लालगढ़ का हादसा क्यों हुआ? – Why Lalgadh Incident Happened

प्रिय मीडिया और दूसरे बड़े लोग,

लालगढ़, पश्चिम बंगाल  में लोगों ने सरकारी नौकरों के खलाफ मोर्चा खोल दिया, क्यों? विकाश का धन कहाँ जा रहा है?  इतना धन खर्च करने पर भी जैसा विकाश दिखना चाहिए, वैसा विकाश भारत में, और ज्यादातर नक्सल प्रभावित इलाकों में क्यों नहीं दिखाई दे रहा है? आखिर क्यों लोग (यहाँ लोगों से मेरा अभिप्राय दबे-कुचले, वंचित, अभाव-ग्रसित एवं भारत की गरीब जनता से है ) सरकार के खिलाफ बगावत कर रहे हैं? आज भारत में गृह-युद्ध जैसी परिस्थिति क्यों पैदा हो रही है? इन सभी  प्रश्नों का उत्तर केवल एक ही है – व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार | हाँ,  भारत के अधिकांशतः लोगों के खून में भ्रष्टाचार का कीड़ा इस कदर घुस गया है की लोग इस झूठ-मूठ की प्रजा-तंत्र से त्रस्त एवं निराश हो चुके हैं और इसलिए कानून-व्यवस्था अपने हाथों में ले रहे हैं |  लोग सरकार से जो उम्मीद किये थे वह नहीं मिल रहा है, हकदारों को उनके हक़ से वंचित होना पड़ रहा है, सरकारी विभाग लोगों की शिकायतों  को सुनकर एक तय समय-सीमा में सुलझाने में नाकामयाब  है, भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है,  भ्रष्टाचारियों  में कोई डर नहीं है और वे सीना ताने राज कर रहे हैं, अतः जनता के  पास कोई विकल्प नहीं बचा है, सिवा इसके की वे अब भ्रष्ट सरकारों के खिलाफ लड़ाई छेड़ें  | कोई भी सरकार सरकारी-तंत्र के कार्य-प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार के प्रति गंभीर नहीं है और जब इसकी वजह से लोग कानून-व्यस्था को अपने हाथों में लेकर सरकार के विरुद्ध हथियार उठा लेते है तो सरकार जागती है और कहती है की समस्या का समाधान लोक-तांत्रिक तरीके से ढूंढा जाय |  मुझे यह नहीं पता की सरकार तब क्यों नहीं जागती  है और लोगों के शिकायतों पर ध्यान नहीं देती है जब वे उससे अनुरोध करते हैं, लेकिन सरकार तब जागती है जब यह नियंत्रण के बाहर चला जाता है | मैं पिछले दो सालों से विभिन्न सरकारों से गुजारिश कर रहा हूँ की भ्रष्टाचार के खिलाफ संजीदा होवो और कुछ ऐसा कदम उठाओ जिससे की भ्रष्टाचारियों में डर पैदा हो, लेकिन सरकारें इसे गंभीरता से नहीं ले रहीं है और अभी तक भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए जोश-खरोश या कोई मुहीम हमने अभी तक किसी भी सरकार में नहीं देखा | क्या भारत में जन-तांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की मांग करना वास्तव में काम कर रहा है? मुझे लगता है, नहीं |

मैं यहाँ स्वयं  के द्वारा पश्चिम बंगाल में  भुक्त-भोगी एक कहानी बयाँ कर रहा हूँ |  मैं एक टूर पर था और अपने परिवार के साथ सिलीगुड़ी से कोलकता के लिए बस के माध्यम से यात्रा करना चाह रह था | इसके लिए मैं सिलीगुड़ी के सरकारी बस स्टैंड पर गया और वहां पाया की एक सरकारी बस सिलीगुड़ी से कोलकता जाने के लिए खड़ी  है |  बस में बहुत सारी सीटें खाली पड़ी थीं और उसके जाने में अभी आधा घंटा बाकी था | बस में बैठे यात्रियों ने बताया की बुकिंग खिड़की से टिकट  लेकर बस में बैठ जाईये | मैं बुकिंग खिड़की पर टिकट लेने गया तो पाया की कतार में सिर्फ मैं हूँ | जब मैं  क्लर्क से टिकट माँगा तो उसने बताया की जिस दिन सफ़र करना है उस  दिन पर टिकट लेने पर प्रति टिकट रुपये ५०/- सुविधा-शुल्क देना पड़ता है | यह सुनकर मैं अचंभित रह गया और सोचने लगा की पश्चिम  बंगाल  में कैसी सरकार है जहाँ खुलेआम भ्रष्टाचार है और सरकारी नौकरों की हिम्मत यहाँ तक बढ़ गयी है  की बस में जगह होने के वावजूद टिकट देने से मना कर देते हैं और सरकारी कोष के घाटे को भी ध्यान में नहीं रखते | ऐसे लोग सरकारी नौकरी के काबिल नहीं है फिर भी सरकार में भ्रष्ट लोग इसे कोई समस्या नहीं मानते और ढीठाई  के साथ लूट-खसोट में लगे हुए हैं | मैंने क्लर्क को बोला भी की मैं तुम्हारी, तुम्हारे ऊपर के बॉस से इसकी  शिकायत करूंगा  लेकिन उसने मुझे धमकी देते हुए अंदाज में बोला की जो भी उखाड़ना है उखाड़ लो | मैं वहां अधिकारियों को ढूंढ़कर  इसकी शिकायत किया लेकिन वे सब मिले हुए थे और वे बताये  की यह सुविधा-शुल्क सब लोग दे रहें हैं और आप भी दे दीजिये |  मैं इससे इतना निराश हो गया की सोचने लगा की क्यों न मैं भी कानून अपने हाथों में ले लूं और क्लर्क के साथ-साथ अधिकारियों को भी एक-एक थप्पड़ जड़ दूं, लेकिन परिवार के साथ होने के कारण ऐसा न कर सका | मैं इतना पागल हो गया था की मैं उन्हें जान से मारकर नक्सल समूह में शामिल हो जाना चाह रहा था,  लेकिन भविष्य एवं परिवार की परेशानियों को सोचकर मुझे अपने कदम पीछे खींचने  पड़े |  फिर मैं निजी बस से सफ़र किया जहाँ मुझे कोई भी सुविधा-शुल्क नहीं देना पड़ा | आम लोगों के प्रतिदिन की दिन-चर्या में सरकारी कामों के लिए यही सब हो रहा है | आम जनता  को अपना  हक़ पाने के लिए घूस देने के लिए  मजबूर किया जाता है और शिकायत करने पर भी भ्रष्ट लोगों के खिलाफ सजा के लिए कोई सुनवाई नहीं है |

इन सब समस्यायों का  समाधान क्या है?  हम सरकार इसलिए बनाते हैं की वह आम जनता की प्रतिदिन की परेशानियों  पर ध्यान दे ताकि उनके जीवन-यापन में कुछ सुधार आये लेकिन एक लम्बे इन्तजार के बाद भी कहीं कोई सुधार नहीं दिखाई देता | विकाश के नाम पर खजाना खोला जाता है लेकिन भ्रष्ट सरकारी-तंत्र की वजह से उसका कोई असर दिखाई  नहीं देता है |  अब लोग और कितना इन्तजार करेंगे?  इंतज़ार लोगों में गुस्सा पैदा कर रह है और इस गुस्से की वजह से लोग अपने हक़ को पाने के लिए हथियार उठाकर सरकार से एक-दो हाथ करने के लिए तैयार हो रहे हैं |  अब सरकारें क्या करेंगी | वे अब अपने ही लोगों के खिलाफ  सरकारी मशीनरी की सहायता  से युद्ध लड़ेंगे और  एक बहुत बड़ी तबाही यानी की गृह-युद्ध की शुरुआत होगी |  मुझे ऐसा नहीं लगता की इस परिदृश्य में सरकार लोगों की अपेक्षाओं और उनके हक़ को बहुत दिनों से  दबाये हुए होने के वावजूद  सैन्य अभियान  के बाद भी और दिनों तक दबा पायेगी |  

मैं एक अखबार में केंद्रीय सरकार के प्रथम १०० दिनों के एजेंडा के बारे में पढ़ा लेकिन कहीं भी भ्रष्टाचार, जो की हर सरकारी योजनाओं की असफलता का मूल कारण है, से लड़ने के बारे में एक सन्दर्भ  भी नहीं मिला | कभी-कभी मुझे लगता है की यदि सरकार मेरे अनुरोधों पर कार्य नहीं करती है तो मुझे भी सरकार  से लड़ने के वास्ते एक संगठन का निर्माण कर लेना चाहिए |  इस संगठन का नाम ‘भ्रष्टाचार मिटाओ सेना’ रखनी चाहिए |  इस संगठन के अंतर्गत बेरोजगार युवकों को नौकरी देकर उनसे सरकारी नौकरों को इस लाईन पर चेतावनी दिलाई  जाय की, या तो वे (सरकारी नौकर) रिश्वतखोरी एवं लूट-पाट छोड़ दें, या तो गंभीर परिणाम  को भुगतने के लिए तैयार रहें |  यह संगठन सरकारी नौकरों  के साथ काम कर उनको सुधारने की कोशिश  करेगी और उनके न सुधरने पर कनून-व्यस्था को अपने हाथ में लेकर उन्हें सजा देगी |  हमारे जैसी सोच वाले लोग और हमारे दोस्त इस विचार का समर्थन कर रहे हैं |  कृपया बताएं की इस पर आप लोगों का सुझाव क्या है?

Where the money is going? Why development is not visible as it should be? Why people (people here mean suppressed, deprived and poor citizen of India) are revolting against government? Why civil war like situation is erupting. The answer of all these questions is only one, the corruption in the system. Yes, due to problem of corruption so rooted in system of India, people are getting frustrated and want to take the Law & Order in their hand. People are not getting what they expect, they are not getting their rights, there is no one addressing their grievances in timely manner and listening request against corruption, there is no action taken against corrupt officials, then what are the options left for the people. Governments are not serious about the corruption and when people start taking Law & Order in their hand and use arms, government is asking to short the issue in democratic way. I don’t know why government is not taking action when people request to do so but when it goes out control, then only the government awakes. I have been requesting governments since last two years to be serious about corruption, which the real root of the problem, but governments are not serious about it and I have not yet seen any mobilization on removal of corruption. Is the democratic way of demanding our right is really working?

 I would like tell you my own story here. Once I was on a tour and wanted to travel from Siligudi to Calcutta (in West Bengal) with my family by bus. There was a government bus standing on the bus-stop and there were plenty of seats available and there was half hour left to depart from Siligudu to Calcautta. I went to booking window for the ticket. There was no one in queue and I was the first and asked for the ticket. The booking clerk told me that I have to pay Rs 50.00 additional apart from fare for each ticket, if I want to travel today, else if want to book for next day, there will no additional bribe to pay. I fought and asked there are seats available and I will not pay a single paisa in bribe. If you don’t give the ticket, I will report to higher authority. The booking clerk told me to leave the window immediately and go and report wherever you want. I requested other senior officials presented there and they told the same thing that I have to pay for this. Everyone pays and his is the part of system. I was really frustrated and though to take law and order in my hand and slap everyone there. Even, I wanted to kill these government officials but no one was there to support me and since I was with my family, I didn’t want to trouble them and go to jail. I left the booking window and went to private bus stand and got tickets for Calcutta. This is what happening everyday in the life of general public. People are forced to pay for their rights and there is no punishment for corrupt officials. This is making poor a poorer and rich a richer everyday. What is the solution for this? We choose government to work on issue our public facing everyday to improve the life but after a long wait, there is no improvement. Government is spending so much money but why don’t we see any change? How long people will wait? This will create anger in people and in anger; people will take arm in their hands and will start a fight with government for their rights. Then what government will do? They will fight a war with their own people with government machinery and there will start havoc, a civil war. I don’t think this scenario is very far way and people demand for their rights can’t be suppressed so long and even military operation can’t help.

 I read the central government agenda for first 100 days in a newspaper but I nowhere read any reference to corruption, the root cause of the failure of the welfare programs. Sometimes I think that if government will not work on my request, I should start an organization to fight with government. Name the organization as “Bhrastachar Mitao Sena” (Corruption Removal Army). This will employ the unemployed youths and warn the government employee on the line of, ‘don’t bribe, else face the consequences’. This organization will try to work with government employees and if they will not mend, the organization will take law and order in its own hand. Like minded people and friends are supporting this idea. Please suggest what do you think?

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