका के नेवार्क  हवाई  अड्डे  पर  सघन सेक्योरिटी  जाँच   होने के वजह से  मीडिया और केंद्र सरकार ने बहुत हो-हल्ला मचा रखा है और आसमान को सर  पे  उठा  रखा  है | यह कोई बहुत बड़ा मुद्दा नहीं है लेकिन मुझे यह बात समझ में नहीं आती है की क्यों मीडिया और सरकार ने इसे अहम् का मुद्दा बना रखा है? ऐसा हर रोज़ हर किसी न किसी के साथ होता रहता है |  क्या अमीर या प्रसिद्ध होना हमें आम जनता से अलग और ऊपर होने का  हक़ दिला देता है या हमें दुनिया के और जन से ऊपर कर देता है? कम से कम मैं तो ऐसा नहीं सोचता लेकिन सामंती युग की मानसिकता वाले मीडिया के लोगों और लोक-सेवकों के बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता |  मैं आम जन,  प्रभावशाली व्यक्तियों एवं  सरकारी  नौकरों से यह आग्रह करता हूँ की ब्रिटिश राज से चली आ रही   गुलामी  की मानसिकता  वाली परंपरा को त्यागें और एक साथ काम कर भारतीय मानसिकता से अमीर, प्रसिद्ध, प्रभावशाली  या गरीब में फर्क करने की पद्धति को मिटाने की कोशिश करें | यह तभी हो सकता है जब ऐसे सभी जन-प्रतिनिधि, लोक-सेवक, अमीर, प्रसिद्ध एवं प्रभावशाली  के साथ वही व्यवहार किया जाय जैसा एक आम जन या गरीब के साथ होता है |  यहाँ अमेरिका में कोई कितना  ही धनी, प्रभावशाली  या यहाँ तक की किसी राज्य का राज्यपाल  क्यों न हो, उसका आम जन कोई भी परवाह नहीं करता और उनके साथ आम जनता के तरह की व्यवहार किया जाता है, और यहाँ ये लोग भी इसे बिना किसी अहम् के दिल से स्वीकारते हैं |  लेकिन  मेरी  समझ  यह नहीं आता की भारतीयों के खून में ऐसा क्या है की सामंती और अहम् वाली परंपरा का त्याग करने में असक्षम हैं?  हम क्यों प्रभावशाली सरकारी नौकरों जैसे संसद सदस्य, मंत्री, मुख्य-मंत्री इत्यादि या अमीर या प्रसिद्धि प्राप्त व्यक्तियों को महत्व देते हैं?  क्या वे पहले से ही हर एक सुविधा पाए हुए नहीं हैं?  फिर क्यों वे प्रजा-तंत्र में प्राप्त हम आम जन की एक छोटे से समानता के अधिकार को छीनना चाहते हैं? क्या शाहरुख खान जैसा होना हमें कानून-व्यवस्था से ऊपर कर देता है? लेकिन हमारी भारतीय मानसिकता ऐसा सोचने को मजबूर है |  

शाहरुख खान  जैसे लोग उस स्थान पर आम  जनता के  द्वारा  तरजीह  देने  के वजह से हैं लेकिन आम जनता उनकी वजह से नहीं है, सबको इसकी समझ होनी चाहिए |  भारतीय व्यवस्था का पालन करने वालों को भी ऐसे लोगों को महत्व देने की परंपरा को त्यागनी होगी |  भारत सरकार के लिए भारत के सभी नागरिक एक सामान होने चाहिए और उसे जाति, रंग, धन, प्रभाव, धर्म, अमीर, गरीब या ऐसे किसी अन्य विषयों के ऊपर भेद-भाव नहीं करना चाहिए |  यदि मीडिया और भारत सरकार को इतना ही चिंता है तो वह क्यों नहीं भारत के हर उस नागरिक के लिए हो-हल्ला मचाती  तो जो ऐसी जांच और अपमान से रोज़ गुजरते हैं? ये लोग तो इस अपमान का परवाह भी नहीं करते लेकिन शाहरुख जैसे लोग इसे अहम् का मुद्दा क्यों बनाते हैं?  ऐसा तो अंग्रेजों के जमाने में अंग्रेज किया करते थे | हमें लगता है की भारत सरकार ने इसे मुद्दा इसलिए बनाया है ही शाहरुख का सरकार में अच्छा प्रभाव है और सरकार  भी उन्हें खुश रखना चाहती है |  प्रभाव का कारण (चंदा या कुछ और) तो कांग्रेस पार्टी ही बता सकती है जिसका की केंद्र में सरकार है |  और यही तथ्य मीडिया के लोगों साथ भी सही बैठते  हैं |  भ्रष्टाचार मिटाओ, भारत बचाओ के माध्यम से ही हम समानता के अधिकार को लागू कर सकते हैं और भ्रष्टाचार मिटाओ सेना इसके लिए कटिबद्ध है |  अमेरिकियों ने बहुत ही अच्छा काम किया है और इसके लिए उन्हें मेरी सलामी!!!

I saw last couple of days media and government crying foul on security check of Shahrukh at Newark airport. This is not a big deal but why media, government and he are making it a big deal? I don’t understand. It happens everyday to general public. Is rich and famous different than general public or above the world? I don’t think so. Please discard slavery mentality from mind and work together to remove the difference between rich and poor from our Indian mentality, like it happens in US. Here in US, citizens don’t care about such rich or famous person, or even for governor or bureaucrats of a state and they are treated just like a general person. Why we give importance to such persons or lok-sevaks, because they are rich and famous. Our Indian mentality is making to think Shahrukh like person as above the law & order. He is there because of public but the vice-versa is not true. So why should we give importance to such person? For Indian government, every citizen should be equal, irrespective of cost, creed or any other things. If media or government wants to care such individual then why don’t you take up the case of every Indians who suffers with this humiliation everyday? This is only because; he could influence the government or owns the media. Bhrastachar mitao, Bharat Bachao, this is the only way; we can achieve equality in India. My salute to Americans…good job done Americans.!!!!

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